केन्द्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) ने ब्रह्मपुत्र बेसिन की जलविद्युत परियोजनाओं से विद्युत निकासी की मास्टर योजना जारी की, जिसमें 2047 तक 76 GW क्षमता (208 पारंपरिक जलविद्युत परियोजनाओं से 64.9 GW + पंप्ड स्टोरेज संयंत्रों से 11.1 GW) का लक्ष्य है। कुल निवेश ₹6.4 लाख करोड़ ($77 अरब): चरण-1 (2035 तक) ₹1.91 लाख करोड़ तथा चरण-2 ₹4.52 लाख करोड़। यह योजना अरुणाचल प्रदेश, असम, सिक्किम, मेघालय, मिज़ोरम, मणिपुर, नागालैंड एवं पश्चिम बंगाल के 12 उप-बेसिनों को शामिल करती है तथा 31,397 सर्किट-किलोमीटर की नई पारेषण लाइनें बिछाने की परिकल्पना करती है। रणनीतिक दृष्टि से यह योजना यारलुंग जांगबो (ऊपरी ब्रह्मपुत्र) पर चीन के 60 GW महापरियोजना सहित अन्य बाँध निर्माण का जवाब है।
भारत ने ब्रह्मपुत्र बेसिन के लिए ₹6.4 लाख करोड़ की जलविद्युत पारेषण मास्टर योजना प्रस्तुत की
केन्द्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) ने ब्रह्मपुत्र बेसिन की जलविद्युत परियोजनाओं से विद्युत निकासी की मास्टर योजना जारी की, जिसमें 2047 तक 76 GW क्षमता (208 पारंपरिक जलविद्युत परियोजनाओं से 64.9 GW + पंप्ड स्टोरेज संयंत्रों से 11.1 GW) का लक्ष्य है। कुल निवेश ₹6.4 लाख करोड़ ($77 अरब): चरण-1 (2035 तक) ₹1.91 लाख करोड़ तथा चरण-2 ₹4.52 लाख करोड़। यह योजना अरुणाचल प्रदेश, असम, सिक्किम, मेघालय, मिज़ोरम, मणिपुर, नागालैंड एवं पश्चिम बंगाल के 12 उप-बेसिनों को शामिल करती है तथा 31,397 सर्किट-किलोमीटर की नई पारेषण लाइनें बिछाने की परिकल्पना करती है। रणनीतिक दृष्टि से यह योजना यारलुंग जांगबो (ऊपरी ब्रह्मपुत्र) पर चीन के 60 GW महापरियोजना सहित अन्य बाँध निर्माण का जवाब है।
मुख्य तथ्य
- CEA ने 2047 तक ब्रह्मपुत्र बेसिन में 76 GW जलविद्युत क्षमता की मास्टर योजना जारी की।
- कुल निवेश दो चरणों में ₹6.4 लाख करोड़ ($77 अरब) है।
- चरण 1 (2035 तक) में ₹1.91 लाख करोड़ और चरण 2 में ₹4.52 लाख करोड़ की आवश्यकता है।
- योजना में आठ पूर्वोत्तर एवं पूर्वी राज्यों के 12 उप-बेसिन शामिल हैं।
- योजना के तहत 31,397 सर्किट-किमी नई पारेषण लाइनें बिछाने की परिकल्पना है।
- यह योजना ऊपरी ब्रह्मपुत्र पर चीन के 60 GW महाबांध का रणनीतिक जवाब है।
6-अक्ष वर्गीकरण
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भारत की CEA ब्रह्मपुत्र बेसिन मास्टर प्लान पर चर्चा यारलुंग जांगबो पर ऊपरी धारा में बांध निर्माण के संदर्भ में किस देश से जुड़ी है?
सही उत्तर चीन है। यारलुंग जांगबो भारत में सियांग/ब्रह्मपुत्र के रूप में प्रवेश करती है, इसलिए इस नदी पर चीन की ऊपरी धारा वाली जलविद्युत योजनाएं भारत की ब्रह्मपुत्र बेसिन योजना के लिए महत्वपूर्ण रणनीतिक संदर्भ बनती हैं। CEA से जुड़ी योजना उत्तर-पूर्व के कई ब्रह्मपुत्र उप-बेसिनों से जलविद्युत निकासी पर केंद्रित है।
स्रोत: समाचार स्रोत
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
ब्रह्मपुत्र बेसिन जलविद्युत पारेषण मास्टर योजना किस प्राधिकरण ने जारी की और इसका कुल निवेश कितना है?
केन्द्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) ने ब्रह्मपुत्र बेसिन की जलविद्युत परियोजनाओं से विद्युत निकासी की मास्टर योजना जारी की। कुल निवेश 2047 तक दो चरणों में ₹6.4 लाख करोड़ ($77 अरब) है।
ब्रह्मपुत्र बेसिन मास्टर योजना के तहत 2047 तक कुल कितनी जलविद्युत क्षमता का लक्ष्य है?
योजना में 2047 तक 76 GW जलविद्युत क्षमता का लक्ष्य है — 208 पारंपरिक परियोजनाओं से 64.9 GW और पंप्ड स्टोरेज संयंत्रों से 11.1 GW। इसके दायरे में आठ पूर्वोत्तर एवं पूर्वी राज्यों के 12 उप-बेसिन आते हैं।
ब्रह्मपुत्र बेसिन मास्टर योजना के दो चरण और उनके निवेश क्या हैं?
चरण 1 (2035 तक) में ₹1.91 लाख करोड़ और चरण 2 में ₹4.52 लाख करोड़ का निवेश आवश्यक है। योजना के तहत 31,397 सर्किट-किमी नई पारेषण लाइनें बिछाने की भी परिकल्पना है।
भारत की ब्रह्मपुत्र बेसिन जलविद्युत योजना चीन की बांध गतिविधियों का रणनीतिक जवाब कैसे है?
यह मास्टर योजना तिब्बत में यारलुंग त्संगपो (ब्रह्मपुत्र) के ऊपरी हिस्से पर चीन के प्रस्तावित 60 GW महाबांध का रणनीतिक जवाब है। अपना जलविद्युत अवसंरचना पहले विकसित कर भारत जल अधिकार और क्षेत्रीय ऊर्जा सुरक्षा में अपनी स्थिति मजबूत करना चाहता है।
CEA की ब्रह्मपुत्र बेसिन मास्टर योजना में कौन से राज्य शामिल हैं?
योजना में आठ पूर्वोत्तर एवं पूर्वी राज्य शामिल हैं: अरुणाचल प्रदेश, असम, सिक्किम, मेघालय, मिज़ोरम, मणिपुर, नागालैंड और पश्चिम बंगाल। मास्टर योजना के 12 उप-बेसिन सामूहिक रूप से इन्हीं राज्यों में आते हैं।
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