केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भारत की प्रत्यक्ष विदेशी निवेश नीति में ऐसा संशोधन मंजूर किया है, जिससे भारत के साथ भूमि सीमा साझा करने वाले देशों की संस्थाएं स्वचालित मार्ग से 10% तक लाभकारी स्वामित्व वाला गैर-नियंत्रक निवेश कर सकती हैं। इसका मतलब यह है कि छोटी और नियंत्रण-रहित हिस्सेदारी के लिए पहले जैसी पूर्ण सरकारी मंजूरी की बाध्यता कम होगी, लेकिन निवेश का आकार और नियंत्रण-स्वरूप सीमित रहेगा।

यह बदलाव 2020 की उस व्यवस्था में ढील देता है जिसके तहत भारत के साथ भूमि सीमा साझा करने वाले देशों से आने वाले प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के लिए सरकारी मंजूरी जरूरी थी। 2020 की व्यवस्था का उद्देश्य शत्रुतापूर्ण अधिग्रहण से भारतीय कंपनियों की रक्षा करना था। नई मंजूरी उसी सुरक्षा चिंता को बनाए रखते हुए सीमित निवेश के लिए अपेक्षाकृत खुला रास्ता देती है। इससे दिखता है कि निवेश नीति में पूंजी-प्रवाह की जरूरत और राष्ट्रीय-सुरक्षा उपायों के बीच संतुलन कैसे बनाया जाता है।

प्रत्यक्ष विदेशी निवेश में स्वचालित मार्ग का अर्थ है कि पात्र निवेश के लिए पूर्व सरकारी मंजूरी की आवश्यकता नहीं होती। लाभकारी स्वामित्व का मतलब कंपनी में वास्तविक स्वामित्व-हित से है। इस संशोधन में 10% तक की सीमा इसलिए महत्त्वपूर्ण है क्योंकि इसे गैर-नियंत्रक निवेश के रूप में रखा गया है। 10% से ऊपर या नियंत्रण देने वाले निवेश पर सरकारी मंजूरी की आवश्यकता बनी रहती है। प्रारंभिक परीक्षा में 10% सीमा, स्वचालित मार्ग, भूमि सीमा साझा करने वाले देश और 2020 प्रतिबंध जैसे तथ्य पूछे जा सकते हैं। मुख्य परीक्षा में यह मुद्दा निवेश-उदारीकरण, आर्थिक सुरक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा के संतुलन के उदाहरण के रूप में उपयोगी है।