प्रकाशित: 10 दिसंबर 2025Down to Earthपर्यावरण
वन्य जीव-जंतुओं और वनस्पतियों की लुप्तप्राय प्रजातियों के अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर कन्वेंशन (CITES) के 50 वर्ष — पक्षकारों का 20वां सम्मेलन (CoP20) समरकंद, उज़्बेकिस्तान में आयोजित हुआ
वन्य जीव-जंतुओं और वनस्पतियों की लुप्तप्राय प्रजातियों के अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर कन्वेंशन (CITES) ने 2025 में अपनी 50वीं वर्षगांठ मनाई। यह इतिहास के सबसे पुराने बहुपक्षीय पर्यावरण समझौतों में से एक है। इसकी स्थापना 1973 में वाशिंगटन डी.सी. में हुई और यह 1 जुलाई 1975 को लागू हुआ। अब इसके 183 पक्षकार हैं और यह पौधों तथा जीव-जंतुओं की 38,000 से अधिक प्रजातियों के व्यापार को नियंत्रित करता है।
पक्षकारों का 20वां सम्मेलन (CoP20) 24 नवंबर से 5 दिसंबर 2025 तक समरकंद, उज़्बेकिस्तान में आयोजित हुआ। मध्य एशिया में CITES का यह पहला पक्षकार सम्मेलन था। इस क्षेत्र से वन्यजीव व्यापार के कई महत्वपूर्ण मार्ग गुजरते हैं। भारत 1976 में CITES का हस्ताक्षरकर्ता बना, यानी कन्वेंशन लागू होने के ठीक एक साल बाद। इससे जैव विविधता संरक्षण के प्रति भारत की शुरुआती प्रतिबद्धता दिखती है।
CITES के तहत भारत से जुड़ी वन्यजीव प्रजातियों की सूची व्यापक है। बंगाल बाघ (Panthera tigris tigris), एशियाई हाथी (Elephas maximus) और हिम तेंदुआ (Panthera uncia) परिशिष्ट I में सूचीबद्ध हैं; इनके व्यावसायिक व्यापार पर प्रतिबंध है। राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण के अनुसार, CITES के संरक्षण उपायों से भारत में बाघों की संख्या लगभग 1,411 (2006) से बढ़कर 3,682 (2022) हो गई।
CoP20 में विवाद होने की संभावना जताई गई थी। इसमें मुख्य मतभेद टिकाऊ उपयोग और व्यापार पर पूर्ण प्रतिबंध के बीच था। कुछ देशों का तर्क था कि नियंत्रित व्यापार से संरक्षण के लिए धन जुटाया जा सकता है, जबकि दूसरे देश पूर्ण प्रतिबंध चाहते थे। दक्षिणी अफ्रीका के देश स्थानीय आर्थिक ज़रूरतों का हवाला देकर हाथीदांत और गैंडे के सींग का व्यापार फिर खोलना चाहते रहे हैं। भारत और अधिकांश एशियाई देश इसका विरोध करते हैं, क्योंकि जिन देशों में व्यापार की अनुमति होगी, उसके बाहर भी अवैध शिकार बढ़ने का खतरा है।
राजस्थान में RPSC की तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों के लिए CITES का संबंध प्रोजेक्ट टाइगर के रणथम्भौर, सरिस्का और मुकुंदरा हिल्स रिजर्व, एशियाई शेर संरक्षण तथा ग्रेट इंडियन बस्टर्ड से है। थार मरुस्थल में बिजली लाइनों से होने वाली मौतों के कारण भारत ने ग्रेट इंडियन बस्टर्ड के लिए CITES के तहत अधिक संरक्षण मांगा है।
0मेन्स दृष्टिकोण
प्रश्न: भारत के जैव विविधता संरक्षण, विशेष रूप से राजस्थान के प्रोजेक्ट टाइगर रिजर्व के संदर्भ में CITES की 50वीं वर्षगांठ और समरकंद में CoP20 के महत्व की विवेचना कीजिए।
उत्तर (50 शब्द):
CITES की स्थापना 1973 में हुई और यह 1 जुलाई 1975 से लागू है। इसके 183 पक्षकार 38,000 से अधिक प्रजातियों के व्यापार को नियंत्रित करते हैं। CoP20 समरकंद, उज़्बेकिस्तान में आयोजित हुआ। भारत 1976 से हस्ताक्षरकर्ता है; बंगाल बाघों की संख्या 1,411 (2006) से बढ़कर 3,682 (2022) हुई और वे परिशिष्ट I में संरक्षित हैं।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
CITES की स्थापना कब हुई और यह कब लागू हुआ?
CITES की स्थापना 1973 में वाशिंगटन डी.सी. में हुई और यह 1 जुलाई 1975 को लागू हुआ। अब इसके 183 पक्षकार हैं, जो 38,000 से अधिक प्रजातियों के व्यापार को नियंत्रित करते हैं।
भारत CITES में कब शामिल हुआ?
भारत 1976 में CITES का हस्ताक्षरकर्ता बना, यानी कन्वेंशन लागू होने के एक साल बाद। इससे वन्यजीव व्यापार को नियंत्रित करने के प्रति भारत की शुरुआती प्रतिबद्धता दिखती है।
CITES परिशिष्ट I में कौन-सी भारतीय प्रजातियाँ सूचीबद्ध हैं?
परिशिष्ट I में सूचीबद्ध प्रमुख भारतीय प्रजातियों में बंगाल बाघ, एशियाई हाथी, हिम तेंदुआ, बड़ा एक सींग वाला गैंडा और ग्रेट इंडियन बस्टर्ड शामिल हैं। इनके व्यावसायिक व्यापार पर प्रतिबंध है।
CoP20 कहाँ आयोजित हुआ और यह क्यों महत्वपूर्ण था?
CoP20 समरकंद, उज़्बेकिस्तान में 24 नवंबर से 5 दिसंबर 2025 तक आयोजित हुआ। यह मध्य एशिया में पहला CITES पक्षकार सम्मेलन था। इस क्षेत्र से वन्यजीव व्यापार के कई महत्वपूर्ण मार्ग गुजरते हैं।
CoP20 में मुख्य बहस क्या थी?
मुख्य मतभेद उन देशों के बीच था जो टिकाऊ उपयोग का समर्थन करते थे और उन देशों के बीच जो सख्त प्रतिबंध चाहते थे। यह मतभेद खासकर हाथीदांत, गैंडे के सींग और लकड़ी के व्यापार को लेकर था।