प्रकाशित: 21 अक्टूबर 2025अर्थव्यवस्था
WTO ने MSME समावेशन के लिए भारत के उदारीकृत AEO कार्यक्रम की प्रशंसा की
विश्व व्यापार संगठन (WTO) ने अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में MSME की भागीदारी बढ़ाने के लिए भारत के उदारीकृत अधिकृत आर्थिक ऑपरेटर (AEO) कार्यक्रम की प्रशंसा की। WTO सचिवालय ने इसे एक मॉडल पहल के रूप में रेखांकित किया।
CBIC ने AEO कार्यक्रम को 2011 में पायलट रूप में शुरू किया और 2016 में संशोधित किया; यह WCO के SAFE फ्रेमवर्क से जुड़ा है। MSME अब प्रति वर्ष केवल 10 सीमा शुल्क दस्तावेजों (25 से कम) और दो वर्ष के परिचालन इतिहास (तीन से कम) के आधार पर पात्र हो सकते हैं। टियर-I प्रमाणन के लिए प्रसंस्करण समय एक महीने से घटकर 15 कार्य दिवस हो गया। लाभों में प्रत्यक्ष बंदरगाह प्रवेश और त्वरित रिफंड शामिल हैं।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
MSME के लिए भारत के AEO कार्यक्रम की WTO ने किस बात के लिए प्रशंसा की?
**WTO** ने भारत के **उदारीकृत प्राधिकृत आर्थिक ऑपरेटर (AEO) कार्यक्रम** की खास तौर पर इसलिए प्रशंसा की कि इसमें **MSME को शामिल किया गया** है। WTO ने इसे व्यापार सुगमता का अच्छा उदाहरण माना।
AEO कार्यक्रम भारतीय निर्यातकों को क्या लाभ देता है?
AEO-प्रमाणित भारतीय निर्यातकों को **सीमा शुल्क में प्राथमिकता के आधार पर क्लीयरेंस, कम जाँच दर, सीधी डिलीवरी का विकल्प और बंदरगाहों पर अलग से तय किया गया ग्राहक प्रबंधक** मिलता है।
भारत के AEO कार्यक्रम में कितने स्तर हैं?
विनिर्माण निर्यातकों के लिए भारत के **AEO कार्यक्रम** में **तीन स्तर** हैं: AEO-T1 (बुनियादी प्रमाणन), AEO-T2 (मध्यवर्ती) और AEO-T3 (उन्नत)।
WTO व्यापार सुविधा समझौता क्या है और भारत का AEO इससे कैसे संबंधित है?
**WTO व्यापार सुविधा समझौते (TFA)** का उद्देश्य वैश्विक स्तर पर सीमा शुल्क में होने वाली देरी और व्यापार लागत को कम करना है। भारत का उदारीकृत AEO कार्यक्रम TFA के प्रावधानों को सीधे लागू करता है।
भारत के AEO कार्यक्रम की WTO मान्यता से भारत की व्यापार छवि को कैसे लाभ होता है?
भारत के AEO कार्यक्रम को **WTO द्वारा सर्वोत्तम अभ्यास के रूप में मान्यता** मिलने से भारत की **व्यापार-अनुकूल अर्थव्यवस्था** वाली प्रतिष्ठा बढ़ती है और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला एकीकरण के प्रति भारत की प्रतिबद्धता दिखती है।