प्रकाशित: 2 सितंबर 2025समाचार स्रोतअंतरराष्ट्रीय
तियानजिन में SCO शिखर सम्मेलन में मोदी ने शी और कै क्यी से मुलाकात की; भारत-चीन संबंधों में नई शुरुआत
चीन के तियानजिन में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अगस्त-सितंबर 2025 में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और वरिष्ठ CCP नेता कै क्यी से मुलाकात की — यह सात वर्षों में मोदी की पहली चीन यात्रा थी। कै क्यी CCP पोलित ब्यूरो स्थायी समिति के पांचवें सबसे वरिष्ठ सदस्य और शी जिनपिंग के करीबी सहयोगी हैं।
इन बैठकों ने 2020 के गलवान घाटी संघर्ष के बाद तनावपूर्ण रहे भारत-चीन संबंधों में वास्तविक सुधार का संकेत दिया। दोनों पक्षों ने व्यापार, प्रौद्योगिकी और लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने पर सहमति जताई तथा विश्व व्यापार को स्थिर रखने में अपनी अर्थव्यवस्थाओं की भूमिका को स्वीकार किया। भारतीय और चीनी कंपनियों ने संयुक्त उद्यमों पर बातचीत तेज की। विश्लेषकों ने इस कूटनीतिक सुधार को राष्ट्रपति ट्रम्प के दौर में अमेरिकी शुल्कों के दबाव पर साझा चिंता से भी जोड़ा।
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जुड़ा प्रश्नआसान
2025 में प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपति शी जिनपिंग से किस चीनी शहर में आयोजित SCO शिखर सम्मेलन में मुलाकात की?
व्याख्या · सही उत्तर ASCO शिखर सम्मेलन चीन के तियानजिन में आयोजित हुआ था, जहाँ प्रधानमंत्री मोदी ने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात की — यह सात वर्षों में मोदी की पहली चीन यात्रा थी।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
तियानजिन में SCO शिखर सम्मेलन के लिए PM मोदी की चीन यात्रा का क्या महत्व था?
PM मोदी की तियानजिन यात्रा सात वर्षों में उनकी पहली चीन यात्रा थी। 2020 के गलवान घाटी संघर्ष और LAC तनाव के बाद यह यात्रा भारत-चीन संबंधों में कूटनीतिक सुधार का संकेत थी और द्विपक्षीय रिश्तों में बड़े बदलाव को दर्शाती थी।
SCO शिखर सम्मेलन में PM मोदी की किससे बैठक हुई और क्या निष्कर्ष निकला?
PM मोदी ने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और CCP के कै क्यी के साथ द्विपक्षीय बैठकें कीं। बैठकों में द्विपक्षीय संबंधों को स्थिर करने, 2024 के LAC विसंपर्क समझौते पर आगे बढ़ने और अमेरिकी शुल्कों को लेकर साझा चिंताओं पर चर्चा हुई।
SCO (शंघाई सहयोग संगठन) क्या है और भारत के लिए यह क्यों प्रासंगिक है?
SCO 2001 में स्थापित एक यूरेशियाई बहुपक्षीय राजनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा गठबंधन है। भारत 2017 में इसका पूर्ण सदस्य बना। यह महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें भारत, चीन, रूस, पाकिस्तान और मध्य एशियाई देश एक ही प्लेटफ़ॉर्म पर आते हैं — भारतीय क्षेत्रीय कूटनीति के लिए यह अहम क्षेत्र है।
2024 के LAC समझौते ने भारत-चीन संबंधों में सुधार में क्या भूमिका निभाई?
2024 के LAC (वास्तविक नियंत्रण रेखा) समझौते से पूर्वी लद्दाख में 2020 से चला आ रहा सैन्य गतिरोध सुलझा। इससे कूटनीतिक सामान्यीकरण का रास्ता खुला और तियानजिन में शिखर बैठक संभव हो सकी।
भारत-चीन कूटनीतिक सुधार में अमेरिकी शुल्कों की क्या भूमिका है?
भारत और चीन दोनों को अपने निर्यात पर ऊँचे अमेरिकी शुल्कों से आर्थिक दबाव झेलना पड़ रहा है। यह एक जैसी आर्थिक चिंता दोनों देशों को द्विपक्षीय संबंध स्थिर करने और अमेरिकी व्यापार नीतियों के जवाब में आर्थिक सहयोग तलाशने के लिए प्रेरित करती है।