भारत का सेमीकंडक्टर मिशन: लगभग 1.64 लाख करोड़ रुपये के निवेश के साथ 12 परियोजनाएं स्वीकृत
Aसीधा उत्तर
भारत ने ISM के तहत 1.6 लाख करोड़ रुपये के निवेश वाली 10 सेमीकंडक्टर परियोजनाओं को मंजूरी दी; केन्स सेमिकॉन ने सानंद से पहली चिप भेजी और राजस्थान अलग सेमीकंडक्टर नीति लाने की योजना बना रहा है।
मुख्य तथ्य
भारत ने इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन के तहत 1.6 लाख करोड़ रुपये से 10 परियोजनाएं स्वीकृत कीं।
केन्स सेमिकॉन ने सानंद, गुजरात स्थित सुविधा से चिप की पहली खेप भेजी।
राजस्थान चिप विनिर्माण निवेश आकर्षित करने के लिए समर्पित सेमीकंडक्टर नीति बना रहा है।
ISM का लक्ष्य भारत को सेमीकंडक्टर डिजाइन और विनिर्माण में आत्मनिर्भर बनाना है।
परियोजनाएं चिप डिजाइन से लेकर असेंबली, परीक्षण और पैकेजिंग तक पूरी मूल्य शृंखला को शामिल करती हैं।
सेमीकंडक्टर क्षेत्र भारत की रणनीतिक और आर्थिक सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
अक्टूबर 2025 तक भारत ने भारत सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) के तहत छह राज्यों में 10 सेमीकंडक्टर परियोजनाओं को मंजूरी दी थी, जिनमें कुल निवेश 1.6 लाख करोड़ रुपये (लगभग 18-19 अरब डॉलर) से अधिक है। स्वीकृत परियोजनाओं में फैब इकाइयाँ, उन्नत पैकेजिंग (OSAT/ATMP यूनिट) और कम्पाउंड सेमीकंडक्टर शामिल हैं। केन्स सेमिकॉन ने गुजरात के सानंद स्थित अपनी OSAT इकाई से पहले पेड चिप मॉड्यूल भेजे हैं।
राजस्थान ने मार्च 2026 में समर्पित राजस्थान सेमीकंडक्टर नीति जारी की। 2021 में शुरू किया गया ISM सेमीकंडक्टर फैब्स की स्थापना के लिए 50% तक प्रोत्साहन देता है। ये कदम डिजिटल इंडिया और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्यों के अनुरूप हैं।
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मेन्स दृष्टिकोण
प्रश्न: भारत सेमीकंडक्टर मिशन की घरेलू चिप विनिर्माण क्षमता निर्माण में प्रगति का मूल्यांकन करें और आत्मनिर्भर भारत के लिए इसका महत्व समझाएं।
उत्तर (50 शब्द):
2021 में शुरू हुए भारत सेमीकंडक्टर मिशन ने छह राज्यों में 10 परियोजनाओं को 1.6 लाख करोड़ रुपये के निवेश से स्वीकृति दी और फैब पर 50% तक प्रोत्साहन देता है। केन्स सेमिकॉन ने सानंद, गुजरात से चिप की पहली खेप भेजी, जिससे रक्षा, दूरसंचार, इलेक्ट्रिक वाहनों व इलेक्ट्रॉनिक्स में आयात निर्भरता घटेगी।
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भारत सेमीकंडक्टर मिशन के तहत सानंद, गुजरात की ओएसएटी इकाई से पहले वाणिज्यिक चिप मॉड्यूल किस भारतीय कंपनी ने भेजे?
व्याख्या · सही उत्तर D
कायनेस सेमिकॉन ने सानंद, गुजरात स्थित अपनी ओएसएटी इकाई से पहले भुगतान-आधारित चिप मॉड्यूल भेजे। ये मॉड्यूल अमेरिकी और घरेलू, दोनों ग्राहकों के लिए थे। भारत के स्वदेशी चिप निर्माण में यह एक महत्त्वपूर्ण उपलब्धि मानी गई।
भारत सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) क्या है और इसमें राजकोषीय सहायता की व्यवस्था क्या है?
भारत सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) देश में टिकाऊ सेमीकंडक्टर और डिस्प्ले विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने की भारत सरकार की पहल है। इसके तहत डिज़ाइन लिंक्ड इंसेंटिव (DLI) योजना में 50% तक राजकोषीय सहायता और फैब व ATMP इकाइयों के लिए पूंजी सहायता दी जाती है। सरकार ने ISM के तहत 1.6 लाख करोड़ रुपये के कुल निवेश वाली 10 सेमीकंडक्टर परियोजनाएं स्वीकृत की हैं।
केन्स सेमिकॉन कौन है और सानंद से उसकी पहली चिप खेप का क्या महत्व है?
केन्स सेमिकॉन एक भारतीय सेमीकंडक्टर कंपनी है और केन्स टेक्नोलॉजी की सहायक कंपनी है। गुजरात के सानंद में इसकी इकाई से भारत में निर्मित पहले सेमीकंडक्टर चिप्स भेजे गए, जो सेमीकंडक्टर आत्मनिर्भरता की दिशा में भारत के प्रयासों का एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है। इससे साबित हुआ कि भारत अब केवल चिप डिज़ाइन से आगे बढ़कर वास्तविक चिप निर्माण में सक्षम है।
राजस्थान सेमीकंडक्टर क्षेत्र के लिए क्या समर्पित नीति बना रहा है और क्यों?
राजस्थान राज्य में चिप विनिर्माण निवेश आकर्षित करने के लिए एक समर्पित सेमीकंडक्टर नीति बना रहा है। राजस्थान के संभावित लाभों में बेहतर होता औद्योगिक बुनियादी ढाँचा, भूमि की उपलब्धता, जयपुर जैसे शहरों में मौजूदा इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्लस्टर, और डेटा सेंटरों के लिए सौर ऊर्जा क्षमता शामिल हैं। राज्य स्तरीय प्रोत्साहनों वाली यह समर्पित नीति केंद्रीय ISM सहायता की पूरक होगी।
भारत की स्वीकृत सेमीकंडक्टर परियोजनाओं में पूरी मूल्य शृंखला के कौन-कौन से हिस्से शामिल हैं?
ISM के तहत भारत की 10 स्वीकृत सेमीकंडक्टर परियोजनाएं पूरी सेमीकंडक्टर मूल्य शृंखला को शामिल करती हैं: चिप डिजाइन (फैबलेस डिजाइन हाउस), फैब्रिकेशन (वेफर विनिर्माण फैब), और ATMP — असेंबली, टेस्टिंग, मार्किंग और पैकेजिंग। पूरी शृंखला पर काम करना इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि केवल एक खंड पर निर्भर रहने से (जैसे चिप डिजाइन) भारत विनिर्माण के लिए विदेशी देशों पर निर्भर बना रहता है।
भारत के लिए सेमीकंडक्टर आत्मनिर्भरता रणनीतिक रूप से क्यों महत्वपूर्ण है?
सेमीकंडक्टर सभी आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स — स्मार्टफोन और कंप्यूटर से लेकर मिसाइल, उपग्रह और चिकित्सा उपकरणों तक — का मूलभूत घटक है। भारत सालाना लगभग ₹40–50 अरब डॉलर मूल्य के चिप्स का आयात करता है। ताइवान और चीन पर अत्यधिक निर्भरता आपूर्ति श्रृंखला में कमजोरियाँ पैदा करती है, जैसा COVID-19 के दौरान 2020-22 की वैश्विक चिप कमी में दिखा। स्वदेशी सेमीकंडक्टर क्षमता सीधे भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा, आत्मनिर्भर भारत और तकनीकी संप्रभुता को मजबूत करती है।
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