जनवरी 2026 में भारत सरकार ने खान एवं खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1957 के तहत कोकिंग कोल को 'महत्वपूर्ण और सामरिक खनिज' अधिसूचित किया। यह अधिसूचना आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत 2047 के लक्ष्यों के अनुरूप है और कोकिंग कोल को लिथियम, कोबाल्ट और निकेल जैसे अन्य महत्वपूर्ण खनिजों की श्रेणी में लाती है।

कोकिंग कोल इस्पात निर्माण के लिए अनिवार्य कच्चा माल है — भारत के इस्पात क्षेत्र की कोकिंग कोल आवश्यकता का लगभग 95% आयात से पूरा होता है। महत्वपूर्ण खनिज का दर्जा मिलने से सरकार अन्वेषण को तेज कर सकेगी, ब्लॉकों के आवंटन को प्राथमिकता दे सकेगी और आयात पर निर्भरता कम कर सकेगी।

राजस्थान के बाड़मेर में कोयले के भंडार हैं और यह अधिसूचना राज्य में खनन निवेश और अन्वेषण के नए अवसर खोलती है।