प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राजा जिग्मे खेसर नामग्याल वांगचुक के निमंत्रण पर भूटान की दो दिवसीय राजकीय यात्रा (11–12 नवंबर 2025) पूर्ण की। यात्रा का केंद्रबिंदु 1,020 MW पुनातसांगछू-II जलविद्युत परियोजना का संयुक्त उद्घाटन था — यह भारत-भूटान द्विपक्षीय ऊर्जा परियोजना भूटान की कुल विद्युत उत्पादन क्षमता में लगभग 40 प्रतिशत की वृद्धि करती है। भारत ने भूटान को अतिरिक्त जलविद्युत और स्वच्छ ऊर्जा परियोजनाओं के लिए ₹4,000 करोड़ की ऋण सीमा (LoC) की घोषणा की। नवीकरणीय ऊर्जा (सौर, पवन, हरित हाइड्रोजन, ऊर्जा भंडारण), स्वास्थ्य व चिकित्सा, और मानसिक स्वास्थ्य में संस्थागत संपर्क (PEMA सचिवालय–NIMHANS) पर MoU हस्ताक्षरित हुए। PM मोदी ने थिम्पू में कालचक्र दीक्षा समारोह में भी भाग लिया। यह यात्रा भारत की 'पड़ोस प्रथम' नीति को पुष्ट करती है और भारत-भूटान रणनीतिक साझेदारी में एक नया अध्याय जोड़ती है, जो 1949 की मैत्री संधि (2007 में संशोधित) पर आधारित है।
PM मोदी ने भूटान की दो दिवसीय राजकीय यात्रा पूरी की; 1,020 MW पुनातसांगछू-II जलविद्युत परियोजना का उद्घाटन, महत्वपूर्ण MoU पर हस्ताक्षर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राजा जिग्मे खेसर नामग्याल वांगचुक के निमंत्रण पर भूटान की दो दिवसीय राजकीय यात्रा (11–12 नवंबर 2025) पूर्ण की। यात्रा का केंद्रबिंदु 1,020 MW पुनातसांगछू-II जलविद्युत परियोजना का संयुक्त उद्घाटन था — इस भारत-भूटान द्विपक्षीय ऊर्जा परियोजना से भूटान की कुल विद्युत उत्पादन क्षमता में लगभग 40 प्रतिशत की वृद्धि होती है। भारत ने भूटान को अतिरिक्त जलविद्युत और स्वच्छ ऊर्जा परियोजनाओं के लिए ₹4,000 करोड़ की ऋण सीमा (LoC) देने की घोषणा की। नवीकरणीय ऊर्जा (सौर, पवन, हरित हाइड्रोजन, ऊर्जा भंडारण), स्वास्थ्य व चिकित्सा, और मानसिक स्वास्थ्य में संस्थागत संपर्क (PEMA सचिवालय–NIMHANS) पर MoU हस्ताक्षरित हुए। PM मोदी ने थिम्पू में कालचक्र दीक्षा समारोह में भी भाग लिया। यह यात्रा भारत की 'पड़ोस प्रथम' नीति को पुष्ट करती है और भारत-भूटान रणनीतिक साझेदारी में एक नया अध्याय जोड़ती है, जो 1949 की मैत्री संधि (2007 में संशोधित) पर आधारित है।
मुख्य तथ्य
- PM मोदी ने 11–12 नवंबर 2025 को भूटान की दो दिवसीय राजकीय यात्रा पूर्ण की।
- यात्रा के दौरान 1,020 MW पुनातसांगछू-II जलविद्युत परियोजना का संयुक्त उद्घाटन हुआ।
- भारत ने भूटान में स्वच्छ ऊर्जा विकास के लिए ₹4,000 करोड़ की ऋण सीमा की घोषणा की।
- नवीकरणीय ऊर्जा, स्वास्थ्य, चिकित्सा और मानसिक स्वास्थ्य सहयोग पर MoU पर हस्ताक्षर हुए।
- यह यात्रा भारत की 'पड़ोस प्रथम' नीति को पुष्ट करती है।
- भारत-भूटान संबंधों का आधार 1949 की मैत्री संधि (2007 में संशोधित) है।
मेन्स दृष्टिकोण
प्रश्न: भारत की 'पड़ोस पहले' नीति एवं द्विपक्षीय ऊर्जा सहयोग के संदर्भ में नवंबर 2025 में प्रधानमंत्री मोदी की भूटान राजकीय यात्रा के रणनीतिक महत्व का मूल्यांकन कीजिए।
उत्तर (50 शब्द):
प्रधानमंत्री मोदी की दो-दिवसीय भूटान यात्रा (11-12 नवंबर 2025) में 1,020 मेगावाट पुनात्सांगछु-द्वितीय जलविद्युत परियोजना का संयुक्त उद्घाटन हुआ, जिससे भूटान की उत्पादन क्षमता लगभग 40% बढ़ती है। भारत ने 4,000 करोड़ रुपये की ऋण-सीमा घोषित की, नवीकरणीय ऊर्जा पर समझौता ज्ञापन किए, तथा 1,200 मेगावाट पुनात्सांगछु-प्रथम के लिए प्रतिबद्धता दोहराई।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
11–12 नवंबर 2025 को PM मोदी की भूटान की राजकीय यात्रा का उद्देश्य और परिणाम क्या थे?
PM मोदी ने 11–12 नवंबर 2025 को राजा जिग्मे खेसर नामग्याल वांगचुक के निमंत्रण पर भूटान की यात्रा की। यात्रा में 1,020 MW पुनातसांगछू-II जलविद्युत परियोजना का संयुक्त उद्घाटन हुआ, नवीकरणीय ऊर्जा और स्वास्थ्य पर कई MoU पर हस्ताक्षर हुए और भूटान में स्वच्छ ऊर्जा विकास के लिए ₹4,000 करोड़ की ऋण सीमा की घोषणा हुई।
पुनातसांगछू-II जलविद्युत परियोजना का भारत-भूटान संबंधों में क्या महत्व है?
1,020 MW पुनातसांगछू-II जलविद्युत परियोजना भारत और भूटान द्वारा संयुक्त रूप से विकसित एक प्रमुख द्विपक्षीय ऊर्जा परियोजना है। इसके उद्घाटन से भूटान की कुल विद्युत उत्पादन क्षमता में लगभग 40 प्रतिशत की वृद्धि हुई और यह भारत की 'पड़ोस प्रथम' नीति का उदाहरण है।
'पड़ोस प्रथम' नीति क्या है और भारत-भूटान संबंध इसे कैसे दिखाते हैं?
भारत की 'पड़ोस प्रथम' नीति पड़ोसी देशों के साथ मजबूत राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक संबंधों को प्राथमिकता देती है। 1949 की मैत्री संधि (2007 में संशोधित) से संचालित भारत-भूटान संबंध इस नीति का आदर्श उदाहरण हैं — भारत भूटान का सबसे बड़ा व्यापार भागीदार, प्रमुख विकास सहयोगी और मुख्य ऊर्जा सहयोगी है।
लाइन ऑफ क्रेडिट (LoC) क्या है और PM मोदी की भूटान यात्रा के दौरान घोषित LoC का उद्देश्य क्या था?
लाइन ऑफ क्रेडिट (LoC) पहले से स्वीकृत ऋण सुविधा होती है, जिसे एक देश दूसरे देश को खास विकास परियोजनाओं के लिए देता है। PM मोदी की नवंबर 2025 यात्रा के दौरान भारत ने भूटान में अतिरिक्त जलविद्युत और स्वच्छ ऊर्जा परियोजनाओं, जैसे सौर, पवन और हरित हाइड्रोजन, के विकास के लिए ₹4,000 करोड़ की LoC की घोषणा की।
भारत-भूटान द्विपक्षीय संबंधों को कौन-सी संधि नियंत्रित करती है और इसे कब संशोधित किया गया?
भारत-भूटान द्विपक्षीय संबंध 1949 की मैत्री संधि के आधार पर चलते हैं, जिसे 2007 में संशोधित किया गया। संशोधित संधि ने करीबी संबंध बनाए रखते हुए संबंधों की शर्तों को नए समय के अनुरूप किया और 1949 के मूल संस्करण की तुलना में भूटान को अपनी विदेश नीति चलाने में अधिक स्वायत्तता दी।
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