केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रल्हाद जोशी और UK के उप प्रधानमंत्री डेविड लैमी ने 18 फरवरी 2026 को भारत-UK विजन 2035 और चौथी भारत-UK ऊर्जा वार्ता के तहत भारत-UK अपतटीय पवन टास्कफोर्स की संयुक्त रूप से शुरुआत की। ब्रिटिश उच्चायुक्त लिंडी कैमरून भी उपस्थित थीं।

मंत्री जोशी ने इसे 'ट्रस्टफोर्स' कहा — दोनों देशों के बीच रणनीतिक स्वच्छ ऊर्जा सहयोग का प्रतीक। टास्कफोर्स भारत के अपतटीय पवन ऊर्जा पारिस्थितिकी तंत्र के विकास के लिए रणनीतिक मार्गदर्शन देगी। गुजरात और तमिलनाडु के तटों के निकट प्रारंभिक विकास के लिए उपयुक्त क्षेत्र चिह्नित किए गए हैं।

अपतटीय पवन परियोजनाओं को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार ने ₹7,453 करोड़ (लगभग 71 करोड़ पाउंड) का व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण (VGF) मंजूर किया है। भारत 272 GW से अधिक गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित विद्युत उत्पादन क्षमता — 141 GW सौर और 55 GW पवन — पार कर चुका है। यह भारत के 2030 तक 500 GW नवीकरणीय ऊर्जा और 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन के लक्ष्य का महत्वपूर्ण हिस्सा है।