अक्टूबर 2025 तक भारत की कुल स्थापित विद्युत उत्पादन क्षमता 505 GW तक पहुँच गई, जिसमें 245 GW तापीय स्रोतों से और 260 GW गैर-जीवाश्म स्रोतों से है। गैर-जीवाश्म क्षमता में 200 GW नवीकरणीय ऊर्जा (130 GW सौर, 53 GW पवन, शेष लघु जल विद्युत एवं बायोपावर), 50.348 GW बड़ी जल विद्युत और 8.8 GW परमाणु ऊर्जा शामिल है। यह भारत के ऊर्जा संक्रमण में एक महत्त्वपूर्ण पड़ाव है। भारत ने पेरिस समझौते के तहत अपने NDC में 2030 तक 500 GW गैर-जीवाश्म विद्युत क्षमता प्राप्त करने का लक्ष्य रखा है। बुनियादी ढांचे में निवेश करने वाली लंदन की कंपनी एक्टिस ने भारत को 'विश्व के सबसे आकर्षक बुनियादी ढांचा बाजारों में से एक' बताते हुए ऊर्जा, सड़क एवं डिजिटल बुनियादी ढांचे में अपने ₹17,500 करोड़ के निवेश को दोगुना करने की योजना घोषित की।
भारत की कुल स्थापित विद्युत क्षमता 505 GW — आधी से अधिक गैर-जीवाश्म स्रोतों से
अक्टूबर 2025 तक भारत की कुल स्थापित विद्युत उत्पादन क्षमता 505 GW तक पहुँच गई। इसमें 245 GW तापीय स्रोतों से और 260 GW गैर-जीवाश्म स्रोतों से है। गैर-जीवाश्म क्षमता में 200 GW नवीकरणीय ऊर्जा (130 GW सौर, 53 GW पवन, शेष लघु जल विद्युत एवं बायोपावर), 50.348 GW बड़ी जल विद्युत और 8.8 GW परमाणु ऊर्जा शामिल है। यह भारत के ऊर्जा संक्रमण में एक महत्त्वपूर्ण पड़ाव है। भारत ने पेरिस समझौते के तहत अपने NDC में 2030 तक 500 GW गैर-जीवाश्म विद्युत क्षमता प्राप्त करने का लक्ष्य रखा है। लंदन स्थित बुनियादी ढांचा निवेशक कंपनी एक्टिस ने भारत को 'विश्व के सबसे आकर्षक बुनियादी ढांचा बाजारों में से एक' बताते हुए ऊर्जा, सड़क एवं डिजिटल बुनियादी ढांचे में अपने ₹17,500 करोड़ के निवेश को दोगुना करने की योजना घोषित की।
मुख्य तथ्य
- अक्टूबर 2025 तक भारत की कुल स्थापित विद्युत क्षमता 505 GW हो गई।
- गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों की क्षमता अब 260 GW है — यानी कुल क्षमता का 50% से अधिक।
- नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता 200 GW है जिसमें 130 GW सौर और 53 GW पवन शामिल हैं।
- भारत का लक्ष्य पेरिस समझौते NDC के तहत 2030 तक 500 GW गैर-जीवाश्म क्षमता प्राप्त करना है।
- ऊर्जा मिश्रण में बड़ी जल विद्युत का हिस्सा 50.348 GW और परमाणु ऊर्जा का हिस्सा 8.8 GW है।
- लंदन की Actis ने भारत की अवसंरचना में अपने ₹17,500 करोड़ निवेश को दोगुना करने की योजना बनाई।
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नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के अपडेट के अनुसार 30 नवंबर 2025 तक भारत की कुल स्थापित विद्युत क्षमता कितनी थी?
नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के अनुसार 30 नवंबर 2025 तक भारत की कुल स्थापित विद्युत क्षमता 509.64 गीगावाट थी। इसमें तापीय क्षमता 246.90 गीगावाट, बड़े जलविद्युत सहित नवीकरणीय ऊर्जा 253.96 गीगावाट और परमाणु क्षमता 8.78 गीगावाट थी। गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों की कुल क्षमता 262.74 गीगावाट थी, जो कुल स्थापित क्षमता का 51.55% थी।
स्रोत: समाचार स्रोत
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
अक्टूबर 2025 तक भारत के विद्युत क्षेत्र ने कौन सा मील का पत्थर हासिल किया?
अक्टूबर 2025 तक भारत की कुल स्थापित विद्युत उत्पादन क्षमता 505 GW के महत्वपूर्ण पड़ाव पर पहुँच गई। इसमें से 260 GW — 50% से अधिक — गैर-जीवाश्म स्रोतों से है: 200 GW नवीकरणीय ऊर्जा (130 GW सौर, 53 GW पवन), 50.348 GW बड़ी जल विद्युत और 8.8 GW परमाणु ऊर्जा। इसका मतलब भारत ने 2030 के लिए निर्धारित 500 GW गैर-जीवाश्म क्षमता के NDC लक्ष्य को पहले ही पार कर लिया है।
भारत की 260 GW गैर-जीवाश्म विद्युत क्षमता की संरचना क्या है?
अक्टूबर 2025 तक भारत की 260 GW गैर-जीवाश्म विद्युत क्षमता की संरचना इस प्रकार है: 200 GW नवीकरणीय ऊर्जा — जिसमें 130 GW सौर ऊर्जा, 53 GW पवन ऊर्जा और शेष लघु जल विद्युत व बायो-पावर शामिल हैं — पंप्ड स्टोरेज परियोजनाओं सहित 50.348 GW बड़ी जल विद्युत और 8.8 GW परमाणु ऊर्जा संयंत्र।
पेरिस समझौते के अपने NDC के तहत भारत का विद्युत क्षमता लक्ष्य क्या है?
पेरिस समझौते के तहत अपने राष्ट्रीय निर्धारित योगदान (NDCs) में भारत ने 2030 तक 500 GW गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित विद्युत क्षमता प्राप्त करने की प्रतिबद्धता जताई है। अक्टूबर 2025 तक भारत 260 GW गैर-जीवाश्म क्षमता के साथ इस लक्ष्य को लगभग पाँच साल पहले ही पार कर चुका है।
भारत की स्थापित विद्युत क्षमता का कितना हिस्सा अभी भी तापीय (जीवाश्म ईंधन) स्रोतों पर आधारित है?
अक्टूबर 2025 तक तापीय (जीवाश्म ईंधन) स्रोत, मुख्यतः कोयला आधारित बिजली संयंत्र, भारत की कुल 505 GW विद्युत क्षमता में 245 GW का योगदान देते हैं। यह कुल क्षमता का लगभग 48.5% है। इससे स्पष्ट है कि गैर-जीवाश्म स्रोत 50% से अधिक हो गए हैं, फिर भी बेस-लोड बिजली उत्पादन के लिए तापीय ऊर्जा अभी भी महत्वपूर्ण है।
भारत द्वारा 50% गैर-जीवाश्म विद्युत क्षमता हासिल करने का क्या महत्व है?
50% गैर-जीवाश्म विद्युत क्षमता का लक्ष्य पार करना भारत के ऊर्जा परिवर्तन में एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। यह स्वच्छ ऊर्जा के प्रति भारत की प्रतिबद्धता दिखाता है, बिजली क्षेत्र से कार्बन उत्सर्जन घटाता है, आयातित जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करके ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करता है और प्रमुख वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं के बीच भारत को नवीकरणीय ऊर्जा के अग्रणी देश के रूप में स्थापित करता है।
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