प्रधानमंत्री कार्यालय ने 26 अप्रैल 2026 को 133वें मन की बात संबोधन का अंग्रेजी संस्करण प्रकाशित किया। इसमें प्रधानमंत्री ने जनगणना 2027 को बड़ा राष्ट्रीय अभियान बताया और इसे दुनिया की सबसे बड़ी जनगणना कहा। शासन से जुड़ा मुख्य संदेश यह था कि अगली जनगणना का अनुभव अलग होगा, क्योंकि पूरी प्रक्रिया डिजिटल कर दी गई है। घर-घर जाने वाले गणनाकर्मी मोबाइल ऐप साथ रखेंगे और निवासियों से बातचीत के बाद जानकारी सीधे डिजिटल रूप में दर्ज करेंगे। संबोधन में स्व-गणना सुविधा भी समझाई गई। नागरिक गणनाकर्मी के आने से 15 दिन पहले खुलने वाली अवधि में अपनी जानकारी स्वयं दर्ज कर सकेंगे। अपनी प्रविष्टि पूरी करने के बाद नागरिक को मोबाइल या ईमेल पर एक विशेष पहचान संख्या मिलेगी। बाद में जब गणनाकर्मी घर पहुंचेगा, तो निवासी यह पहचान संख्या दिखाकर जानकारी सत्यापित करा सकेगा, इसलिए वही विवरण दोबारा देने की जरूरत नहीं होगी। प्रधानमंत्री ने कहा कि इससे समय बचेगा और प्रक्रिया सरल होगी। उन्होंने यह भी बताया कि जिन राज्यों में स्व-गणना पूरी हो चुकी है, वहां जनगणना कर्मियों ने घरों की गणना शुरू कर दी है, और लगभग 1.20 करोड़ परिवारों की गृह सूचीकरण प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। संबोधन ने नागरिक भागीदारी को अभियान के केंद्र में रखा और कहा कि राष्ट्रीय जनगणना केवल सरकारी कार्य नहीं, बल्कि सबकी साझा जिम्मेदारी है। सार्वजनिक भरोसा मजबूत करने के लिए यह भी कहा गया कि नागरिकों द्वारा दी गई जानकारी सुरक्षित, गोपनीय और डिजिटल सुरक्षा से संरक्षित है। सिविल सेवा तैयारी के लिए यह घोषणा महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह जनसंख्या डेटा संग्रह को डिजिटल शासन, प्रशासनिक कार्यकुशलता, गोपनीयता सुरक्षा और नागरिक-राज्य सहयोग से जोड़ती है। सटीक जनगणना डेटा सार्वजनिक वित्त, कल्याण योजनाओं के सही लक्ष्यीकरण, निर्वाचन क्षेत्र योजना, अवसंरचना, शहरी नीति, स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा क्षमता और प्रमाण-आधारित शासन को प्रभावित करता है। डिजिटल मॉडल दोहराव घटा सकता है और क्षेत्रीय कार्यों को तेज कर सकता है, लेकिन इसके लिए समावेशन, जागरूकता और भरोसेमंद जमीनी क्रियान्वयन जरूरी होगा।
प्रधानमंत्री कार्यालय ने 26 अप्रैल 2026 को 133वें मन की बात संबोधन में डिजिटल जनगणना 2027, स्व-गणना, मोबाइल ऐप से प्रविष्टि और सुरक्षित डेटा प्रबंधन पर जोर दिया
26 अप्रैल 2026 को प्रकाशित 133वें मन की बात संबोधन में प्रधानमंत्री ने जनगणना 2027 को दुनिया की सबसे बड़ी जनगणना बताया और कहा कि यह डिजिटल होगी। गणनाकर्मी मोबाइल ऐप का उपयोग करेंगे, नागरिक यात्रा से 15 दिन पहले स्व-गणना कर सकेंगे, विशेष पहचान संख्या प्राप्त करेंगे और बाद में डेटा सत्यापित करेंगे, जबकि गोपनीयता और डिजिटल सुरक्षा बनी रहेगी।
मुख्य तथ्य
- प्रधानमंत्री कार्यालय ने 26 अप्रैल 2026 को 133वां मन की बात संबोधन प्रकाशित किया।
- प्रधानमंत्री ने जनगणना 2027 को दुनिया की सबसे बड़ी जनगणना और बड़ा राष्ट्रीय अभियान बताया।
- जनगणना 2027 डिजिटल बनाई गई है, जिसमें गणनाकर्मी मोबाइल ऐप से जानकारी दर्ज करेंगे।
- नागरिक गणनाकर्मी की यात्रा से 15 दिन पहले खुलने वाली अवधि में स्व-गणना कर सकते हैं।
- स्व-प्रविष्टि के बाद नागरिक को मोबाइल या ईमेल पर विशेष पहचान संख्या मिलती है, जिससे बाद में सत्यापन होता है।
- जहां स्व-गणना पूरी हुई, वहां लगभग 1.20 करोड़ परिवारों का गृह सूचीकरण पूरा हो चुका था।
- संबोधन ने नागरिक जानकारी के सुरक्षित, गोपनीय और डिजिटल रूप से संरक्षित प्रबंधन पर जोर दिया।
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संबोधन के अनुसार नागरिक जनगणना 2027 की स्व-गणना सुविधा में अपनी जानकारी कब दर्ज कर सकते हैं?
विवरण में बताया गया है कि स्व-गणना सुविधा गणनाकर्मी के आने से 15 दिन पहले खुलती है। अन्य विकल्प बताए नहीं गए और वर्णित प्रक्रिया से मेल नहीं खाते।
स्रोत: समाचार स्रोत
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रधानमंत्री ने जनगणना 2027 के बारे में क्या कहा?
उन्होंने इसे दुनिया की सबसे बड़ी जनगणना बताया और कहा कि प्रक्रिया डिजिटल बनाई गई है।
गणनाकर्मी जानकारी कैसे एकत्र करेंगे?
वे मोबाइल ऐप के ज़रिए घर-घर जाकर जानकारी सीधे डिजिटल रूप में दर्ज करेंगे।
स्व-गणना सुविधा क्या है?
नागरिक गणनाकर्मी के आने से 15 दिन पहले खुलने वाली अवधि में अपनी जानकारी स्वयं दर्ज कर सकते हैं।
स्व-गणना पूरी होने के बाद क्या होता है?
नागरिक को मोबाइल या ईमेल पर विशेष पहचान संख्या मिलती है, जिसे सत्यापन के लिए गणनाकर्मी को दिखाया जा सकता है।
डेटा के बारे में क्या आश्वासन दिया गया?
संबोधन में कहा गया कि नागरिकों की जानकारी सुरक्षित और गोपनीय रहेगी तथा डिजिटल सुरक्षा से संरक्षित होगी।
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