मारवाड़ महोत्सव 2025 का समापन 7 अक्टूबर 2025 को जोधपुर के मेहरानगढ़ किले और उम्मेद भवन पैलेस में हुआ। यह दो-दिवसीय आयोजन आश्विन मास की पूर्णिमा पर आयोजित हुआ और इसका मुख्य फोकस राजपूत शौर्य, राजस्थान की लोक परंपराओं और राज्य की सांस्कृतिक पहचान को सामने रखना था। कार्यक्रम में मांड, पणिहारी और लंगा गीतों जैसी लोक गायन परंपराएं, घूमर और कालबेलिया नृत्य और ऊंट टैटू शो शामिल रहे।

परीक्षा की दृष्टि से यह खबर राजस्थान इतिहास, कला और संस्कृति के साथ-साथ पर्यटन से जुड़ी समसामयिकी के लिए महत्वपूर्ण है। RAS, RPSC और UPSC जैसी परीक्षाओं में राजस्थान के प्रमुख उत्सव, उनके स्थल, समय, लोक कला रूप और पर्यटन विभाग की भूमिका सीधे प्रीलिम्स तथ्य के रूप में पूछे जा सकते हैं। मुख्य परीक्षा में इसे सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, लोक परंपराओं की प्रस्तुति और पर्यटन के जरिए क्षेत्रीय पहचान को सामने रखने जैसे बिंदुओं से जोड़ा जा सकता है।

मारवाड़ महोत्सव को राजस्थान पर्यटन का प्रमुख कार्यक्रम बताया गया है, इसलिए यह केवल सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि राज्य की विरासत को व्यापक स्तर पर प्रस्तुत करने का माध्यम भी है। जोधपुर, मेहरानगढ़ किला और उम्मेद भवन पैलेस जैसे स्थान इस आयोजन को भौगोलिक और सांस्कृतिक संदर्भ देते हैं। मांड, पणिहारी, लंगा, घूमर और कालबेलिया जैसे नामों को अलग-अलग याद रखने के बजाय उन्हें राजस्थान की लोक कला परंपरा के एक समूह के रूप में पढ़ना अधिक उपयोगी है। इससे प्रीलिम्स में पहचान-आधारित प्रश्न और मुख्य परीक्षा में संस्कृति-पर्यटन आधारित उत्तर दोनों में मदद मिलती है।