प्रकाशित: 28 जनवरी 2026PIBअर्थव्यवस्था
कोकिंग कोल MMDR अधिनियम के तहत 'महत्वपूर्ण और रणनीतिक खनिज' घोषित; आत्मनिर्भर भारत को बल
जनवरी 2026 में भारत सरकार ने खान एवं खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1957 के तहत कोकिंग कोल को 'महत्वपूर्ण और सामरिक खनिज' अधिसूचित किया। यह अधिसूचना आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत 2047 के लक्ष्यों के अनुरूप है और कोकिंग कोल को लिथियम, कोबाल्ट और निकेल जैसे अन्य महत्वपूर्ण खनिजों की श्रेणी में लाती है।
कोकिंग कोल इस्पात निर्माण के लिए अनिवार्य कच्चा माल है — भारत के इस्पात क्षेत्र की कोकिंग कोल आवश्यकता का लगभग 95% आयात से पूरा होता है। महत्वपूर्ण खनिज का दर्जा मिलने से सरकार अन्वेषण को तेज कर सकेगी, ब्लॉकों के आवंटन को प्राथमिकता दे सकेगी और आयात पर निर्भरता कम कर सकेगी।
राजस्थान के बाड़मेर में कोयले के भंडार हैं और यह अधिसूचना राज्य में खनन निवेश और अन्वेषण के नए अवसर खोलती है।
0मेन्स दृष्टिकोण
प्रश्न: एमएमडीआर अधिनियम 1957 के तहत कोकिंग कोल को क्रिटिकल एवं स्ट्रैटेजिक मिनरल अधिसूचित करने के भारत के इस्पात क्षेत्र की आत्मनिर्भरता के लिए निहितार्थों का विश्लेषण करें।
उत्तर (50 शब्द):
जनवरी 2026 में भारत ने एमएमडीआर अधिनियम, 1957 के तहत कोकिंग कोल को क्रिटिकल एवं स्ट्रैटेजिक मिनरल अधिसूचित किया और इसे लिथियम, कोबाल्ट एवं निकेल के साथ रखा। चूंकि इस्पात क्षेत्र की कोकिंग कोल आवश्यकता का लगभग 95% आयात से पूरा होता है, यह दर्जा अन्वेषण और प्राथमिकता के आधार पर ब्लॉक आवंटन को तेज़ करेगा तथा इस्पात क्षेत्र की आयात-निर्भरता घटाएगा।
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अभ्यास प्रश्न MCQ
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जुड़ा प्रश्नमध्यम
जनवरी 2026 में कोकिंग कोल को महत्वपूर्ण खनिज घोषित करने वाली अधिसूचना के अनुसार, भारत अपनी कोकिंग कोल आवश्यकता का लगभग कितना प्रतिशत आयात करता है?
व्याख्या · सही उत्तर Bभारत अपनी कोकिंग कोयला आवश्यकता का 85% से अधिक आयात करता है। यह आयात मुख्यतः ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका और रूस से होता है। कोकिंग कोयला इस्पात निर्माण का आवश्यक कच्चा माल है। महत्वपूर्ण खनिज का दर्जा इसी आयात-निर्भरता को घटाने की दिशा में दिया गया है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भारत में कोकिंग कोल को क्रिटिकल और स्ट्रैटेजिक मिनरल कब और किस अधिनियम के तहत घोषित किया गया?
कोकिंग कोल को जनवरी 2026 में खान एवं खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1957 (MMDR अधिनियम) के तहत क्रिटिकल और स्ट्रैटेजिक मिनरल के रूप में अधिसूचित किया गया। इससे घरेलू कोकिंग कोल भंडार के अन्वेषण और विकास में तेजी लाने में मदद मिलेगी।
भारत के इस्पात उद्योग के लिए कोकिंग कोल क्यों महत्वपूर्ण है?
कोकिंग कोल ब्लास्ट फर्नेस से इस्पात बनाने के लिए आवश्यक कच्चा माल है। भारत के इस्पात क्षेत्र की कोकिंग कोल आवश्यकता का लगभग 95% आयात से पूरा होता है, इसलिए घरेलू आपूर्ति ऊर्जा और औद्योगिक सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण सामरिक चिंता है।
भारत के प्रमुख कोकिंग कोल भंडार कहाँ स्थित हैं?
भारत के प्रमुख कोकिंग कोल भंडार झारखंड, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ में स्थित हैं। क्रिटिकल और स्ट्रैटेजिक मिनरल घोषित करने से इन भंडारों की नीलामी और अन्वेषण तेज हो सकेगा।
MMDR अधिनियम के तहत कोकिंग कोल को क्रिटिकल और स्ट्रैटेजिक मिनरल घोषित करने का क्या महत्व है?
MMDR अधिनियम के तहत यह दर्जा मिलने से सरकार त्वरित अन्वेषण, विशेष अन्वेषण लाइसेंस और कोकिंग कोल भंडारों के विकास को प्राथमिकता दे सकती है। इससे घरेलू इस्पात उत्पादन की आपूर्ति श्रृंखला मजबूत होती है और यह आत्मनिर्भर भारत की दृष्टि के अनुरूप है।
कोकिंग कोल का वर्गीकरण भारत के इस्पात क्षेत्र के लक्ष्यों को कैसे आगे बढ़ाता है?
घरेलू खनन से लगभग 95% आयात निर्भरता घटाकर भारत इस्पात उत्पादन लागत कम करना, आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत बनाना और वैश्विक इस्पात निर्माण नेता बनने के लक्ष्य को आगे बढ़ाना चाहता है। यह आत्मनिर्भर भारत की व्यापक औद्योगिक दृष्टि को भी बल देता है।