स्वच्छ ऊर्जा की ओर बढ़ते हुए भारत ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। फरवरी 2026 तक देश की कुल स्थापित विद्युत उत्पादन क्षमता में गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों की हिस्सेदारी 52.57% हो गई। पेरिस समझौते के तहत भारत के राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (NDC) में 2030 तक यह हिस्सेदारी 50% करने का लक्ष्य था। भारत ने यह लक्ष्य लगभग 5 साल पहले ही हासिल कर लिया।

पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEF&CC) और नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) ने संयुक्त रूप से इस उपलब्धि की घोषणा की। भारत की गैर-जीवाश्म विद्युत क्षमता में सौर ऊर्जा—90 गीगावाट से अधिक के साथ सबसे बड़ा स्रोत—पवन ऊर्जा, बड़ी और छोटी जलविद्युत परियोजनाएँ, परमाणु ऊर्जा तथा बायोमास आधारित उत्पादन शामिल हैं।

इस उपलब्धि में राजस्थान की अहम भूमिका है। लगभग 31,500 मेगावाट स्थापित नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता के साथ राजस्थान देश के सभी राज्यों में सबसे आगे है। जोधपुर जिले में स्थित भड़ला सोलर पार्क 2,700 मेगावाट से अधिक क्षमता वाला दुनिया का सबसे बड़ा सोलर पार्क है। जैसलमेर, बाड़मेर और जोधपुर जिलों में पवन ऊर्जा की महत्वपूर्ण परियोजनाएँ भी हैं।

भारत ने 2015 में प्रस्तुत मूल NDC में 50% का लक्ष्य रखा था। 2022 में प्रस्तुत संशोधित NDC ने इस लक्ष्य को बरकरार रखा और 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन की प्रतिबद्धता को भी शामिल किया। लक्ष्य वर्ष से पहले 52.57% तक पहुंचना दिखाता है कि भारत अधिक महत्वाकांक्षी जलवायु लक्ष्य तय करने के लिए तैयार है और संयुक्त राष्ट्र जलवायु सम्मेलन COP31 जैसी अंतरराष्ट्रीय जलवायु वार्ताओं में उसकी स्थिति मज़बूत हुई है।

परीक्षा की दृष्टि से यह विषय पर्यावरण, अर्थव्यवस्था में हरित ऊर्जा की ओर बदलाव और अंतरराष्ट्रीय संबंधों में पेरिस समझौते, NDC तथा जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र रूपरेखा अभिसमय (UNFCCC) को आपस में जोड़ता है। नवीकरणीय ऊर्जा में राजस्थान का नेतृत्व RAS परीक्षा में बार-बार पूछा जाने वाला विषय है।