प्रकाशित: 23 सितंबर 2025PIBटॉपिक
भारत ने ऑस्ट्रेलिया के साथ जैविक उत्पादों पर पारस्परिक मान्यता समझौते (MRA) पर हस्ताक्षर किए
भारत और ऑस्ट्रेलिया ने 24 सितंबर 2025 को नई दिल्ली के वाणिज्य भवन में जैविक उत्पादों के लिए पारस्परिक मान्यता व्यवस्था पर हस्ताक्षर किए। यह व्यवस्था भारत-ऑस्ट्रेलिया आर्थिक सहयोग और व्यापार समझौते की भावना से जुड़ी है और दोनों देशों के बीच जैविक मानकों तथा प्रमाणन व्यवस्था पर भरोसे को दिखाती है। परीक्षा में इसे गैर-शुल्क बाधाओं, कृषि निर्यात और प्रमाणन मानकों के व्यावहारिक उदाहरण के रूप में पढ़ना उपयोगी रहेगा।
इस व्यवस्था का व्यावहारिक महत्व यह है कि पात्र जैविक उत्पादों के लिए अनुपालन आसान होगा और प्रमाणन से जुड़ी दोहराव वाली प्रक्रिया घटेगी। इससे भारतीय किसानों, उत्पादकों और निर्यातकों के लिए ऑस्ट्रेलियाई बाजार तक पहुंच सरल हो सकती है। व्यवस्था का दायरा उन जैविक उत्पादों तक है जो भागीदार देशों के अधिकार-क्षेत्र में उगाए और प्रसंस्कृत किए गए हों। इसमें बिना प्रसंस्करण वाले पौध-आधारित उत्पाद शामिल हैं, लेकिन समुद्री शैवाल, जलीय पौधे और ग्रीनहाउस फसलें शामिल नहीं हैं। इसके अलावा एक या अधिक पौध-आधारित सामग्री से बने प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ और वाइन भी दायरे में आते हैं।
भारत की ओर से इस व्यवस्था को लागू करने वाली संस्था कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण है, जबकि ऑस्ट्रेलिया की ओर से कृषि, मत्स्य और वानिकी विभाग जिम्मेदार है। राष्ट्रीय जैविक उत्पादन कार्यक्रम भारत के जैविक क्षेत्र में मानक, पारदर्शिता और विश्वसनीयता बनाए रखने से जुड़ा है। इसलिए यह खबर केवल निर्यात बढ़ाने की सूचना नहीं है, बल्कि प्रमाणन, गुणवत्ता नियंत्रण, लेबलिंग, किसानों की आय और व्यापार सुगमता के बड़े प्रश्न से भी जुड़ती है। स्टैटिक जीके में इसे भारत-ऑस्ट्रेलिया आर्थिक संबंध, जैविक खेती, कृषि निर्यात और गैर-शुल्क बाधाओं के उदाहरण के रूप में पढ़ना उपयोगी रहेगा।
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अभ्यास प्रश्न MCQ
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जुड़ा प्रश्नमध्यम
24 सितंबर 2025 को भारत-ऑस्ट्रेलिया जैविक उत्पाद पारस्परिक मान्यता समझौते पर कहाँ हस्ताक्षर किए गए?
व्याख्या · सही उत्तर Bलेख में स्पष्ट है कि यह समझौता 24 सितंबर 2025 को नई दिल्ली के वाणिज्य भवन में हस्ताक्षरित हुआ। इसका उद्देश्य भारतीय जैविक निर्यातकों की अनुपालन आवश्यकताओं को सरल बनाना और नियामकीय बाधाएँ घटाना था।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भारत-ऑस्ट्रेलिया जैविक उत्पाद पारस्परिक मान्यता व्यवस्था क्या है?
यह 24 सितंबर 2025 को नई दिल्ली के वाणिज्य भवन में हस्ताक्षरित व्यवस्था है, जिसके तहत जैविक उत्पादों के मामले में दोनों देशों की प्रमाणन और मानक प्रणालियों को मान्यता दी जाती है। इसका लक्ष्य अनुपालन आसान करना और जैविक व्यापार के लिए नए अवसर बनाना है।
इस व्यवस्था का भारतीय निर्यातकों के लिए महत्व क्या है?
भारतीय जैविक किसानों, उत्पादकों और निर्यातकों के लिए इसका महत्व यह है कि पात्र उत्पादों पर प्रमाणन से जुड़ी दोहराव वाली प्रक्रिया घट सकती है और ऑस्ट्रेलियाई बाजार तक पहुंच आसान हो सकती है। इससे गैर-शुल्क बाधाओं और अनुपालन लागत को समझने का अच्छा उदाहरण मिलता है।
इस व्यवस्था के दायरे में कौन-से उत्पाद आते हैं?
दायरे में बिना प्रसंस्करण वाले पौध-आधारित उत्पाद, एक या अधिक पौध-आधारित सामग्री से बने प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ और वाइन शामिल हैं। बिना प्रसंस्करण वाले पौध-आधारित उत्पादों में समुद्री शैवाल, जलीय पौधे और ग्रीनहाउस फसलें शामिल नहीं हैं।
कौन-सी संस्थाएं इस व्यवस्था को लागू करेंगी?
भारत की ओर से कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण लागू करने वाली संस्था है। ऑस्ट्रेलिया की ओर से कृषि, मत्स्य और वानिकी विभाग जिम्मेदार है।
परीक्षा की दृष्टि से यह विषय क्यों महत्वपूर्ण है?
इस व्यवस्था से भारत-ऑस्ट्रेलिया आर्थिक संबंध, जैविक खेती, कृषि निर्यात, प्रमाणन मानक, गैर-शुल्क बाधाएं और व्यापार सुगमता एक साथ समझे जा सकते हैं। प्रारंभिक परीक्षा में तथ्यात्मक प्रश्न और मुख्य परीक्षा में कृषि-निर्यात तथा व्यापार नीति से जुड़े विश्लेषणात्मक प्रश्न बन सकते हैं।