भारत सरकार ने 29 जनवरी 2026 को कोकिंग कोयले को खान और खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1957 के तहत महत्वपूर्ण और रणनीतिक खनिज के रूप में अधिसूचित किया। यह कदम खनन क्षेत्र में सुधार, आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत 2047 की नीति-दिशा से जुड़ा है। कोकिंग कोयला इस्पात निर्माण के लिए अहम कच्चा माल है, इसलिए इसकी उपलब्धता केवल खनन नीति का मुद्दा नहीं, बल्कि औद्योगिक सुरक्षा और आर्थिक रणनीति का भी विषय है।

भारत के पास लगभग 37.37 अरब टन कोकिंग कोयला संसाधन हैं। ये संसाधन मुख्य रूप से झारखंड में हैं, जबकि मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ में भी अतिरिक्त संसाधन मौजूद हैं। इसके बावजूद इस्पात क्षेत्र की कोकिंग कोयला आवश्यकता का लगभग 95% आयात से पूरा होता है। कोकिंग कोयले का आयात 2020-21 में 5.12 करोड़ टन से बढ़कर 2024-25 में 5.758 करोड़ टन हो गया। इससे विदेशी मुद्रा का बड़ा बहिर्वाह होता है और इस्पात क्षेत्र की आपूर्ति श्रृंखला बाहरी जोखिमों के प्रति संवेदनशील रहती है।

केंद्र सरकार ने अधिनियम की प्रथम अनुसूची में बदलाव करते हुए भाग A की कोयला प्रविष्टि में कोकिंग कोयला शामिल किया और भाग D में कोकिंग कोयले को महत्वपूर्ण और रणनीतिक खनिजों की सूची में जोड़ा। इससे तेज मंजूरी, कारोबार की सरलता, गहरे भंडारों के अन्वेषण और खनन गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। नीति आयोग के सुझाव और विकसित भारत लक्ष्यों पर उच्च-स्तरीय समिति की सिफारिशों ने इस निर्णय की पृष्ठभूमि तैयार की।

इस अधिसूचना में खनिज संसाधन और औद्योगिक नीति की कड़ी इसलिए महत्वपूर्ण है कि घरेलू संसाधन होने के बावजूद इस्पात क्षेत्र आयात पर निर्भर है। यहां मुख्य कानूनी बिंदु खान कानून का वैधानिक ढांचा है: धारा 11C के तहत अनुसूची में संशोधन हुआ, जबकि धारा 11D(3) के अनुसार रॉयल्टी, नीलामी प्रीमियम और अन्य वैधानिक भुगतान संबंधित राज्य सरकारों को ही मिलते रहेंगे, भले ही नीलामी केंद्र सरकार करे।