सबका बीमा सबकी रक्षा (बीमा कानून संशोधन) विधेयक, 2025 संसद द्वारा 17 दिसंबर 2025 को पारित किया गया और यह बीमा कंपनियों में 100% तक विदेशी प्रत्यक्ष निवेश की अनुमति देता है। यह बीमा अधिनियम, 1938, जीवन बीमा निगम अधिनियम, 1956 और आईआरडीएआई अधिनियम, 1999 में संशोधन करता है। प्रमुख सुधारों में एफडीआई सीमा बढ़ाना, विदेशी पुनर्बीमा शाखाओं की नेट ओन्ड फंड आवश्यकता 5,000 करोड़ रुपये से घटाकर 1,000 करोड़ रुपये करना, बीमा मध्यस्थों के लिए एकमुश्त लाइसेंस व्यवस्था, शेयर पूँजी हस्तांतरण पर पूर्व स्वीकृति की सीमा बढ़ाकर 5% करना और पॉलिसीधारक शिक्षा एवं संरक्षण कोष शामिल हैं। अंतिम विधेयक में ऐसा समग्र लाइसेंस शामिल नहीं था जिसके तहत एक ही बीमाकर्ता जीवन और सामान्य बीमा दोनों दे सके। वर्तमान आँकड़ों के अनुसार, भारत की बीमा पैठ वित्त वर्ष 2025 में 3.7% रही, जबकि वैश्विक औसत 7.3% था।
सबका बीमा सबकी रक्षा अधिनियम 2025: बीमा में 100% एफडीआई, लेकिन समग्र लाइसेंस नहीं
सबका बीमा सबकी रक्षा (बीमा कानून संशोधन) विधेयक, 2025 संसद द्वारा 17 दिसंबर 2025 को पारित हुआ और इसके तहत बीमा कंपनियों में 100% तक एफडीआई की अनुमति दी गई। इसमें विदेशी पुनर्बीमा शाखाओं की नेट ओन्ड फंड आवश्यकता 5,000 करोड़ रुपये से घटाकर 1,000 करोड़ रुपये की गई और मध्यस्थों के लिए एकमुश्त लाइसेंस व्यवस्था लाई गई, लेकिन अंतिम विधेयक में समग्र लाइसेंस शामिल नहीं था। भारत की बीमा पैठ वित्त वर्ष 2025 में 3.7% रही, जबकि वैश्विक औसत 7.3% था।
मुख्य तथ्य
- बीमा कानून संशोधन अधिनियम 2025 ने बीमा में FDI सीमा 74% से बढ़ाकर 100% की।
- इस अधिनियम को 'सबका बीमा सबकी रक्षा' पहल से जोड़ा गया है, जो IRDAI के विज़न 2047 के अनुरूप है।
- समग्र बीमा लाइसेंस से एक ही संस्था को जीवन और सामान्य (गैर-जीवन) बीमा दोनों उपलब्ध कराने की अनुमति मिलेगी।
- भारत में काम करने वाली विदेशी पुनर्बीमा शाखाओं के लिए न्यूनतम पूँजी आवश्यकता घटाई गई।
- भारत में बीमा की पैठ GDP के लगभग 4.2% के बराबर है, जो वैश्विक औसत 7% से काफी कम है।
- 2021 में बीमा में FDI 49% से बढ़ाकर 74% की गई थी; नए अधिनियम में इसे 100% तक करने का प्रावधान है।
मेन्स दृष्टिकोण
प्रश्न: सबका बीमा सबकी रक्षा (बीमा कानून संशोधन) विधेयक, 2025 के प्रमुख सुधारों की चर्चा कीजिए और भारत की बीमा पैठ पर उनके संभावित प्रभाव का मूल्यांकन कीजिए।
उत्तर (50 शब्द):
विधेयक 100% तक एफडीआई की अनुमति देता है, विदेशी पुनर्बीमा शाखाओं की नेट ओन्ड फंड आवश्यकता 5,000 करोड़ रुपये से घटाकर 1,000 करोड़ रुपये करता है, निगरानी मजबूत करता है और मध्यस्थों के लिए एकमुश्त लाइसेंस लाता है। समग्र लाइसेंस शामिल नहीं था। वित्त वर्ष 2025 में पैठ 3.7% रही, जबकि वैश्विक स्तर 7.3% था।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
बीमा कानून संशोधन अधिनियम 2025 में मुख्य सुधार क्या है?
मुख्य सुधार बीमा क्षेत्र में FDI सीमा को 74% से बढ़ाकर 100% करना है, जिससे पूरी तरह विदेशी स्वामित्व वाली बीमा कंपनियाँ IRDAI लाइसेंसिंग के अधीन भारत में काम कर सकेंगी। अधिनियम में समग्र बीमा लाइसेंस का भी प्रावधान है और विदेशी पुनर्बीमा शाखाओं के लिए पूँजी की आवश्यकता घटाई गई है।
'सबका बीमा सबकी रक्षा' पहल क्या है?
'सबका बीमा सबकी रक्षा' सरकार के बीमा क्षेत्र सुधारों की ब्रांडिंग है। यह IRDAI के विज़न 2047 के अनुरूप है — यानी 2047 तक हर भारतीय परिवार के पास जीवन, स्वास्थ्य या संपत्ति बीमा में से कम से कम एक बीमा हो।
2025 अधिनियम में प्रस्तुत समग्र बीमा लाइसेंस क्या है?
समग्र बीमा लाइसेंस एक ही बीमा संस्था को एक नियामक लाइसेंस के तहत जीवन बीमा और सामान्य (गैर-जीवन) बीमा दोनों उत्पाद देने की अनुमति देता है, जिससे अनुपालन जटिलता और परिचालन लागत कम होती है।
2025 अधिनियम के समय भारत में बीमा की पैठ कितनी थी?
2025 अधिनियम के समय भारत में बीमा की पैठ GDP के लगभग 4.2% के बराबर थी, जो वैश्विक औसत लगभग 7% से काफी कम है। अधिनियम का उद्देश्य विदेशी पूँजी आकर्षित करना और बीमा कवरेज वाली आबादी बढ़ाना है।
भारत में बीमा में FDI सीमा में समय के साथ क्या बदलाव हुए हैं?
भारत में बीमा में FDI सीमा क्रमिक रूप से बढ़ाई गई है: 26% (मूल IRDA अधिनियम) से 49% (2015), फिर 74% (2021), और अब बीमा कानून संशोधन अधिनियम 2025 के तहत 100% — इससे पता चलता है कि इस क्षेत्र को विदेशी भागीदारी के लिए धीरे-धीरे खोला गया है।
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