1 फरवरी 2026 को प्रस्तुत केंद्रीय बजट 2026-27 में भारत में सुरक्षित खनिज आपूर्ति श्रृंखला बनाने के लिए विशेष दुर्लभ मृदा गलियारों की घोषणा की गई। प्रस्तावित गलियारे ओडिशा, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और केरल में पूर्वी और दक्षिणी तटीय क्षेत्रों पर केंद्रित हैं। साथ ही, सरकार ने ₹7,280 करोड़ की REPM (दुर्लभ मृदा स्थायी चुंबक) योजना की घोषणा की, जिसका लक्ष्य 6,000 MTPA उत्पादन क्षमता है। यह योजना ₹6,450 करोड़ का बिक्री से जुड़ा प्रोत्साहन और ₹750 करोड़ की पूंजीगत सब्सिडी प्रदान करती है।

भारत के दुर्लभ मृदा क्षेत्र में राजस्थान महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है: अरावली पर्वतमाला और अलवर, सीकर, उदयपुर जिलों में मोनाजाइट, बास्टनेसाइट और अन्य दुर्लभ मृदा खनिजों के भंडार हैं। भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण और RSMML (राजस्थान राज्य खान एवं खनिज लिमिटेड) इन भंडारों की खोज में सक्रिय हैं। RSMML पहले से ही रॉक फॉस्फेट (झामरकोटड़ा खदानें, उदयपुर) का भारत का सबसे बड़ा उत्पादक है।

भारत वर्तमान में अपनी 95% से अधिक दुर्लभ मृदा आवश्यकताएं चीन से आयात करता है। इन नई पहलों का उद्देश्य घरेलू प्रसंस्करण क्षमता विकसित करना और रणनीतिक निर्भरता कम करना है।