प्रकाशित: 22 अक्टूबर 2025टॉपिक
भाई दूज और मणिपुर का निंगोल चकौबा पूरे भारत में मनाया गया
भाई दूज 2025, 23 अक्टूबर 2025 को मनाया गया। यह दिवाली के बाद आने वाला वह पर्व है जिसमें भाई-बहन के भावनात्मक रिश्ते को केंद्र में रखा जाता है। बहनें भाई के माथे पर तिलक लगाकर उसके लंबे जीवन और सुख-समृद्धि की कामना करती हैं, जबकि भाई उपहार देकर रिश्ते को सम्मान देते हैं। इसी तारीख पर मणिपुर में निंगोल चकौबा भी मनाया गया। यह पारंपरिक मैतेई त्योहार विवाहित महिलाओं और उनके मायके के बीच रिश्ते को मजबूत करने से जुड़ा है। इसमें विवाहित महिलाएं अपने मायके जाती हैं, परिवार के साथ भोजन करती हैं और रिश्तों को फिर से जीवंत करती हैं।
परीक्षा के लिहाज से यह खबर भारतीय समाज और संस्कृति के क्षेत्र में उपयोगी है। ये दोनों त्योहार दिखाते हैं कि भारत में पारिवारिक संबंधों को अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग रीति-रिवाजों से व्यक्त किया जाता है। भाई दूज भारत के कई क्षेत्रों में भाई-बहन के पर्व के रूप में पहचाना जाता है, जबकि निंगोल चकौबा मणिपुर की मैतेई सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा है। RAS और UPSC प्रारंभिक परीक्षा में ऐसे प्रश्न त्योहार-राज्य, समुदाय, परंपरा और सांस्कृतिक महत्व के रूप में पूछे जा सकते हैं। मुख्य परीक्षा में यह उदाहरण भारतीय समाज में परिवार, महिला की मायके से निरंतर जुड़ी भूमिका, क्षेत्रीय विविधता और सांस्कृतिक एकता को समझाने में काम आ सकता है। इसलिए तथ्य याद करते समय तारीख 23 अक्टूबर 2025, मणिपुर राज्य, मैतेई समुदाय और निंगोल चकौबा का मूल भाव यानी विवाहित महिलाओं का मायके से जुड़ाव भी साथ रखें।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भाई दूज 2025 कब मनाया गया?
भाई दूज 2025, 23 अक्टूबर 2025 को मनाया गया। यह भाई-बहन के रिश्ते से जुड़ा त्योहार है और दिवाली के बाद के उत्सवी दौर का हिस्सा माना जाता है।
निंगोल चकौबा किस राज्य और समुदाय से जुड़ा है?
निंगोल चकौबा मणिपुर से जुड़ा पारंपरिक मैतेई त्योहार है। यह विवाहित महिलाओं और उनके मायके के रिश्ते को मजबूत करने पर केंद्रित है।
निंगोल चकौबा में मुख्य परंपरा क्या है?
इस त्योहार में विवाहित महिलाएं अपने मायके जाती हैं, परिवार के साथ भोजन करती हैं और माता-पिता, भाई-बहन तथा मायके के रिश्तों को फिर से मजबूत करती हैं।
भाई दूज और निंगोल चकौबा में समानता क्या है?
दोनों त्योहार पारिवारिक रिश्तों को केंद्र में रखते हैं। भाई दूज भाई-बहन के रिश्ते पर केंद्रित है, जबकि निंगोल चकौबा विवाहित महिलाओं और उनके मायके के रिश्ते को महत्व देता है।
RAS और UPSC परीक्षा के लिए यह खबर क्यों महत्वपूर्ण है?
यह खबर भारतीय संस्कृति, त्योहारों, राज्य-समुदाय संबंध और सामाजिक संस्थाओं के उदाहरण के रूप में उपयोगी है। प्रारंभिक परीक्षा में त्योहार-राज्य-समुदाय मिलान और मुख्य परीक्षा में सांस्कृतिक विविधता का उदाहरण पूछा जा सकता है।