भारत के प्रमुख निर्यातकों ने 11 सितंबर 2025 को RBI के गवर्नर के साथ बैठक की। उन्होंने भारी अमेरिकी शुल्क का झटका कम करने के लिए ऋण भुगतान पर रोक, गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (NPA) नियमों में छूट और चुनिंदा नीतिगत मदद जैसे तत्काल राहत उपाय माँगे। अमेरिकी शुल्क व्यवस्था के कारण वियतनाम, दक्षिण कोरिया और बांग्लादेश जैसे प्रतिस्पर्धियों की तुलना में भारतीय वस्तुएँ 30 प्रतिशत महँगी पड़ती हैं। भारत सरकार का अनुमान है कि 48.2 अरब डॉलर का निर्यात बुरी तरह प्रभावित हो सकता है। निर्यातकों ने अमेरिकी शुल्क व्यवस्था से सबसे ज़्यादा प्रभावित क्षेत्रों में शामिल वस्त्र, इलेक्ट्रॉनिक्स और इंजीनियरिंग सामान के लिए अलग-अलग पैकेज माँगे। यह घटनाक्रम बताता है कि अनिश्चित वैश्विक आर्थिक माहौल में भारत का बाहरी व्यापार ऐसे झटकों को कितना झेल पाएगा, इसे लेकर चिंता बढ़ रही है।