जोधपुर में बीएपीएस श्री स्वामीनारायण मंदिर का उद्घाटन 22 से 25 सितंबर 2025 तक आयोजित मूर्ति-प्रतिष्ठा महोत्सव के दौरान हुआ। मुख्य वैदिक मूर्ति-प्रतिष्ठा विधि केंद्रीय गर्भगृह में महंत स्वामी महाराज ने सम्पन्न की। नवनिर्मित मंदिर में भगवान स्वामीनारायण, अक्षरब्रह्म गुणातीतानंद स्वामी और अन्य देवताओं की मूर्तियों की विधिवत प्रतिष्ठा की गई और मंदिर श्रद्धालुओं के लिए खोला गया।

राजस्थान के लिए इसमें जोधपुर, धार्मिक पर्यटन, मंदिर स्थापत्य और सांस्कृतिक विरासत के सीधे तथ्य एक साथ मिलते हैं। परीक्षा की दृष्टि से तथ्य-आधारित प्रश्नों में तिथि, स्थान, संस्था, प्रमुख व्यक्ति, निर्माण-शैली और सामग्री पूछे जा सकते हैं। जोधपुर अक्षरधाम मंदिर को भारत का तीसरा और विश्व का पांचवां अक्षरधाम मंदिर बताया गया है। भारत के अन्य अक्षरधाम मंदिर नई दिल्ली और गांधीनगर, गुजरात में स्थित हैं। इसलिए यह तथ्य राजस्थान के साथ-साथ भारतीय सांस्कृतिक स्थलों की स्टैटिक जीके कड़ी भी बनाता है।

मंदिर नागर स्थापत्य शैली में स्थानीय छीतर पत्थर, यानी जोधपुर बलुआ पत्थर, से 42 बीघे भूमि पर बनाया गया है। निर्माण से जुड़ा महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि इसमें लोहे या स्टेनलेस स्टील का उपयोग नहीं किया गया; पत्थरों को पारंपरिक इंटरलॉकिंग तकनीक से जोड़ा गया। निर्माण में 7 वर्ष लगे और 500 कुशल शिल्पकारों ने काम किया। जोधपुर के स्थानीय पत्थर शिल्प, मंदिर स्थापत्य, धार्मिक आस्था और विरासत-आधारित पर्यटन का यह एक समकालीन उदाहरण है। प्रारंभिक परीक्षा में यह तिथि, स्थान, स्थापत्य शैली, सामग्री और निर्माण-विशेषताओं से जुड़ा सीधा तथ्य बन सकता है।