होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने से ऊर्जा आपूर्ति में पैदा हुए व्यवधान के बीच पेट्रोलियम मंत्रालय ने प्राकृतिक गैस के आवंटन में घरेलू उपयोग और परिवहन को प्राथमिकता देने का निर्देश दिया। इसी दौरान वैकल्पिक स्रोतों से खरीद तेज हुई और मार्च 2026 के पहले 11 दिनों में भारत का रूसी तेल आयात 15 लाख बैरल प्रतिदिन तक पहुंच गया। यह अपडेट केवल तेल-गैस व्यापार की खबर नहीं है, बल्कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा, आयात निर्भरता और संकट के समय सरकारी प्राथमिकता-निर्धारण से जुड़ा मामला है।

स्टैटिक जीके की दृष्टि से होर्मुज जलडमरूमध्य बहुत महत्वपूर्ण है। यह ओमान और ईरान के बीच स्थित है और फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी तथा अरब सागर से जोड़ता है। ऊर्जा भूगोल में इसे प्रमुख तेल पारगमन बिंदुओं में गिना जाता है, क्योंकि 2024 और 2025 की पहली तिमाही में इससे होकर जाने वाला प्रवाह वैश्विक समुद्री तेल व्यापार के एक-चौथाई से अधिक के बराबर था। 2024 में वैश्विक तरलीकृत प्राकृतिक गैस व्यापार का करीब एक-पांचवां हिस्सा भी इसी मार्ग से गुजरा। इसलिए यहां व्यवधान आने पर भारत जैसे ऊर्जा-आयातक देश को घरेलू गैस, परिवहन ईंधन और वैकल्पिक कच्चे तेल स्रोतों पर तुरंत ध्यान देना पड़ता है।

परीक्षा के दृष्टिकोण से यह विषय भारतीय अर्थव्यवस्था, अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम और आर्थिक सुरक्षा को जोड़ता है। प्रारंभिक परीक्षा में जलडमरूमध्य की स्थिति, प्रभावित प्राथमिकता वाले क्षेत्र, तारीख और 15 लाख बैरल प्रतिदिन का आंकड़ा पूछा जा सकता है। मुख्य परीक्षा में यह उदाहरण दिखाता है कि बाहरी भू-राजनीतिक झटकों के बीच सरकार कैसे आवश्यक उपभोक्ता क्षेत्रों को प्राथमिकता देती है और ऊर्जा आयात के स्रोतों में विविधता लाने की कोशिश करती है।