भारत ने मलेरिया नियंत्रण में एक अहम सार्वजनिक स्वास्थ्य उपलब्धि दर्ज की है। 2015 से 2023 के बीच मलेरिया के मामलों में 80.5% और मलेरिया से होने वाली मौतों में लगभग 78.3% कमी आई। इसी क्रम में 23 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के 160 जिलों ने 2022 से 2024 तक लगातार तीन वर्षों के लिए शून्य स्थानीय मलेरिया मामले बनाए रखे। यह उपलब्धि राष्ट्रीय मलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम की दिशा में स्थानीय स्तर पर निगरानी, समय पर पहचान और उपचार की अहमियत दिखाती है।
मलेरिया एक रोकथाम योग्य और इलाज योग्य बीमारी है, जो संक्रमित मादा एनोफिलीज मच्छर के काटने से फैलती है। इसलिए परीक्षा की दृष्टि से यह विषय केवल स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है। इसमें रोग-निगरानी, जिला-स्तरीय प्रशासन, प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं, व्यवहार परिवर्तन और अलग-अलग विभागों के समन्वय भी शामिल हैं। 160 जिलों में लगातार शून्य स्थानीय मामले दर्ज होना बताता है कि बीमारी के उन्मूलन में राष्ट्रीय लक्ष्य तभी मजबूत होते हैं जब जिला स्तर पर संक्रमण की श्रृंखला को रोका जाए।
UPSC, RAS और अन्य राज्य परीक्षाओं में यह तथ्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य, समसामयिकी और शासन के प्रश्नों से जुड़ सकता है। प्रीलिम्स में 80.5% मामलों की कमी, 78.3% मौतों की कमी, 160 जिले, 23 राज्य/केंद्रशासित प्रदेश और 2022-2024 की अवधि सीधे पूछी जा सकती है। मुख्य परीक्षा में इसे सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों के परिणाम, स्थानीय प्रशासन की भूमिका और बीमारी-उन्मूलन रणनीति के उदाहरण के रूप में लिखा जा सकता है। भारत का व्यापक रोडमैप 2027 तक शून्य स्थानीय मलेरिया मामलों और 2030 तक पूर्ण मलेरिया उन्मूलन से जुड़ा है, इसलिए यह उपलब्धि लक्ष्य-आधारित स्वास्थ्य शासन का उपयोगी केस स्टडी भी है।
