एस एंड पी ग्लोबल रेटिंग्स ने 14 अगस्त 2025 को भारत की दीर्घकालिक सॉवरेन क्रेडिट रेटिंग बीबीबी- से बढ़ाकर बीबीबी कर दी और आउटलुक स्थिर रखा। इसी फैसले में अल्पकालिक रेटिंग ए-3 से ए-2 की गई। यह एस एंड पी की ओर से भारत का 18 वर्षों में पहला सॉवरेन अपग्रेड था; पिछला अपग्रेड 2007 में हुआ था, जब भारत बीबीबी- पर निवेश ग्रेड में आया था।

इस अपग्रेड का आधार भारत की आर्थिक मजबूती, राजकोषीय समेकन, सार्वजनिक खर्च की बेहतर गुणवत्ता, खासकर कैपेक्स और इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च, तथा मजबूत कॉरपोरेट, वित्तीय और बाहरी बैलेंस शीट रहा। एस एंड पी ने नीति-निरंतरता, लोकतांत्रिक संस्थाओं से मिलने वाली स्थिरता, भरोसेमंद मुद्रास्फीति प्रबंधन और घरेलू पूंजी बाजारों के विकास को भी सकारात्मक माना। सितंबर 2025 में भारत की मुद्रास्फीति 1.54% तक गिरना इसी व्यापक आर्थिक तस्वीर का हिस्सा है। वर्ष के दौरान रेपो दर 6.5% से घटकर 5.5% हुई, जिससे मौद्रिक वातावरण अपेक्षाकृत सहायक दिखा।

प्रीलिम्स में रेटिंग स्तर, आउटलुक, 18 वर्षों का अंतर, ए-2/ए-3 जैसी अल्पकालिक रेटिंग और 8.8% औसत वास्तविक GDP वृद्धि जैसे तथ्य पूछे जा सकते हैं। मुख्य परीक्षा में इसे भारत की व्यापक आर्थिक स्थिरता, पूंजी बाजारों में भरोसा, उधारी लागत और सार्वजनिक निवेश की गुणवत्ता से जोड़कर लिखा जा सकता है। बीबीबी निवेश ग्रेड के भीतर बेहतर स्थिति दिखाता है, इसलिए इसका संकेत केवल सरकारी उधारी तक सीमित नहीं रहता; यह कंपनियों, निवेशकों और बाहरी वित्तीय धारणा पर भी असर डाल सकता है।