नीति आयोग के फ्रंटियर टेक हब ने एक रणनीतिक रोडमैप जारी किया है। इसमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता, रोबोटिक्स और डिजिटल ट्विन जैसी नई तकनीकों के सहारे 2035 तक भारत को दुनिया के शीर्ष 3 उन्नत विनिर्माण केंद्रों में शामिल करने का लक्ष्य रखा गया है। रोडमैप चेताता है कि इन तकनीकों को न अपनाने पर 2035 तक भारत को विनिर्माण से मिलने वाले अतिरिक्त सकल घरेलू उत्पाद में 270 अरब अमेरिकी डॉलर का संभावित नुकसान हो सकता है। ठोस कदम उठाने से कुशल लोगों के लिए 10 करोड़ से अधिक रोज़गार के अवसर बन सकते हैं और भारत शीर्ष 3 केंद्रों में जगह बना सकता है।

रोडमैप में व्यापक असर वाले 13 क्षेत्रों को चुना गया है और उन्हें 5 मुख्य समूहों में रखा गया है। इसमें उन्नत तकनीक से लैस 20 प्लग एंड प्ले औद्योगिक पार्क बनाने का प्रस्ताव है, जहाँ कौशल प्रशिक्षण की सुविधाएँ भी एक साथ उपलब्ध होंगी। अभी देश के सकल घरेलू उत्पाद में विनिर्माण की हिस्सेदारी लगभग 17% है, जबकि मेक इन इंडिया का लक्ष्य 25% है। विकसित राजस्थान के लक्ष्य के तहत, सीमेंट, वस्त्र और रत्न-आभूषण पर आधारित राजस्थान के विनिर्माण क्षेत्र को 2047 तक राज्य सकल मूल्य वर्धन (GSVA) में 20% हिस्सेदारी तक पहुँचाना है।