भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने 3–5 दिसंबर 2025 की बैठक में सर्वसम्मति से नीतिगत रेपो दर 25 आधार अंक घटाकर 5.25% कर दी, जो 5 दिसंबर 2025 से प्रभावी हुई। स्टैंडिंग डिपॉजिट फैसिलिटी (SDF) दर 5.00% और मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी (MSF) दर व बैंक दर 5.50% की गई। छह में से पाँच MPC सदस्यों ने 'तटस्थ' नीतिगत रुख बनाए रखने के पक्ष में मत दिया। यह 2025 की चौथी कटौती थी, जो पिछली दो नीतिगत बैठकों में विराम के बाद हुई। फरवरी 2025 में रेपो दर 6.50% थी, जो दिसंबर तक 5.25% हो गई; 2019 के बाद भारत में यह सबसे आक्रामक मौद्रिक सहजता रही। MPC ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए CPI मुद्रास्फीति पूर्वानुमान 60 आधार अंक घटाकर 2.0% कर दिया। मजबूत खरीफ फसल, अनुकूल वैश्विक कमोडिटी मूल्य और प्रभावी आपूर्ति-पक्ष हस्तक्षेपों के कारण यह रिकॉर्ड न्यून स्तर था। साथ ही FY2025–26 के लिए GDP वृद्धि अनुमान 6.8% से बढ़ाकर 7.3% किया गया। दिसंबर 2024 में शक्तिकान्त दास के उत्तराधिकारी बने RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने विकास-समर्थक रुख के साथ इस निर्णय का मार्गदर्शन किया। रेट कट से गृह, वाहन और व्यक्तिगत ऋण EMI में कमी, MSME और कृषि क्षेत्र के लिए ऋण लागत घटने और सुस्त निजी निवेश को प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है। आलोचकों ने चेतावनी दी कि 2% CPI का अत्यंत न्यून मुद्रास्फीति आँकड़ा अस्थायी हो सकता है। अगली MPC बैठक 4–6 फरवरी 2026 को निर्धारित है।