प्रसिद्ध ट्रांसजेंडर कार्यकर्ता अक्कई पद्मशाली को सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित एक विशेष समिति में नियुक्त किया गया है। यह समिति ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के अधिकारों की रक्षा और समान अवसर नीति तैयार करने के लिए बनाई गई है। वे शीर्ष न्यायालय द्वारा नियुक्त पैनल में कर्नाटक की पहली ट्रांसजेंडर व्यक्ति हैं। समिति की अध्यक्षता सेवानिवृत्त दिल्ली HC न्यायाधीश आशा मेनन कर रही हैं। अक्कई पद्मशाली संगठन 'ओंदेदे' की संस्थापक हैं और कर्नाटक में अपनी शादी पंजीकृत कराने वाली पहली ट्रांसजेंडर व्यक्ति हैं।
ट्रांसजेंडर कार्यकर्ता अक्कई पद्मशाली को ट्रांसजेंडर अधिकारों पर सुप्रीम कोर्ट समिति में नियुक्त किया गया
अक्कई पद्मशाली को ट्रांसजेंडर अधिकारों पर SC समिति में नियुक्त किया गया — वे शीर्ष न्यायालय के पैनल में कर्नाटक की पहली ट्रांसजेंडर सदस्य हैं; समान अवसर नीति तैयार करेंगी।
मुख्य तथ्य
- अक्काई पद्मशाली को ट्रांसजेंडर अधिकारों की रक्षा और समान अवसर नीति तैयार करने के लिए उच्चतम न्यायालय समिति में नियुक्त किया गया
- कर्नाटक से उच्चतम न्यायालय द्वारा नियुक्त पैनल में शामिल पहली ट्रांसजेंडर व्यक्ति
- समिति की अध्यक्षता दिल्ली उच्च न्यायालय की सेवानिवृत्त न्यायाधीश आशा मेनन करती हैं; ग्रेस बानू, गौरव मंडल (CLPR) और डॉ. संजय शर्मा शामिल हैं
- Akkai Padmashali Ondede की संस्थापक हैं और Karnataka में विवाह पंजीकृत करवाने वाली पहली ट्रांसजेंडर व्यक्ति हैं
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भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17A पर जनवरी 2026 में सुप्रीम कोर्ट का विभाजित फैसला किस मुद्दे से संबंधित है?
धारा 17ए के तहत लोक सेवक के आधिकारिक निर्णयों से जुड़े भ्रष्टाचार आरोपों की जाँच शुरू करने से पहले सरकार की पूर्व स्वीकृति आवश्यक है।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
अक्काई पद्मशाली कौन हैं और उन्हें क्या नियुक्ति मिली?
**अक्काई पद्मशाली** कर्नाटक की एक प्रमुख **ट्रांसजेंडर अधिकार कार्यकर्ता** हैं, जिन्हें **ट्रांसजेंडर अधिकारों पर सर्वोच्च न्यायालय समिति** में नियुक्त किया गया। इससे वे भारत के ट्रांसजेंडर समुदाय की कानूनी सुरक्षा से जुड़े मामलों में एक महत्वपूर्ण आवाज बन गईं।
ट्रांसजेंडर अधिकारों पर सर्वोच्च न्यायालय समिति क्या है?
**ट्रांसजेंडर अधिकारों पर सर्वोच्च न्यायालय समिति** का गठन भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रांसजेंडर कल्याण उपायों के कार्यान्वयन और **ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम 2019** के अनुपालन की निगरानी के लिए किया था।
भारत के ट्रांसजेंडर अधिकार आंदोलन में अक्काई पद्मशाली किस लिए जानी जाती हैं?
**अक्काई पद्मशाली** भारत में **ट्रांसजेंडर अधिकारों की वकालत** की अग्रणी आवाज हैं। वे कर्नाटक में जमीनी स्तर की सक्रियता, कानूनी पहचान की मान्यता के लिए वकालत और ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए राज्य तथा राष्ट्रीय स्तर की कल्याण योजनाओं पर काम के लिए जानी जाती हैं।
सर्वोच्च न्यायालय समिति में ट्रांसजेंडर कार्यकर्ता का होना क्यों महत्वपूर्ण है?
अक्काई पद्मशाली की नियुक्ति दिखाती है कि ट्रांसजेंडर नीति बनाने में **समुदाय की आवाज सीधे शामिल** की जा रही है। इससे यह सुनिश्चित होता है कि कानूनी सुरक्षा और कल्याण कार्यक्रम ट्रांसजेंडर व्यक्तियों की वास्तविक चुनौतियों को ध्यान में रखें।
ट्रांसजेंडर व्यक्ति संरक्षण अधिकार अधिनियम 2019 में क्या-क्या शामिल है?
**ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम 2019** में **लिंग पहचान की कानूनी मान्यता, भेदभाव का निषेध**, शिक्षा और रोजगार में कल्याण उपाय और ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिए राष्ट्रीय परिषद की स्थापना शामिल है।
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