दिसंबर 2025 के मध्य में राजस्थान राज्य स्वास्थ्य विभाग ने राज्य के दूरदराज और आदिवासी गाँवों में तपेदिक (टीबी) निदान को मजबूत करने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) से लैस 29 उन्नत पोर्टेबल एक्स-रे मशीनें तैनात करने की पहल शुरू की। ये पोर्टेबल एक्स-रे मशीनें केंद्रीकृत प्रयोगशाला ढाँचे के बिना ही संदिग्ध टीबी रोगियों की त्वरित जाँच कर सकती हैं। यह राजस्थान के लिए महत्वपूर्ण है, जहाँ 2024 में 1.7 लाख से अधिक और 2025 की पहली छमाही में ही 89,132 टीबी मामले दर्ज हुए। यह पहल भारत के राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम (NTEP) और 2025 तक टीबी उन्मूलन के भारत के आधिकारिक लक्ष्य के अनुरूप है, जो WHO के 2030 के वैश्विक लक्ष्य से पहले है। AI सॉफ्टवेयर छाती के एक्स-रे का विश्लेषण कर उच्च जोखिम वाले रोगियों को पुष्टिकरण परीक्षणों के लिए चिह्नित करता है। ASHA और ANM जैसी अग्रिम पंक्ति की स्वास्थ्य कार्यकर्ता सामुदायिक स्तर पर सामूहिक स्क्रीनिंग कर सकती हैं। यह पहल मरुस्थलीय, अर्ध-शुष्क और आदिवासी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवा तक पहुँच की कमी दूर करने में डिजिटल स्वास्थ्य तकनीक के उपयोग को दर्शाती है।
राजस्थान स्वास्थ्य विभाग ने दूरदराज के गाँवों में टीबी निदान मजबूत करने के लिए 29 AI-सक्षम पोर्टेबल एक्स-रे इकाइयाँ तैनात कीं
दिसंबर 2025 के मध्य में राजस्थान राज्य स्वास्थ्य विभाग ने राज्य के दूरदराज और आदिवासी गाँवों में तपेदिक (टीबी) निदान को मजबूत करने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) से लैस 29 उन्नत पोर्टेबल एक्स-रे मशीनें तैनात करने की पहल शुरू की। ये पोर्टेबल AI आधारित एक्स-रे मशीनें केंद्रीकृत प्रयोगशाला ढाँचे के बिना ही संदिग्ध टीबी रोगियों की त्वरित जाँच कर सकती हैं। यह राजस्थान के लिए महत्वपूर्ण है, जहाँ 2024 में 1.7 लाख से अधिक और 2025 की पहली छमाही में ही 89,132 टीबी मामले दर्ज हुए। यह पहल भारत के राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम (NTEP) और भारत के 2025 तक टीबी उन्मूलन के आधिकारिक लक्ष्य के अनुरूप है, जो WHO के 2030 के वैश्विक लक्ष्य से पहले है। AI सॉफ्टवेयर छाती के एक्स-रे का विश्लेषण कर उच्च जोखिम वाले रोगियों को पुष्टि वाले परीक्षणों के लिए चिह्नित करता है। ASHA और ANM जैसी अग्रिम पंक्ति की स्वास्थ्यकर्मी सामुदायिक स्तर पर सामूहिक जाँच कर सकती हैं। यह पहल मरुस्थल, अर्ध-शुष्क और आदिवासी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच की कमी दूर करने के लिए डिजिटल स्वास्थ्य तकनीक के उपयोग को दर्शाती है।
मुख्य तथ्य
- राजस्थान ने दिसंबर 2025 में दूरदराज के गाँवों में टीबी निदान के लिए 29 AI-सक्षम पोर्टेबल एक्स-रे इकाइयाँ तैनात कीं।
- AI सॉफ्टवेयर छाती के एक्स-रे का विश्लेषण कर उच्च जोखिम वाले रोगियों को पुष्टिकारक CBNAAT परीक्षणों के लिए चिह्नित करता है।
- राजस्थान में 2024 में 1.7 लाख से अधिक और 2025 की पहली छमाही में 89,132 टीबी मामले दर्ज हुए।
- यह पहल 2027 तक टीबी उन्मूलन के लक्ष्य वाले राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम (NTEP) के अनुरूप है।
- ASHA और ANM जैसी अग्रिम पंक्ति की स्वास्थ्य कार्यकर्ता इन मशीनों से सामुदायिक स्तर पर सामूहिक स्क्रीनिंग कर सकती हैं।
- इनकी तैनाती मरुस्थलीय, अर्ध-शुष्क और आदिवासी क्षेत्रों में रेडियोलॉजी अवसंरचना की कमी को देखते हुए महत्वपूर्ण है।
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राजस्थान स्वास्थ्य विभाग द्वारा टीबी निदान के लिए 29 AI-सक्षम पोर्टेबल एक्स-रे इकाइयों की तैनाती के बारे में कौन-सा कथन सही है?
राजस्थान ने ग्रामीण, दूरस्थ और उच्च-जोखिम वाले क्षेत्रों में टीबी की शुरुआती पहचान बेहतर करने के लिए 29 AI-सक्षम पोर्टेबल एक्स-रे मशीनें तैनात कीं। इनका उपयोग ईंट-भट्टों, जेलों, खनन क्षेत्रों और झुग्गी बस्तियों जैसे स्थानों में स्क्रीनिंग के लिए किया जाना है। डिजिटल चेस्ट एक्स-रे, कंप्यूटर-सहायता प्राप्त पहचान और पुष्टिकरण जांच को जोड़कर यह व्यवस्था उन क्षेत्रों में निदान की देरी कम करती है जहाँ रेडियोलॉजी सुविधाएँ सीमित हैं।
स्रोत: समाचार स्रोत
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
राजस्थान ने टीबी निदान के लिए खास तौर पर AI-सक्षम पोर्टेबल एक्स-रे इकाइयाँ क्यों लगाईं?
राजस्थान में भारत के टीबी के सबसे अधिक मामले हैं — 2024 में 1.7 लाख और 2025 की पहली छमाही में ही 89,132 मामले। दूरदराज के मरुस्थलीय, अर्ध-शुष्क और आदिवासी क्षेत्रों में रेडियोलॉजी ढाँचे की कमी के कारण कई मामलों का पता नहीं चल पाता। AI-सक्षम पोर्टेबल एक्स-रे इकाइयाँ फ्रंटलाइन स्वास्थ्यकर्मियों को केंद्रीकृत प्रयोगशाला के बिना ही सामुदायिक स्तर पर स्क्रीनिंग करने में सक्षम बनाती हैं।
AI सॉफ्टवेयर छाती के एक्स-रे से टीबी निदान में कैसे मदद करता है?
AI सॉफ्टवेयर छाती के एक्स-रे चित्रों का लगभग तुरंत विश्लेषण करता है और टीबी संक्रमण का संकेत देने वाले पैटर्न (जैसे फेफड़ों में घुसपैठ, गुहिका या गांठ) को चिह्नित करता है। जिन मरीजों में जोखिम अधिक दिखता है, उन्हें फिर CBNAAT (कारतूस-आधारित न्यूक्लिक एसिड प्रवर्धन परीक्षण) के लिए भेजा जाता है, जो TB की आणविक पुष्टि करता है। यह छँटाई-आधारित तरीका प्रयोगशालाओं का बोझ कम करता है और मामलों की पहचान तेज करता है।
राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम (NTEP) क्या है और भारत का 2027 का लक्ष्य क्या है?
NTEP (राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम) टीबी उन्मूलन के लिए भारत का प्रमुख कार्यक्रम है, जो WHO की एंड टीबी रणनीति पर आधारित है। भारत ने 2027 तक टीबी उन्मूलन का लक्ष्य रखा है — वैश्विक 2030 के लक्ष्य से पाँच साल पहले। कार्यक्रम में सभी टीबी मरीजों के लिए निःशुल्क निदान, उपचार और निक्षय पोषण योजना के तहत पोषण सहायता शामिल है।
राजस्थान में AI एक्स-रे टीबी स्क्रीनिंग पहल में ASHA और ANM कार्यकर्ताओं की क्या भूमिका है?
ASHA (मान्यताप्राप्त सामाजिक स्वास्थ्य कार्यकर्ता) और ANM (सहायक नर्स दाई) ग्रामीण और आदिवासी भारत में अग्रिम पंक्ति की प्राथमिक स्वास्थ्य कार्यकर्ता हैं। राजस्थान की इस पहल में ये कार्यकर्ता सामुदायिक स्क्रीनिंग, स्वास्थ्य शिविरों और घर-घर जाकर पोर्टेबल AI-सक्षम एक्स-रे मशीनें चलाती हैं। इससे विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी वाले दूरदराज के क्षेत्रों में उच्च जोखिम वाली आबादी तक टीबी की शुरुआती पहचान सीधे पहुँच पाती है।
CBNAAT क्या है और यह टीबी नियंत्रण में AI-आधारित एक्स-रे स्क्रीनिंग की पूरक कैसे है?
CBNAAT (कारतूस-आधारित न्यूक्लिक एसिड प्रवर्धन परीक्षण) एक आणविक निदान परीक्षण है, जो 2 घंटे में टीबी बैक्टीरिया और दवा प्रतिरोध (रिफाम्पिसिन प्रतिरोध सहित) का पता लगाता है। राजस्थान के कार्यक्रम में AI एक्स-रे संदिग्ध मामलों की पहचान के लिए पहले चरण का स्क्रीनिंग उपकरण है, जबकि CBNAAT प्रयोगशाला में निर्णायक पुष्टि देता है। इस तरह निदान की दो-चरणीय प्रक्रिया बनती है, जो तेज भी है और सटीक भी।
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