भारत के परमाणु ऊर्जा निगम लिमिटेड (NPCIL) ने जनवरी 2026 में राजस्थान परमाणु ऊर्जा परियोजना (RAPP) में महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ हासिल कीं। राजस्थान के रावतभाटा में स्थित 700 MW का स्वदेशी दबावयुक्त भारी जल रिएक्टर (PHWR) RAPP-7, नियामक अनुमति मिलने के बाद 29 दिसंबर 2025 से अपनी पूर्ण निर्धारित क्षमता के 90% पर सफलतापूर्वक चल रहा था। RAPP-7 ने सितंबर 2024 में पहली क्रिटिकैलिटी हासिल की और मार्च 2025 में उत्तरी क्षेत्रीय ग्रिड से जुड़ा। इसने 10 फरवरी 2026 को 700 MW की पूर्ण निर्धारित क्षमता हासिल की; भारत के सोलह नियोजित 700 MW स्वदेशी PHWR में यह उपलब्धि पाने वाला यह पहला रिएक्टर है। साथ ही, RAPP-8 ने 5 जनवरी 2026 को प्राथमिक ताप परिवहन (PHT) प्रणाली की हॉट कंडीशनिंग सफलतापूर्वक पूरी की। रावतभाटा (जिला चित्तौड़गढ़) का RAPP स्थल 8 इकाइयों (इकाई 1–8) के साथ एक ही स्थान पर भारत का सबसे बड़ा परमाणु ऊर्जा परिसर है।
NPCIL ने राजस्थान परमाणु ऊर्जा परियोजना में प्रमुख उपलब्धियाँ हासिल कीं: RAPP-7 पूर्ण शक्ति के 90% स्तर पर पहुँचा, RAPP-8 की PHT कंडीशनिंग पूरी
भारत के परमाणु ऊर्जा निगम लिमिटेड (NPCIL) ने जनवरी 2026 में राजस्थान परमाणु ऊर्जा परियोजना (RAPP) में महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ हासिल कीं। राजस्थान के रावतभाटा में स्थित 700 MW का स्वदेशी दबावयुक्त भारी जल रिएक्टर (PHWR) RAPP-7, नियामक अनुमति के बाद 29 दिसंबर 2025 से अपनी पूर्ण रेटेड शक्ति के 90% पर सफलतापूर्वक चल रहा था। RAPP-7 ने सितंबर 2024 में पहली क्रिटिकैलिटी हासिल की और मार्च 2025 में उत्तरी क्षेत्रीय ग्रिड से जुड़ा। इसने 10 फरवरी 2026 को 700 MW की पूर्ण रेटेड शक्ति हासिल की; भारत के सोलह नियोजित 700 MW स्वदेशी PHWR में यह उपलब्धि पाने वाला यह पहला रिएक्टर है। साथ ही, RAPP-8 ने 5 जनवरी 2026 को प्राथमिक ताप परिवहन (PHT) प्रणाली की हॉट कंडीशनिंग सफलतापूर्वक पूरी की। रावतभाटा (जिला चित्तौड़गढ़) का RAPP स्थल 8 इकाइयों (इकाई 1–8) के साथ एक ही स्थान पर भारत का सबसे बड़ा परमाणु ऊर्जा परिसर है।
मुख्य तथ्य
- रावतभाटा, राजस्थान में RAPP-7 29 दिसंबर 2025 को पूर्ण रेटेड शक्ति के 90% पर पहुँचा।
- RAPP-7 NPCIL द्वारा विकसित 700 MW का स्वदेशी दाबित भारी जल रिएक्टर है।
- इसने सितंबर 2024 में पहली क्रिटिकैलिटी प्राप्त की और मार्च 2025 में उत्तरी क्षेत्रीय ग्रिड से जुड़ा।
- RAPP-7 ने 10 फरवरी 2026 को 700 MW की पूरी रेटेड शक्ति हासिल की।
- RAPP-8 ने कमीशनिंग से पहले का अहम चरण — प्राइमरी हीट ट्रांसपोर्ट सिस्टम की कंडीशनिंग — पूरी की।
- ये उपलब्धियाँ भारत में स्वदेशी परमाणु ऊर्जा उत्पादन की बढ़ती क्षमताओं को दर्शाती हैं।
PYQप्रीलिम्स/PYQ दृष्टिकोण
- RAS 2024 केंद्रीय बजट 2025-26 में घोषित परमाणु ऊर्जा क्षेत्र के विकास हेतु सरकार का भविष्योन्मुखी रोडमैप क्या है? — यह लेख एनपीसीआईएल की आरएपीपी-7 के पूर्ण 700 मेगावाट शक्ति प्राप्ति व 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु लक्ष्य का विवरण देता है, जो भारत के बजट-घोषित परमाणु ऊर्जा रोडमैप पर आरएएस 2024 प्रश्न के सीधे समानांतर है।
मेन्स दृष्टिकोण
प्रश्न: भारत के 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु लक्ष्य और विकसित भारत के तहत तकनीकी आत्मनिर्भरता के लिए राजस्थान परमाणु ऊर्जा परियोजना में एनपीसीआईएल के 700 मेगावाट स्वदेशी पीएचडब्ल्यूआर उपलब्धियों के रणनीतिक महत्व पर चर्चा कीजिए।
उत्तर (50 शब्द):
एनपीसीआईएल की रावतभाटा (चित्तौड़गढ़) आरएपीपी-7 — 700 मेगावाट स्वदेशी पीएचडब्ल्यूआर — ने 10 फरवरी 2026 को 05:15 बजे अपनी पूर्ण निर्धारित क्षमता हासिल की; सोलह नियोजित 700 मेगावाट पीएचडब्ल्यूआर में यह पहला रिएक्टर है। आरएपीपी-8 ने 5 जनवरी को पीएचटी हॉट कंडीशनिंग पूरी की, जिससे 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु लक्ष्य को बल मिला।
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राजस्थान परमाणु ऊर्जा परियोजना में पूर्ण क्षमता के 90 प्रतिशत पर संचालित स्वदेशी रिएक्टर आरएपीपी-7 की रेटेड विद्युत क्षमता कितनी है?
आरएपीपी-7 राजस्थान के रावतभाटा में स्थित 700 मेगावाट क्षमता का स्वदेशी दाबयुक्त भारी जल रिएक्टर (पीएचडब्ल्यूआर) है। यह 29 दिसंबर 2025 से अपनी पूर्ण रेटेड क्षमता के 90 प्रतिशत पर संचालित था और बाद में 10 फरवरी 2026 को पूर्ण 700 मेगावाट की रेटेड क्षमता तक पहुँच गया।
स्रोत: समाचार स्रोत
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
RAPP-7 क्या है और यह कहाँ स्थित है?
RAPP-7 700 MW का स्वदेशी दाबित भारी जल रिएक्टर (PHWR) है, जिसे NPCIL ने विकसित किया है। यह राजस्थान के रावतभाटा स्थित राजस्थान परमाणु ऊर्जा परियोजना (RAPP) का हिस्सा है और 700 MW डिजाइन वाला भारत का पहला स्वदेशी रिएक्टर है।
RAPP-7 ने 2024–2026 में कौन सी महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ हासिल कीं?
RAPP-7 ने सितंबर 2024 में पहली क्रिटिकैलिटी हासिल की, मार्च 2025 में उत्तरी क्षेत्रीय ग्रिड से जुड़ा, 29 दिसंबर 2025 को अपनी पूर्ण शक्ति के 90% तक पहुँचा और 10 फरवरी 2026 को 700 MW की पूरी रेटेड शक्ति हासिल की।
दाबित भारी जल रिएक्टर (PHWR) क्या है और भारत इसे क्यों अपनाता है?
PHWR में भारी जल (ड्यूटेरियम ऑक्साइड) मॉडरेटर और शीतलक दोनों का काम करता है, इसलिए बिना संवर्धन के प्राकृतिक यूरेनियम को ईंधन के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। भारत इस डिजाइन को इसलिए अपनाता है क्योंकि इसे स्वदेशी तकनीक से बनाया जा सकता है और इसमें घरेलू यूरेनियम-थोरियम संसाधनों का उपयोग होता है।
PHT सिस्टम कंडीशनिंग क्या है और RAPP-8 के लिए यह क्यों महत्वपूर्ण है?
PHT (प्राइमरी हीट ट्रांसपोर्ट) सिस्टम की कंडीशनिंग कमीशनिंग से पहले की प्रक्रिया है, जिसमें रिएक्टर के प्राथमिक शीतलक परिपथ को परमाणु परिचालन के लिए साफ कर तैयार किया जाता है। RAPP-8 में यह चरण पूरा होना बताता है कि वह पहली क्रिटिकैलिटी के करीब पहुँच रहा है।
RAPP की उपलब्धियाँ भारत के परमाणु ऊर्जा लक्ष्यों के लिए क्यों महत्वपूर्ण हैं?
RAPP-7 और RAPP-8 भारत की उस रणनीति का हिस्सा हैं जिसमें 2031–32 तक परमाणु ऊर्जा क्षमता को लगभग 7,500 MW से बढ़ाकर 22,480 MW करने का लक्ष्य है। ये उपलब्धियाँ भारत की बड़े स्वदेशी रिएक्टरों के डिजाइन, निर्माण और संचालन की बढ़ती क्षमता को दर्शाती हैं।
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