सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (CSE) और डाउन टू अर्थ पत्रिका ने 25 फरवरी 2026 को अनिल अगरवाल डायलॉग में "भारत के पर्यावरण की स्थिति 2026" रिपोर्ट जारी की।
रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्ष:
1. ग्रहीय सीमाएँ संकट में: पृथ्वी की प्रणालियों के लिए सुरक्षित संचालन की नौ सीमाओं में से सात वैश्विक स्तर पर पार हो चुकी हैं। इनमें जलवायु परिवर्तन, जैव-विविधता हानि, मीठे पानी का उपयोग, भू-प्रणाली परिवर्तन, नवीन संस्थाएँ (रासायनिक प्रदूषण) और जैव-भू-रासायनिक प्रवाह (नाइट्रोजन और फॉस्फोरस चक्र) शामिल हैं।
2. भारत में चरम मौसम (2025): जनवरी से नवंबर 2025 के बीच 99% से अधिक दिनों — यानी 334 में से 331 दिन — चरम मौसमी घटनाएँ हुईं। इनसे 4,419 मौतें हुईं और 1.74 करोड़ हेक्टेयर फसल प्रभावित हुई।
3. वायु प्रदूषण और जीवन प्रत्याशा: वायु प्रदूषण औसत भारतीय की जीवन प्रत्याशा 3.5 वर्ष कम करता है।
4. वायु गुणवत्ता निगरानी में कमी: केवल 15% भारतीय जनसंख्या किसी वायु गुणवत्ता निगरानी केंद्र के 10 किलोमीटर के भीतर रहती है।
रिपोर्ट जलवायु अनुकूलन, प्रदूषण नियंत्रण और पारिस्थितिकी तंत्र पुनरुद्धार की तात्कालिक आवश्यकता को रेखांकित करती है।
