बाजार पहुंच सहायता योजना भारत के निर्यात प्रोत्साहन ढांचे में MSME और पहली बार निर्यात करने वालों पर केंद्रित नई पहल है। सरकार ने इसे वित्त वर्ष 2026-31 के लिए ₹4,531 करोड़ के परिव्यय के साथ शुरू किया है। यह नवंबर 2025 में मंजूर ₹25,060 करोड़ के निर्यात प्रोत्साहन मिशन का पहला घटक है, इसलिए परीक्षा की दृष्टि से इसे केवल एक योजना नहीं, बल्कि व्यापक निर्यात-नीति पैकेज के हिस्से के रूप में पढ़ना चाहिए।

योजना का क्रियान्वयन वाणिज्य विभाग, MSME मंत्रालय और वित्त मंत्रालय संयुक्त रूप से करेंगे। इससे शासन के स्तर पर अंतर-मंत्रालयी समन्वय और छोटे उद्यमों की बाजार पहुंच जैसे विषय जुड़ते हैं। योजना व्यापार मेलों, प्रदर्शनियों, खरीदार-विक्रेता बैठकों, भारत में रिवर्स खरीदार-विक्रेता बैठकों और उभरते बाजारों में व्यापार प्रतिनिधिमंडलों के लिए सहायता देती है। सभी समर्थित गतिविधियों में न्यूनतम 35% MSME भागीदारी अनिवार्य रखी गई है। वित्तीय सहायता खरीदार-विक्रेता बैठक के लिए ₹5 करोड़ और रिवर्स खरीदार-विक्रेता बैठक के लिए ₹10 करोड़ तक सीमित है।

निर्यात प्रोत्साहन और MSME सहायता को समझते समय व्यापार मेलों, प्रदर्शनियों और खरीदार-विक्रेता बैठकों जैसे बाजार पहुंच साधनों की भूमिका भी याद रखनी चाहिए। योजना में कृषि, चमड़ा, हथकरघा और खिलौना जैसे प्राथमिकता क्षेत्र शामिल हैं। मुख्य परीक्षा में इससे निर्यात-नीति, पहली बार निर्यात करने वालों और MSME की वैश्विक बाजार तक पहुंच तथा सरकारी सहायता की लक्षित डिजाइन पर प्रश्न बन सकते हैं। प्रारंभिक परीक्षा में परिव्यय, अवधि, मिशन से संबंध, क्रियान्वयन मंत्रालय, 35% भागीदारी नियम और प्रति आयोजन सहायता सीमा सीधे पूछे जा सकने वाले तथ्य हैं।