27 जनवरी 2026 को नई दिल्ली में हुए 16वें भारत-यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन में भारत और यूरोपीय संघ के रिश्तों को व्यापार, सुरक्षा और जलवायु सहयोग के तीन पहलुओं से नई मजबूती मिली। आधिकारिक बयान के अनुसार, मुक्त व्यापार समझौते की वार्ताएं पूरी होने के साथ सुरक्षा और रक्षा साझेदारी पर हस्ताक्षर हुए और हरित हाइड्रोजन टास्क फोर्स बनाई गई। आधिकारिक संयुक्त बयान में इस मुक्त व्यापार समझौते को भारत-यूरोपीय संघ रणनीतिक साझेदारी का अहम पड़ाव बताया गया है, क्योंकि इससे व्यापार और निवेश संबंध, आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती और साझा समृद्धि को सहारा मिलने की उम्मीद है।
सुरक्षा और रक्षा साझेदारी इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह दोनों पक्षों के बीच पहला ऐसा व्यापक रक्षा-सुरक्षा ढांचा है। आधिकारिक बयान के अनुसार इसमें समुद्री सुरक्षा, रक्षा उद्योग और तकनीक, साइबर व हाइब्रिड खतरे, अंतरिक्ष और आतंकवाद-रोधी सहयोग जैसे क्षेत्र शामिल हैं। RAS और UPSC प्रीलिम्स के लिए यह तथ्य भारत की बदलती विदेश नीति, हिंद-प्रशांत और बहुपक्षीय साझेदारियों से जुड़ता है। मुख्य परीक्षा में इसे भारत की रणनीतिक स्वायत्तता, नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था और आपूर्ति श्रृंखला सुरक्षा के उदाहरण के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है।
जलवायु और ऊर्जा पक्ष भी परीक्षा के नज़रिए से उतना ही महत्वपूर्ण है। 2030 के संयुक्त व्यापक रणनीतिक एजेंडे में हरित हाइड्रोजन टास्क फोर्स को हाइड्रोजन के उत्पादन, भंडारण और वितरण पर सहयोग के लिए ऑपरेशनल किया जाएगा, ताकि कठिन क्षेत्रों में कार्बन उत्सर्जन घटाने में मदद मिले। भारत और यूरोपीय संघ मिलकर वैश्विक GDP का 25% हिस्सा रखते हैं; इसलिए यह खबर केवल द्विपक्षीय कूटनीति नहीं, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था, ऊर्जा बदलाव और सुरक्षा गवर्नेंस से जुड़ी समसामयिकी है।
