बीमा कानून (संशोधन) अधिनियम, 2025 — जो बीमा क्षेत्र में विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) की सीमा को 74% से बढ़ाकर 100% करता है — 3 फरवरी 2026 को वित्त मंत्रालय द्वारा जारी राजपत्र अधिसूचना से 5 फरवरी 2026 को आधिकारिक रूप से लागू किया गया।

संसद के बजट सत्र में पारित यह संशोधन भारत के बीमा क्षेत्र के उदारीकरण में एक ऐतिहासिक कदम है। इससे पहले बीमा में FDI 49% तक सीमित थी, जिसे बीमा कानून (संशोधन) अधिनियम, 2021 में बढ़ाकर 74% किया गया था। नया कानून इसे 100% तक ले जाता है, जिससे पूर्ण विदेशी स्वामित्व वाली बीमा कंपनियाँ संभव हो गई हैं।

अधिनियम के मुख्य प्रावधान इस प्रकार हैं: (1) बीमा कंपनियों में FDI 74% से बढ़ाकर 100% की गई; (2) किसी भी बीमा कंपनी के अध्यक्ष, प्रबंध निदेशक या मुख्य कार्यकारी अधिकारी का भारतीय नागरिक होना अनिवार्य बना रहेगा — इससे प्रबंधन नियंत्रण भारतीय हाथों में रहेगा; (3) मूल अधिनियम की धारा 25 को फिलहाल स्थगित रखा गया है, जिससे उद्योग को समायोजन का समय मिलेगा।

सरकार का तर्क है कि इस उदारीकरण से भारत में बीमा की पहुँच बढ़ेगी, जो GDP के लगभग 3.7% पर है — वैश्विक औसत 7% से काफी कम। अधिक FDI से पूँजी, प्रौद्योगिकी और दुनिया की बेहतर कार्य-पद्धतियाँ आएंगी तथा ग्रामीण और अर्ध-शहरी बाजारों में बीमा की पहुँच बढ़ेगी।

IRDAI नए स्वामित्व मानदंडों के अनुपालन की निगरानी करेगा। मौजूदा संयुक्त उद्यमों को शेयरधारिता पुनर्गठन के लिए एक समय-सीमा दी जाएगी।