11 जनवरी 2026 — रविवार — को जयपुर के महल रोड पर 78वीं सेना दिवस परेड की सार्वजनिक रिहर्सल हुई। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने वरिष्ठ सेना अधिकारियों और नागरिक प्रशासन के साथ उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की। 15 जनवरी की परेड इतिहास में पहली बार सेना छावनी के बाहर और दिल्ली के बाहर केवल चौथी बार आयोजित हुई। परेड मार्ग अक्षय पात्र सर्कल से बॉम्बे हॉस्पिटल तक था। भवानी निकेतन कॉलेज, सीकर रोड पर 'नो योर आर्मी' प्रदर्शनी (8-12 जनवरी) जारी रही। 15 जनवरी को एसएमएस स्टेडियम में 'शौर्य संध्या 2026' में 1,000 ड्रोन शो और ऑप सिंदूर का मंचन भी हुआ। राजस्थान की 1,070 किमी सीमा पाकिस्तान से लगती है, इसलिए यह आयोजन गहरा रणनीतिक और प्रतीकात्मक महत्व रखता है।
जयपुर में 78वीं सेना दिवस परेड की रिहर्सल: मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने तैयारियों की समीक्षा की, 15 जनवरी 2026 को छावनी के बाहर पहली ऐतिहासिक परेड
11 जनवरी 2026 — रविवार — को जयपुर के महल रोड पर 78वीं सेना दिवस परेड की सार्वजनिक रिहर्सल हुई। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने वरिष्ठ सेना अधिकारियों और नागरिक प्रशासन के साथ उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की। 15 जनवरी की परेड इतिहास में पहली बार सेना छावनी के बाहर और दिल्ली के बाहर केवल चौथी बार आयोजित हुई। परेड मार्ग अक्षय पात्र सर्कल से बॉम्बे हॉस्पिटल तक था। भवानी निकेतन कॉलेज, सीकर रोड पर 'नो योर आर्मी' प्रदर्शनी (8-12 जनवरी) जारी रही। 15 जनवरी को एसएमएस स्टेडियम में 'शौर्य संध्या 2026' में 1,000 ड्रोन शो और ऑप सिंदूर का मंचन भी हुआ। पाकिस्तान से 1,070 किमी सीमा लगने के कारण राजस्थान में यह आयोजन गहरा रणनीतिक और प्रतीकात्मक महत्व रखता है।
मुख्य तथ्य
- CM भजनलाल शर्मा ने 11 जनवरी को महल रोड, जयपुर पर 78वीं सेना दिवस रिहर्सल की समीक्षा की।
- रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और सेनाध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने 15 जनवरी की परेड में भाग लिया।
- SMS स्टेडियम में 'शौर्य संध्या 2026' में 1,000 ड्रोन शो और ऑपरेशन सिंदूर का मंचन हुआ।
- भवानी निकेतन कॉलेज में 'नो योर आर्मी' प्रदर्शनी में आधुनिक हथियार और ड्रोन दिखाए गए।
- राजस्थान की पाकिस्तान से 1,070 किमी लंबी सीमा लगती है, जो इस आयोजन का रणनीतिक महत्व दर्शाता है।
- कलारीपयट्टू और मल्लखम्ब मार्शल आर्ट प्रदर्शन सांस्कृतिक कार्यक्रम का हिस्सा थे।
मेन्स दृष्टिकोण
प्रश्न: 15 जनवरी 2026 को जयपुर में छावनी के बाहर 78वीं सेना दिवस परेड का आयोजन राजस्थान के लिए रणनीतिक एवं प्रतीकात्मक दृष्टि से क्यों महत्वपूर्ण माना जाता है?
उत्तर (50 शब्द):
जयपुर ने 15 जनवरी 2026 को महल रोड पर 78वीं सेना दिवस परेड आयोजित की — छावनी के बाहर पहली बार, दिल्ली के बाहर चौथी बार। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, सेना प्रमुख उपेंद्र द्विवेदी एवं मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा उपस्थित रहे। शौर्य संध्या में 1,000-ड्रोन शो के जरिए ऑपरेशन सिंदूर का प्रदर्शन किया गया। एक लाख दर्शक उपस्थित थे।
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15 जनवरी 2026 को 78वीं सेना दिवस परेड जयपुर की किस सड़क पर आयोजित की गई?
लेख के अनुसार 78वीं सेना दिवस परेड का मार्ग जयपुर के महल रोड पर अक्षय पात्र सर्कल से बॉम्बे हॉस्पिटल तक था। सेना छावनी के बाहर आयोजित यह पहला सेना दिवस समारोह था।
स्रोत: समाचार स्रोत
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
जयपुर में 78वीं सेना दिवस परेड ऐतिहासिक रूप से अनोखी क्यों थी?
15 जनवरी 2026 को जयपुर में आयोजित 78वीं सेना दिवस परेड दो कारणों से ऐतिहासिक थी: यह पहली बार था जब सेना दिवस भारत में किसी सेना छावनी के बाहर मनाया गया, और दिल्ली के बाहर केवल चौथी बार। परेड मार्ग अक्षय पात्र सर्कल से बॉम्बे हॉस्पिटल तक महल रोड पर था।
15 जनवरी 2026 को 78वीं सेना दिवस परेड में कौन-कौन शामिल हुए?
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और सेनाध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी 15 जनवरी 2026 की जयपुर परेड में शामिल हुए। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने 11 जनवरी को पहले एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की थी जिसमें सुरक्षा, लॉजिस्टिक्स और सार्वजनिक भागीदारी की व्यवस्था तय हुई।
'शौर्य संध्या 2026' क्या था और यह कहां आयोजित हुआ?
'शौर्य संध्या 2026' 15 जनवरी को SMS स्टेडियम, जयपुर में आयोजित एक विशेष सांध्यकालीन सांस्कृतिक कार्यक्रम था। इसमें 1,000 ड्रोन का प्रकाश प्रदर्शन और ऑपरेशन सिंदूर का जीवंत मंचन किया गया, जिसमें भारतीय सेना की क्षमताओं और विरासत को दिखाया गया।
राजस्थान में सेना दिवस परेड का रणनीतिक महत्व क्या है?
राजस्थान की पाकिस्तान से 1,070 किमी लंबी सीमा लगती है — यह भारत के किसी भी राज्य की सबसे लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमाओं में से एक है। जयपुर में सेना दिवस परेड का आयोजन राष्ट्रीय सुरक्षा में राजस्थान के रणनीतिक महत्व को रेखांकित करता है और सेना तथा सीमा राज्य के लोगों के बीच गहरे बंधन को दर्शाता है।
'नो योर आर्मी' प्रदर्शनी क्या थी और इस कार्यक्रम में कौन-सी मार्शल आर्ट प्रस्तुत हुईं?
'नो योर आर्मी' प्रदर्शनी 8 से 12 जनवरी तक भवानी निकेतन कॉलेज, सीकर रोड पर लगाई गई थी जिसमें आधुनिक हथियार, ड्रोन और सैन्य उपकरण जनता को दिखाए गए। सेना दिवस कार्यक्रम के सांस्कृतिक कार्यक्रम में कलारीपयट्टू (केरल की प्राचीन मार्शल आर्ट) और मल्लखम्ब (पारंपरिक भारतीय जिम्नास्टिक खेल) की प्रस्तुतियां हुईं।
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