भारत ने 16-20 फरवरी 2026 को नई दिल्ली के भारत मंडपम में इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026 की मेजबानी की। यह ग्लोबल साउथ में AI पर इस पैमाने का पहला वैश्विक आयोजन था। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय से जुड़े इस आयोजन ने भारत को जिम्मेदार, समावेशी और विकास-केंद्रित AI चर्चा के प्रमुख संयोजक के रूप में सामने रखा।
समिट की संरचना तीन सूत्रों - जन, पृथ्वी और प्रगति - पर आधारित थी। परीक्षा की दृष्टि से इसका मतलब है कि AI को केवल तकनीकी नवाचार के रूप में नहीं, बल्कि मानव विकास, पर्यावरणीय टिकाऊपन और समान आर्थिक प्रगति से जुड़े शासन-विषय के रूप में पढ़ना चाहिए। सात चक्रों में मानव पूंजी, सामाजिक सशक्तिकरण के लिए समावेशन, सुरक्षित और भरोसेमंद AI, लचीलापन, नवाचार और कार्यकुशलता, विज्ञान, AI संसाधनों का लोकतंत्रीकरण और आर्थिक विकास व सामाजिक भलाई के लिए AI शामिल थे।
समिट में 100 से अधिक सरकारी प्रतिनिधि, 20 से अधिक राष्ट्राध्यक्ष या शासनाध्यक्ष, 60 मंत्री और उपमंत्री तथा 500 से अधिक वैश्विक AI विशेषज्ञ शामिल हुए। तीन ग्लोबल इम्पैक्ट चैलेंज - AI फॉर ऑल, AI बाय हर और युवाई - को 60 से अधिक देशों से 4,650 से अधिक आवेदन मिले और 70 टीमें फाइनलिस्ट चुनी गईं। रिसर्च सिम्पोजियम को अफ्रीका, एशिया और लैटिन अमेरिका से लगभग 250 शोध-प्रस्ताव मिले।
RAS और UPSC में इसे ग्लोबल साउथ में जिम्मेदार, समावेशी और विकास-केंद्रित AI सहयोग के उदाहरण के रूप में जोड़ा जा सकता है। प्रारंभिक परीक्षा में स्थान, तिथि, विषय और पहल पूछी जा सकती हैं, जबकि मुख्य परीक्षा में डिजिटल सार्वजनिक हित, ग्लोबल साउथ की भूमिका, सुरक्षित और भरोसेमंद AI शासन तथा समावेशी तकनीक पर विश्लेषण उपयोगी रहेगा।
