22 अप्रैल 2026 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पहलगाम आतंकी हमले की पहली वर्षगांठ पर इसके 26 पीड़ितों को श्रद्धांजलि अर्पित की और आतंकवाद के प्रति भारत की शून्य-सहिष्णुता नीति दोहराई। 22 अप्रैल 2025 को जम्मू और कश्मीर के अनंतनाग ज़िले में पहलगाम के ऊपर बैसरन घास के मैदान में हुए इस हमले में 25 पर्यटक और स्थानीय पोनी संभालने वाले आदिल हुसैन शाह मारे गए थे। यह हमला एक दशक से अधिक समय में घाटी का सबसे घातक नागरिक आतंकी हमला था। इसकी जिम्मेदारी पाकिस्तान स्थित लश्कर-ए-तैयबा के प्रॉक्सी द रेज़िस्टेंस फ्रंट ने ली थी और जांच में इसके तार जैश-ए-मोहम्मद तथा हिज़बुल मुजाहिदीन से जुड़े एक व्यापक नेटवर्क तक पाए गए। प्रधानमंत्री मोदी ने पोस्ट किया, "पिछले वर्ष इसी दिन पहलगाम के घृणित आतंकी हमले में मारे गए निर्दोष लोगों को याद कर रहा हूँ। उन्हें कभी नहीं भुलाया जाएगा। भारत किसी भी रूप में आतंक के सामने कभी नहीं झुकेगा, और आतंकियों की घृणित मंशाएँ कभी सफल नहीं होंगी।" पीड़ितों के नामों के साथ अंकित काले संगमरमर का एक स्मारक अब लिद्दर नदी के किनारे खड़ा है। भारत की प्रतिक्रिया दो चरणों में सामने आई थी: 7 मई 2025 को ऑपरेशन सिंदूर, जिसमें भारतीय सशस्त्र बलों ने पाकिस्तान और पाकिस्तान-अधिकृत जम्मू और कश्मीर में नौ आतंकी लॉन्चपैड पर प्रहार किया, तथा ऑपरेशन महादेव, जो खुफिया जानकारी पर आधारित अभियान था। इसमें 22 मई से 22 जुलाई तक संदिग्धों की मौजूदगी की पुष्टि की गई और 28 जुलाई 2025 को सेना, सीआरपीएफ तथा जम्मू-कश्मीर पुलिस ने पहलगाम हमले में शामिल तीनों आतंकियों को निष्प्रभावी कर दिया।