प्रकाशित: 15 दिसंबर 2025RBI/PIBअर्थव्यवस्था
RBI का 5 अरब डॉलर का USD/INR बाय-सेल स्वैप: विदेशी मुद्रा प्रबंधन और रुपये की स्थिरता
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने 16 दिसम्बर 2025 को समन्वित तरलता प्रबंधन और विदेशी मुद्रा स्थिरीकरण रणनीति के तहत 5 अरब डॉलर का USD/INR बाय-सेल स्वैप किया। यह 3-वर्षीय स्वैप समझौता था, जिसके तहत RBI ने रुपये के बदले बैंकों से अमेरिकी डॉलर खरीदे और भविष्य की एक निश्चित तारीख पर पूर्व निर्धारित दर पर उन्हें वापस बेचने की प्रतिबद्धता जताई।
बाय-सेल स्वैप में RBI आज बैंकों से डॉलर लेता है, जिससे बाजार में डॉलर की आपूर्ति को मजबूती मिलती है, और बदले में रुपये देता है, जिससे बैंकिंग प्रणाली में रुपये की तरलता आती है। स्वैप अवधि (तीन वर्ष) के अंत में लेनदेन उलट जाता है — RBI बैंकों को डॉलर वापस करता है और रुपये प्राप्त करता है।
16 दिसम्बर का स्वैप RBI के व्यापक दिसम्बर 2025 मौद्रिक सहजता पैकेज का पूरक था, जिसमें 1 लाख करोड़ रुपये की OMO खरीद और रेपो दर को 5.25% तक घटाना शामिल था। इन उपायों का उद्देश्य ऋण स्थितियों को आसान बनाना, आर्थिक विकास को सहारा देना और ऐसे समय में रुपये को स्थिर रखना था, जब वैश्विक डॉलर की मजबूती उभरती बाजार मुद्राओं पर दबाव डाल रही थी।
यह स्वैप विदेशी मुद्रा भंडार के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। भारत के विदेशी मुद्रा भंडार 2025 के अंत में दबाव में थे और मुद्रा स्वैप भंडार को सीधे घटाए बिना उन्हें संभालने का एक उपकरण है।
मेन्स दृष्टिकोण
प्रश्न: RBI के दिसंबर 2025 बाय-सेल स्वैप की कार्यप्रणाली और तरलता तथा विदेशी मुद्रा प्रबंधन में उसकी भूमिका की व्याख्या कीजिए।
उत्तर (50 शब्द):
16 दिसंबर 2025 को भारतीय रिज़र्व बैंक ने 5 अरब डॉलर का तीन-वर्षीय यूएसडी/आईएनआर बाय-सेल स्वैप किया। इसमें बैंकों से तत्काल डॉलर लेकर रुपये की तरलता उपलब्ध कराई गई और परिपक्वता पर लेन-देन उलट जाएगा। यह दिसंबर 2025 के 1 लाख करोड़ खुले बाज़ार परिचालन और 5.25 प्रतिशत रेपो कटौती का पूरक रहा तथा भंडार को स्थिर रखने में सहायक बना।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
USD/INR बाय-सेल स्वैप क्या है?
बाय-सेल स्वैप में RBI अभी बैंकों से अमेरिकी डॉलर खरीदता है (बदले में रुपये देता है) और एक निश्चित अवधि (जैसे 3 वर्ष) बाद उन डॉलरों को वापस बेचने की प्रतिबद्धता जताता है। इससे एक साथ रुपये की तरलता बढ़ती है और रुपये की विनिमय दर को सहारा मिलता है।
RBI का 16 दिसम्बर 2025 का स्वैप कितने का था और किस अवधि का?
RBI ने 16 दिसम्बर 2025 को 3 वर्ष की अवधि वाला 5 अरब डॉलर का USD/INR बाय-सेल स्वैप किया।
USD/INR स्वैप विदेशी मुद्रा भंडार को कैसे सहारा देता है?
स्वैप से RBI भारत के विदेशी मुद्रा भंडार को सीधे घटाए बिना रुपये की तरलता और विदेशी मुद्रा बाजारों को सहारा दे सकता है, क्योंकि डॉलर अस्थायी रूप से स्वैप के तहत उधार लिए जाते हैं।
स्वैप RBI के दिसम्बर 2025 के अन्य उपायों का किस प्रकार पूरक है?
5 अरब डॉलर का स्वैप 1 लाख करोड़ रुपये के OMO और 5.25% रेपो दर कटौती का पूरक था। ये तीनों मिलकर दर, तरलता और विदेशी मुद्रा स्थिरता पर एक साथ काम करने वाली तीन-आयामी नरमी रणनीति बनाते हैं।
क्या RBI ने पहले भी USD/INR स्वैप का इस्तेमाल किया है?
हां, RBI ने पहले भी USD/INR बाय-सेल स्वैप का इस्तेमाल किया है। इसका सबसे उल्लेखनीय उदाहरण मार्च 2019 का है, जब उसने तरलता प्रबंधन ढांचे के तहत 5 अरब डॉलर का स्वैप किया था।