प्रकाशित: 3 फ़रवरी 2026समाचार स्रोतअर्थव्यवस्था
केंद्रीय बजट 2026-27 में दुर्लभ मृदा गलियारों की घोषणा; REPM योजना नवंबर 2025 में स्वीकृत हुई
1 फरवरी 2026 को प्रस्तुत केंद्रीय बजट 2026-27 में भारत में सुरक्षित खनिज आपूर्ति श्रृंखला बनाने के लिए विशेष दुर्लभ मृदा गलियारों की घोषणा की गई। प्रस्तावित गलियारे ओडिशा, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और केरल में पूर्वी और दक्षिणी तटीय क्षेत्रों पर केंद्रित हैं। साथ ही, सरकार ने ₹7,280 करोड़ की REPM (दुर्लभ मृदा स्थायी चुंबक) योजना की घोषणा की, जिसका लक्ष्य 6,000 MTPA उत्पादन क्षमता है। यह योजना ₹6,450 करोड़ का बिक्री से जुड़ा प्रोत्साहन और ₹750 करोड़ की पूंजीगत सब्सिडी प्रदान करती है।
भारत के दुर्लभ मृदा क्षेत्र में राजस्थान महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है: अरावली पर्वतमाला और अलवर, सीकर, उदयपुर जिलों में मोनाजाइट, बास्टनेसाइट और अन्य दुर्लभ मृदा खनिजों के भंडार हैं। भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण और RSMML (राजस्थान राज्य खान एवं खनिज लिमिटेड) इन भंडारों की खोज में सक्रिय हैं। RSMML पहले से ही रॉक फॉस्फेट (झामरकोटड़ा खदानें, उदयपुर) का भारत का सबसे बड़ा उत्पादक है।
भारत वर्तमान में अपनी 95% से अधिक दुर्लभ मृदा आवश्यकताएं चीन से आयात करता है। इन नई पहलों का उद्देश्य घरेलू प्रसंस्करण क्षमता विकसित करना और रणनीतिक निर्भरता कम करना है।
0मेन्स दृष्टिकोण
प्रश्न: केंद्रीय बजट 2026-27 की दुर्लभ मृदा गलियारे व आरईपीएम योजना, राजस्थान के अरावली दुर्लभ-मृदा भंडारों के साथ मिलकर, किस प्रकार महत्वपूर्ण खनिजों पर भारत की रणनीतिक आयात निर्भरता घटा सकती हैं, मूल्यांकन कीजिए।
उत्तर (50 शब्द):
केंद्रीय बजट 2026-27 ने ओडिशा, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु व केरल में समर्पित दुर्लभ मृदा गलियारे तथा 7,280 करोड़ रुपये की आरईपीएम योजना (6,450 करोड़ प्रोत्साहन + 750 करोड़ पूंजी सब्सिडी) घोषित की, 6,000 एमटीपीए चुंबक लक्ष्य — राजस्थान के अरावली के अलवर, सीकर व उदयपुर में मोनाजाइट-बास्टनेसाइट भंडारों के लिए सीधे प्रासंगिक।
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बजट 2026-27 में घोषित दुर्लभ मृदा योजना के संदर्भ में आरईपीएम का पूरा नाम क्या है?
व्याख्या · सही उत्तर Cआरईपीएम का अर्थ रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट्स है, जो इलेक्ट्रिक वाहनों, पवन टर्बाइनों और इलेक्ट्रॉनिक्स में एक महत्वपूर्ण घटक है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
केंद्रीय बजट 2026-27 में घोषित REPM योजना क्या है और इसका आवंटन कितना है?
दुर्लभ मृदा स्थायी चुंबक (REPM) योजना केंद्रीय बजट 2026-27 में ₹7,280 करोड़ के आवंटन के साथ घोषित की गई। इसका उद्देश्य इलेक्ट्रिक वाहनों, पवन ऊर्जा और रक्षा क्षेत्र के लिए 6,000 MTPA चुंबक उत्पादन के लक्ष्य के साथ घरेलू दुर्लभ मृदा आपूर्ति श्रृंखला बनाना है।
समर्पित दुर्लभ मृदा गलियारे क्या हैं और ये रणनीतिक रूप से क्यों महत्वपूर्ण हैं?
समर्पित दुर्लभ मृदा गलियारे बजट 2026-27 में घोषित विशेष अवसंरचना मार्ग हैं, जो महत्वपूर्ण दुर्लभ मृदा खनिजों की आवाजाही और प्रसंस्करण को आसान बनाते हैं। ये इसलिए महत्वपूर्ण हैं क्योंकि दुर्लभ मृदा इलेक्ट्रिक वाहनों, पवन टर्बाइनों और रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए अनिवार्य है।
REPM योजना और दुर्लभ मृदा गलियारों में राजस्थान की क्या विशेष भूमिका है?
राजस्थान की अरावली पर्वत श्रृंखला में दुर्लभ मृदा खनिजों के महत्वपूर्ण भंडार हैं। इसलिए बजट 2026-27 में घोषित ₹7,280 करोड़ की REPM योजना और विशेष गलियारों से राज्य को सीधा लाभ मिलेगा। राजस्थान को खनन, प्रसंस्करण इकाइयों और रोजगार के अवसरों से लाभ होगा।
भारत में घरेलू दुर्लभ मृदा आपूर्ति श्रृंखला बनाना क्यों जरूरी है?
चीन वैश्विक दुर्लभ मृदा खनन और प्रसंस्करण पर हावी है, जिससे आयात पर निर्भर देशों के लिए जोखिम पैदा होता है। REPM योजना और समर्पित गलियारों के ज़रिए घरेलू आपूर्ति श्रृंखला बनाकर भारत इलेक्ट्रिक वाहनों, नवीकरणीय ऊर्जा और रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में आपूर्ति बाधाओं का जोखिम कम करता है।
REPM योजना का उत्पादन लक्ष्य क्या है और यह किन उद्योगों के लिए है?
REPM योजना का लक्ष्य 6,000 MTPA (मीट्रिक टन प्रति वर्ष) दुर्लभ मृदा स्थायी चुंबक उत्पादन है। इसका मुख्य उपयोग इलेक्ट्रिक वाहन, पवन टर्बाइन और रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योगों में होगा, जो दुर्लभ मृदा आधारित स्थायी चुंबकों पर निर्भर हैं।