भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अक्टूबर 2025 में ऑस्ट्रेलिया के उप प्रधानमंत्री एवं रक्षा मंत्री रिचर्ड मार्ल्स के साथ कैनबरा में पहले भारत-ऑस्ट्रेलिया रक्षा मंत्री संवाद में भाग लिया। प्रमुख परिणाम थे: (1) पनडुब्बी बचाव सहयोग पर क्रियान्वयन व्यवस्था पर हस्ताक्षर; (2) 2024 की वायु-ईंधन आपूर्ति व्यवस्था को लागू करना; (3) आपसी संचालन क्षमता के लिए संयुक्त स्टाफ वार्ता की स्थापना; (4) संयुक्त समुद्री सुरक्षा रोडमैप; तथा (5) भारतीय शिपयार्ड में रॉयल ऑस्ट्रेलियन नेवी के जहाजों के लिए MRO सेवाओं का प्रस्ताव। दोनों देश वार्षिक संवाद पर सहमत हुए। यह साझेदारी क्वाड समन्वय और भारत की 'एक्ट ईस्ट' नीति के तहत हिंद-प्रशांत रणनीति को दर्शाती है।
भारत-ऑस्ट्रेलिया रक्षा मंत्री संवाद 2025: हिंद-प्रशांत में ऐतिहासिक रणनीतिक साझेदारी
भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अक्टूबर 2025 में ऑस्ट्रेलिया के उप प्रधानमंत्री एवं रक्षा मंत्री रिचर्ड मार्ल्स के साथ कैनबरा में पहले भारत-ऑस्ट्रेलिया रक्षा मंत्री संवाद में भाग लिया। इसके प्रमुख परिणाम रहे: (1) पनडुब्बी बचाव सहयोग के लिए क्रियान्वयन व्यवस्था पर हस्ताक्षर; (2) 2024 की वायु-ईंधन आपूर्ति व्यवस्था को लागू करना; (3) आपसी संचालन क्षमता के लिए संयुक्त स्टाफ वार्ता की स्थापना; (4) संयुक्त समुद्री सुरक्षा रोडमैप; तथा (5) भारतीय शिपयार्ड में रॉयल ऑस्ट्रेलियन नेवी के जहाजों की MRO सेवाओं का प्रस्ताव। दोनों देश वार्षिक संवाद पर सहमत हुए। यह साझेदारी क्वाड समन्वय एवं भारत की 'एक्ट ईस्ट' नीति के तहत हिंद-प्रशांत रणनीति को दर्शाती है।
मुख्य तथ्य
- रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कैनबरा में पहले भारत-ऑस्ट्रेलिया रक्षा मंत्री संवाद में भाग लिया।
- प्रमुख परिणामों में पनडुब्बी बचाव सहयोग और हवा में ईंधन भरने की व्यवस्था को संचालित करना शामिल है।
- अंतर-संचालनीयता के लिए संयुक्त स्टाफ वार्ता और संयुक्त समुद्री सुरक्षा रोडमैप तय किए गए।
- भारत ने भारतीय शिपयार्डों में ऑस्ट्रेलियाई नौसेना के जहाजों के लिए MRO सेवाओं की पेशकश की।
- दोनों देश वार्षिक संवाद पर सहमत हुए; यह क्वाड समन्वय के और मजबूत होने को दिखाता है।
- इस साझेदारी से एक्ट ईस्ट नीति के तहत भारत की हिंद-प्रशांत रणनीति को बल मिलता है।
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पहले भारत-ऑस्ट्रेलिया रक्षा मंत्रियों के संवाद 2025 के प्रमुख परिणामों में से एक किस सहयोग के लिए कार्यान्वयन व्यवस्था पर हस्ताक्षर था?
कैनबरा में पहली भारत-ऑस्ट्रेलिया रक्षा मंत्रिस्तरीय वार्ता हुई। इसमें पारस्परिक पनडुब्बी बचाव सहायता और सहयोग संबंधी कार्यान्वयन व्यवस्था पर हस्ताक्षर हुए। अन्य परिणामों के साथ हवा में ईंधन भरने की 2024 की व्यवस्था भी क्रियान्वित की गई।
स्रोत: समाचार स्रोत
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भारत-ऑस्ट्रेलिया रक्षा मंत्री संवाद 2025 क्या था और यह कहाँ आयोजित हुआ?
पहला भारत-ऑस्ट्रेलिया रक्षा मंत्री संवाद अक्टूबर 2025 में कैनबरा, ऑस्ट्रेलिया में आयोजित हुआ। भारत का प्रतिनिधित्व रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने और ऑस्ट्रेलिया का प्रतिनिधित्व उप प्रधानमंत्री एवं रक्षा मंत्री रिचर्ड मार्ल्स ने किया। यह दोनों देशों के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी के तहत पहला समर्पित रक्षा मंत्रिस्तरीय संवाद था।
इस संवाद में पनडुब्बी बचाव सहयोग को लेकर जिस क्रियान्वयन व्यवस्था पर हस्ताक्षर हुए, वह क्या है?
पनडुब्बी बचाव सहयोग पर क्रियान्वयन व्यवस्था ऐसा समझौता है, जिसके तहत पनडुब्बी से जुड़ी आपात स्थिति में भारत और ऑस्ट्रेलिया एक-दूसरे की मदद कर सकते हैं। इस व्यवस्था के तहत दोनों नौसेनाएँ उपकरण और विशेषज्ञता साझा कर बचाव सहायता दे सकती हैं, जिससे हिंद-प्रशांत में पनडुब्बी सुरक्षा और समुद्री सहयोग मजबूत होता है।
भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच हवा में ईंधन भरने की व्यवस्था का क्या महत्व है?
2025 के संवाद में लागू की गई 2024 की हवा में ईंधन भरने की व्यवस्था भारतीय वायु सेना और रॉयल ऑस्ट्रेलियन वायु सेना के विमानों को उड़ान के दौरान एक-दूसरे से ईंधन लेने की अनुमति देती है। इससे दोनों वायु सेनाओं की परिचालन रेंज और उड़ान क्षमता काफी बढ़ जाती है, जिससे जमीन पर स्थित ईंधन केंद्रों पर निर्भर हुए बिना हिंद-प्रशांत में गहरे समुद्री गश्त और हमले के अभियान संभव होते हैं।
संयुक्त स्टाफ वार्ता क्या है और भारत-ऑस्ट्रेलिया के बीच इसकी स्थापना क्यों की गई?
संयुक्त स्टाफ वार्ता दो देशों के वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों के बीच औपचारिक सैन्य परामर्श तंत्र है, जिसका लक्ष्य अंतर-संचालनीयता, यानी संयुक्त अभ्यास या वास्तविक अभियानों में मिलकर काम करने की क्षमता, को बेहतर बनाना है। भारत और ऑस्ट्रेलिया ने प्रक्रियाओं, संचार प्रोटोकॉल और सामरिक मानकों में तालमेल बनाकर क्वाड रक्षा सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए यह वार्ता स्थापित की।
भारत-ऑस्ट्रेलिया रक्षा मंत्री संवाद भारत की एक्ट ईस्ट नीति और RPSC परीक्षा विषयों से कैसे जुड़ता है?
यह संवाद भारत की एक्ट ईस्ट नीति का एक प्रमुख स्तंभ है, जो हिंद-प्रशांत देशों के साथ रणनीतिक और आर्थिक संबंधों को मजबूत बनाने का प्रयास करती है। यह RPSC विषयों जैसे भारत की विदेश नीति, द्विपक्षीय संबंध, क्वाड समूह (भारत, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, जापान) और भारत की समुद्री सुरक्षा रणनीति के लिए प्रासंगिक है।
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