भारत ने स्वच्छ ऊर्जा की ओर बढ़ने में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है: जून 2025 में भारत की कुल स्थापित विद्युत क्षमता में गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित क्षमता की हिस्सेदारी 50% हो गई। यह पेरिस समझौते के तहत प्रस्तुत राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (NDC) के लक्ष्य — 2030 तक 50% गैर-जीवाश्म क्षमता हासिल करने — को लगभग पांच साल पहले ही पूरा करता है।

MoEF&CC और MNRE ने संयुक्त रूप से इस उपलब्धि की घोषणा की। भारत के गैर-जीवाश्म बिजली मिश्रण में सौर ऊर्जा (90 GW से अधिक के साथ सबसे बड़ा योगदान), पवन ऊर्जा, बड़ी जलविद्युत, लघु जल विद्युत, परमाणु और बायोमास-आधारित उत्पादन शामिल हैं।

राजस्थान की इस उपलब्धि में अहम भूमिका है। राज्य 30 अप्रैल 2026 तक 47,754.45 मेगावाट की स्थापित नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता के साथ भारत का नवीकरणीय ऊर्जा केंद्र बन गया है — सभी राज्यों में सबसे अधिक। भाडला का राजस्थान सोलर पार्क 2,245 मेगावाट क्षमता वाला विश्व के सबसे बड़े सौर पार्कों में से एक है। राज्य में जैसलमेर, बाड़मेर और जोधपुर जिलों में महत्वपूर्ण पवन ऊर्जा परियोजनाएँ भी हैं।

भारत के मूल NDC (2015 में प्रस्तुत) ने 50% लक्ष्य निर्धारित किया था; संशोधित NDC (2022) ने 2070 तक नेट-जीरो प्रतिबद्धता के साथ इस लक्ष्य को बरकरार रखा और इसे और मज़बूत किया। लक्ष्य से पहले 52.57% पार करना भारत की अधिक महत्वाकांक्षी जलवायु लक्ष्य निर्धारित करने की तैयारी का संकेत देता है और COP31 जैसी अंतरराष्ट्रीय जलवायु वार्ताओं में उसकी स्थिति मजबूत करता है।

परीक्षा की दृष्टि से, यह विषय पर्यावरण, अर्थव्यवस्था (हरित ऊर्जा संक्रमण) और अंतरराष्ट्रीय संबंधों (पेरिस समझौता, NDC, UNFCCC) को आपस में जोड़ता है। नवीकरणीय ऊर्जा में राजस्थान का नेतृत्व RAS परीक्षा के राज्य-स्तरीय प्रश्नों में एक आवर्ती विषय है।