माही-बांसवाड़ा परमाणु ऊर्जा संयंत्र राजस्थान और भारत की ऊर्जा सुरक्षा से जुड़ा बड़ा समसामयिकी विषय है। 25 सितंबर 2025 को प्रधानमंत्री मोदी द्वारा इसकी आधारशिला रखने की घोषणा की गई थी। यह संयंत्र राजस्थान के बांसवाड़ा जिले में 1,366 एकड़ भूमि पर प्रस्तावित है। इसकी कुल स्थापित क्षमता 2,800 मेगावाट होगी और इसके लिए चार स्वदेशी 700 मेगावाट विद्युत दबावयुक्त भारी जल रिएक्टर लगाए जाने हैं। परियोजना की अनुमानित लागत लगभग ₹42,000 करोड़ बताई गई है और इसे 2036 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इसी दौरे में ₹1.21 लाख करोड़ से अधिक की अवसंरचना परियोजनाओं का संदर्भ भी जुड़ा था, इसलिए यह केवल ऊर्जा परियोजना नहीं, बल्कि बड़े सार्वजनिक निवेश और क्षेत्रीय विकास का मामला भी है।

परीक्षा में इससे 2,800 मेगावाट क्षमता, चार स्वदेशी 700 मेगावाट रिएक्टर, बेस-लोड बिजली, कम कार्बन उत्सर्जन और दीर्घकालिक ऊर्जा मिश्रण जैसे बिंदु पूछे जा सकते हैं। परमाणु ऊर्जा को बेस-लोड बिजली, कम कार्बन उत्सर्जन और दीर्घकालिक ऊर्जा मिश्रण के संदर्भ में पढ़ा जाता है। राजस्थान जैसे राज्य में बड़े ऊर्जा संयंत्र भूमि उपयोग, स्थानीय रोजगार और औद्योगिक विकास जैसे पहलुओं से भी जुड़े होते हैं। निर्माण चरण के दौरान 10,000 से अधिक प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार अवसर बताए गए हैं, इसलिए राज्य-स्तरीय परीक्षाओं में इसका आर्थिक पक्ष भी पूछा जा सकता है।

RAS और UPSC दोनों के लिए याद रखने योग्य तथ्य हैं: स्थान बांसवाड़ा, भूमि 1,366 एकड़, क्षमता 2,800 मेगावाट, चार स्वदेशी 700 मेगावाट विद्युत दबावयुक्त भारी जल रिएक्टर, अनुमानित लागत ₹42,000 करोड़ और लक्ष्य वर्ष 2036। मुख्य परीक्षा में इसे ऊर्जा सुरक्षा, स्वदेशी परमाणु तकनीक, अवसंरचना निवेश और राजस्थान के क्षेत्रीय विकास से जोड़कर लिखा जा सकता है।