भारत और न्यूज़ीलैंड ने दिसंबर 2025 में एक ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को अंतिम रूप दिया। इसका उद्देश्य दोनों देशों के व्यापार पर लगने वाले शुल्क में उल्लेखनीय कमी करना है। समझौते के तहत दोनों देशों के बीच होने वाले अधिकांश वस्तु व्यापार पर शुल्क घटाए या समाप्त किए जाएँगे। इससे भारतीय वस्त्रों, दवाओं, इंजीनियरिंग सामान और कृषि उत्पादों के निर्यात के नए अवसर खुलेंगे। इसके बदले न्यूज़ीलैंड की चुनिंदा वस्तुओं और सेवाओं को तय शर्तों पर भारतीय बाज़ार में पहुँच मिलेगी, जबकि डेयरी क्षेत्र को समझौते से बाहर रखा गया है। इसके अलावा, न्यूज़ीलैंड ने अगले 15 वर्षों में भारत की अर्थव्यवस्था में 20 अरब अमेरिकी डॉलर निवेश करने का वादा किया। यह निवेश बुनियादी ढाँचे, नवीकरणीय ऊर्जा और प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में किया जाएगा। यह समझौता हिंद-प्रशांत साझेदारों के साथ भारत के आर्थिक संबंध गहरे करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है। यह हिंद-प्रशांत आर्थिक रूपरेखा (IPEF) में भारत की भागीदारी और ब्रिटेन, यूरोपीय संघ तथा खाड़ी सहयोग परिषद के देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते पर चल रही वार्ताओं के अनुरूप है। 2024-25 में भारत-न्यूज़ीलैंड वस्तु व्यापार 1.3 अरब अमेरिकी डॉलर था, लेकिन इस समझौते से द्विपक्षीय व्यापार में उल्लेखनीय वृद्धि की उम्मीद है। यह समझौता न्यूज़ीलैंड की आर्थिक रणनीति में बड़ा बदलाव दर्शाता है। अब तक उसके आर्थिक संबंध ऑस्ट्रेलिया और चीन से अधिक घनिष्ठ रहे हैं, लेकिन अब वह भारत के साथ आर्थिक साझेदारी को अधिक महत्व दे रहा है।