27 अक्टूबर 2025 को भारतीय वायु सेना (IAF) के कर्मी S-400 ट्रायम्फ वायु रक्षा प्रणाली का विशेष प्रशिक्षण लेने के लिए रूस रवाना हुए। यह प्रशिक्षण 2026 में भारत के चौथे S-400 स्क्वाड्रन की तय आपूर्ति से पहले हो रहा है। पाँच अतिरिक्त S-400 प्रणालियों के लिए नई दिल्ली और मास्को के बीच बातचीत भी जारी है। दुनिया की सबसे उन्नत लंबी दूरी की वायु रक्षा प्रणाली मानी जाने वाली S-400 विमान, क्रूज मिसाइल और बैलिस्टिक मिसाइल सहित कई हवाई लक्ष्यों पर एक साथ नज़र रखकर उन्हें नष्ट कर सकती है। भारत की S-400 खरीद पहले प्रतिबंधों के ज़रिए अमेरिका के विरोधियों का मुकाबला अधिनियम (CAATSA) के तहत अमेरिकी प्रतिबंधों की जाँच के दायरे में आई थी, लेकिन मामला कूटनीतिक स्तर पर सुलझ गया।
S-400 प्रशिक्षण के लिए भारतीय वायु सेना (IAF) के कर्मी रूस रवाना; चौथे स्क्वाड्रन की आपूर्ति 2026 में
27 अक्टूबर 2025 को भारतीय वायु सेना (IAF) के कर्मी S-400 ट्रायम्फ वायु रक्षा प्रणाली का विशेष प्रशिक्षण लेने के लिए रूस रवाना हुए। यह प्रशिक्षण 2026 में भारत के चौथे S-400 स्क्वाड्रन की तय आपूर्ति से पहले हो रहा है। पाँच अतिरिक्त S-400 प्रणालियों के लिए नई दिल्ली और मास्को के बीच बातचीत भी जारी है। दुनिया की सबसे उन्नत लंबी दूरी की वायु रक्षा प्रणाली मानी जाने वाली S-400 विमान, क्रूज मिसाइल और बैलिस्टिक मिसाइल सहित कई हवाई लक्ष्यों का एक साथ पता लगाकर उन्हें नष्ट कर सकती है। भारत की S-400 खरीद पहले प्रतिबंधों के ज़रिए अमेरिका के विरोधियों का मुकाबला अधिनियम (CAATSA) के तहत अमेरिकी प्रतिबंधों की जाँच के दायरे में आई थी, लेकिन मामला कूटनीतिक स्तर पर सुलझ गया।
मुख्य तथ्य
- भारतीय वायु सेना (IAF) के कर्मी 27 अक्टूबर 2025 को S-400 ट्रायम्फ वायु रक्षा प्रणाली के प्रशिक्षण के लिए रूस रवाना हुए।
- यह प्रशिक्षण 2026 में भारत के चौथे S-400 स्क्वाड्रन की तय आपूर्ति से पहले हो रहा है।
- भारत और रूस के बीच पाँच अतिरिक्त S-400 प्रणालियों को लेकर बातचीत जारी है।
- S-400 विमान, क्रूज मिसाइल और बैलिस्टिक मिसाइल का एक साथ पता लगाकर उन्हें नष्ट कर सकती है।
- भारत की S-400 खरीद पहले प्रतिबंधों के ज़रिए अमेरिका के विरोधियों का मुकाबला अधिनियम (CAATSA) के तहत अमेरिकी प्रतिबंधों की जाँच के दायरे में आई थी, लेकिन मामला कूटनीतिक स्तर पर सुलझ गया।
- S-400 ट्रायम्फ को दुनिया की सबसे उन्नत लंबी दूरी की वायु रक्षा प्रणाली माना जाता है।
6-अक्ष वर्गीकरण
यह टॉपिक में दिखता है
अभ्यास प्रश्न MCQ
हल करेंनीचे विकल्प चुनें। सही या गलत संकेत तुरंत दिखेगा।
लेख के अनुसार भारत को अपनी चौथी एस-400 ट्रायम्फ स्क्वाड्रन किस वर्ष मिलने वाली है?
शेष S-400 प्रणालियों की संशोधित डिलीवरी समय-सीमा के अनुसार भारत की चौथी S-400 ट्रायम्फ स्क्वाड्रन 2026 में मिलने की उम्मीद थी। बाद की रिपोर्टों में भी चौथी स्क्वाड्रन के 2026 में आने की सूचना दी गई, इसलिए सही वर्ष 2026 है।
स्रोत: India GS
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
S-400 ट्रायम्फ वायु रक्षा प्रणाली क्या है और इसे दुनिया की सबसे उन्नत प्रणाली क्यों माना जाता है?
S-400 ट्रायम्फ रूस की लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल रक्षा प्रणाली है, जिसे अल्माज-आंटे ने विकसित किया है। उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (NATO) में इसे SA-21 Growler नाम से जाना जाता है। इसे दुनिया की सबसे उन्नत वायु रक्षा प्रणाली माना जाता है, क्योंकि यह एक साथ 300 लक्ष्यों पर नज़र रख सकती है, उनमें से 36 को एक साथ निशाना बना सकती है और 400 किमी तक की दूरी तथा 30 किमी तक की ऊँचाई पर विमान, क्रूज मिसाइल और बैलिस्टिक मिसाइल नष्ट कर सकती है।
भारत ने कितने S-400 स्क्वाड्रन का अनुबंध किया है और उनकी आपूर्ति की मौजूदा स्थिति क्या है?
भारत ने अक्टूबर 2018 में रूस के साथ पाँच S-400 स्क्वाड्रन के लिए लगभग ₹40,000 करोड़ (5 अरब डॉलर) का अनुबंध किया। तीन स्क्वाड्रन की आपूर्ति हो चुकी है—दो उत्तरी सीमा (चीन) और एक पश्चिमी सीमा (पाकिस्तान) पर तैनात हैं। चौथे स्क्वाड्रन की आपूर्ति 2026 में तय है और पाँचवाँ उसके बाद मिलने की उम्मीद है।
प्रतिबंधों के ज़रिए अमेरिका के विरोधियों का मुकाबला अधिनियम (CAATSA) क्या है और इसने भारत की S-400 खरीद को कैसे प्रभावित किया?
प्रतिबंधों के ज़रिए अमेरिका के विरोधियों का मुकाबला अधिनियम (CAATSA) एक अमेरिकी कानून है। यह रूस के साथ महत्वपूर्ण रक्षा सौदे करने वाले देशों पर प्रतिबंध लगाता है। S-400 खरीद के कारण भारत CAATSA के तहत जाँच के दायरे में आया। हालाँकि, अमेरिका ने भारत की रणनीतिक अहमियत और रूस के साथ पहले से हुए अनुबंध के तहत उसकी जिम्मेदारियों को देखते हुए उसे छूट दे दी। इससे मामला कूटनीतिक रूप से सुलझ गया।
भारतीय वायु सेना (IAF) के कर्मियों को S-400 प्रशिक्षण के लिए रूस क्यों भेजा जा रहा है?
भारतीय वायु सेना (IAF) के कर्मियों को S-400 प्रणाली चलाने, उसका रखरखाव करने और खराबियाँ दूर करने का विशेष प्रशिक्षण लेने के लिए रूस में अल्माज-आंटे के केंद्रों में भेजा जाता है। हर स्क्वाड्रन के लिए ऐसे प्रशिक्षित तकनीकी दल की ज़रूरत होती है, जो रडार चला सके, प्रक्षेपक संभाल सके, प्रणाली को कमान और नियंत्रण व्यवस्था से जोड़ सके तथा युद्धक्षेत्र में हुई क्षति का आकलन कर सके। यह प्रशिक्षण 2026 में भारत के चौथे S-400 स्क्वाड्रन की आपूर्ति से पहले होता है।
भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए S-400 की तैनाती का क्या सामरिक महत्व है?
S-400 की तैनाती पाकिस्तान और चीन, दोनों से जुड़े खतरों के मुकाबले भारत की बहुस्तरीय वायु रक्षा व्यवस्था को बहुत मज़बूत करती है। इसकी 400 किमी की मारक क्षमता सीमा पार के हवाई सैन्य लक्ष्यों को भी अपने दायरे में लेती है। बैलिस्टिक मिसाइलों को रोकने की क्षमता मिसाइल हमलों के विरुद्ध भारत की निवारक शक्ति बढ़ाती है। यह आकाश और मध्यम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली (MRSAM) जैसी प्रणालियों वाले भारत के मौजूदा वायु रक्षा नेटवर्क से भी जुड़ी है।
क्या यह उपयोगी था?
सुधार या छूटा परीक्षा दृष्टिकोण संपादकीय टीम को भेजें।
प्रतिक्रिया भेजें