प्रकाशित: 12 फ़रवरी 2026समाचार स्रोतअंतरराष्ट्रीय
भारत-UK सामाजिक सुरक्षा समझौते पर हस्ताक्षर: 75,000 भारतीय पेशेवरों को दोहरे अंशदान से मुक्ति
भारत और यूनाइटेड किंगडम ने 10 फरवरी 2026 को नई दिल्ली में द्विपक्षीय सामाजिक सुरक्षा समझौते (SSA) पर हस्ताक्षर किए। समझौते पर भारत की ओर से विदेश सचिव विक्रम मिस्री और UK की ओर से ब्रिटिश उच्चायुक्त लिंडी कैमरून ने हस्ताक्षर किए।
SSA दोनों देशों के उन कर्मचारियों को दोहरा सामाजिक सुरक्षा अंशदान देने से राहत देता है, जिन्हें अस्थायी रूप से (36 महीने तक) दूसरे देश में नियुक्त किया जाता है। अब ऐसे कर्मचारी केवल अपने गृह देश की सामाजिक सुरक्षा प्रणाली में अंशदान देंगे — UK के नेशनल इंश्योरेंस और भारत के EPF दोनों में एक साथ नहीं।
लगभग 75,000 भारतीय पेशेवर — मुख्यतः IT, इंजीनियरिंग और वित्त क्षेत्र में — और 900 से अधिक कंपनियां इससे लाभान्वित होंगी। सरकार का अनुमान है कि कुल बचत ₹4,000 करोड़ से अधिक होगी। UK में नियुक्त कर्मचारी EPFO या विदेश मंत्रालय से कवरेज प्रमाणपत्र (CoC) प्राप्त कर सकते हैं।
यह SSA जुलाई 2025 में हस्ताक्षरित व्यापक भारत-UK CETA का अभिन्न हिस्सा है और 2026 की पहली छमाही में CETA के साथ लागू होगा।
0मेन्स दृष्टिकोण
प्रश्न: फरवरी 2026 में हस्ताक्षरित भारत-यूके सामाजिक सुरक्षा समझौते के भारतीय पेशेवरों तथा सीईटीए के अंतर्गत भारत-यूके आर्थिक सम्बन्धों के लिए महत्व का आकलन कीजिए।
उत्तर (50 शब्द):
भारत-यूके ने 10 फरवरी 2026 को विदेश सचिव विक्रम मिश्री तथा उच्चायुक्त लिंडी कैमरून द्वारा सामाजिक सुरक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए। यह 36 माह तक यूके में नियुक्ति पर लगभग 75,000 भारतीय पेशेवरों के लिए दोहरे ईपीएफ-राष्ट्रीय बीमा अंशदान की बाध्यता समाप्त करता है; 900 कंपनियों में 4,000 करोड़ रुपये से अधिक बचत होगी। यह भारत-यूके सीईटीए का पूरक है।
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सामाजिक सुरक्षा अंशदान से जुड़े भारत-यूके सामाजिक सुरक्षा समझौते का मुख्य उद्देश्य क्या है?
व्याख्या · सही उत्तर Aसामाजिक सुरक्षा अंशदान पर भारत-यूके समझौते का उद्देश्य यह है कि अस्थायी सीमा-पार नियुक्ति पर गए योग्य कर्मियों को उसी अवधि के लिए दोनों देशों में सामाजिक सुरक्षा अंशदान न देना पड़े। यह व्यापक भारत-यूके व्यापार व्यवस्था में श्रम-गतिशीलता से जुड़ा है, लेकिन यह वीजा, आयकर या पेंशन-कोष नियमों की जगह नहीं लेता।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भारत-UK सामाजिक सुरक्षा समझौता (SSA) क्या है?
भारत-UK SSA पर 10 फरवरी 2026 को हस्ताक्षर हुए। इसके तहत UK में 36 माह तक की अल्पकालिक नियुक्ति पर गए भारतीय पेशेवरों को भारत के EPF और UK के नेशनल इंश्योरेंस — दोनों में एक साथ अंशदान नहीं देना होगा। यह समझौता जुलाई 2025 में हस्ताक्षरित भारत-UK CETA का हिस्सा है।
इस SSA से कितने लोगों को फायदा होगा और कितनी बचत होगी?
लगभग 75,000 भारतीय पेशेवरों — मुख्यतः IT और परामर्श क्षेत्र के कर्मचारी — को इस समझौते से सीधा फायदा होगा। दोहरे अंशदान की समाप्ति से अनुमानित ₹4,000 करोड़ से अधिक की बचत होगी, जो कर्मचारियों और नियोक्ताओं दोनों के लिए राहत की बात है।
इस SSA पर हस्ताक्षर किसने किए और यह किस व्यापक समझौते का हिस्सा है?
SSA पर भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री और ब्रिटिश उच्चायुक्त लिंडी कैमरन ने हस्ताक्षर किए। यह समझौता जुलाई 2025 में हस्ताक्षरित भारत-UK व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौते (CETA) का श्रमिकों की आवाजाही से जुड़ा एक महत्वपूर्ण घटक है।
भारत ने अब तक कितने देशों के साथ SSA किए हैं?
भारत ने 20 से अधिक देशों के साथ सामाजिक सुरक्षा समझौते किए हैं। इनमें जर्मनी, फ्रांस, जापान, दक्षिण कोरिया और ऑस्ट्रेलिया प्रमुख हैं। ये समझौते विदेश में काम करने वाले भारतीय कर्मचारियों को दोहरे अंशदान के बोझ से बचाते हैं।
'दोहरे अंशदान' की समस्या क्या थी और SSA ने इसे कैसे हल किया?
SSA से पहले UK में काम करने वाले भारतीय पेशेवरों को भारत के EPF और UK के नेशनल इंश्योरेंस — दोनों में एक साथ अंशदान देना पड़ता था, जिससे उनके हाथ में आने वाला वेतन काफी कम हो जाता था। SSA के तहत अब 36 माह तक की नियुक्ति पर UK नेशनल इंश्योरेंस में अंशदान की जरूरत नहीं होगी, जो भारतीय IT और परामर्श पेशेवरों के लिए बड़ी राहत है।