प्रकाशित: 3 जनवरी 2026अर्थव्यवस्था
निर्यात प्रोत्साहन के लिए ₹4,531 करोड़ की बाजार पहुंच सहायता योजना शुरू
बाजार पहुंच सहायता योजना भारत के निर्यात प्रोत्साहन ढांचे में MSME और पहली बार निर्यात करने वालों पर केंद्रित नई पहल है। सरकार ने इसे वित्त वर्ष 2026-31 के लिए ₹4,531 करोड़ के परिव्यय के साथ शुरू किया है। यह नवंबर 2025 में मंजूर ₹25,060 करोड़ के निर्यात प्रोत्साहन मिशन का पहला घटक है, इसलिए परीक्षा की दृष्टि से इसे केवल एक योजना नहीं, बल्कि व्यापक निर्यात-नीति पैकेज के हिस्से के रूप में पढ़ना चाहिए।
योजना का क्रियान्वयन वाणिज्य विभाग, MSME मंत्रालय और वित्त मंत्रालय संयुक्त रूप से करेंगे। इससे शासन के स्तर पर अंतर-मंत्रालयी समन्वय और छोटे उद्यमों की बाजार पहुंच जैसे विषय जुड़ते हैं। योजना व्यापार मेलों, प्रदर्शनियों, खरीदार-विक्रेता बैठकों, भारत में रिवर्स खरीदार-विक्रेता बैठकों और उभरते बाजारों में व्यापार प्रतिनिधिमंडलों के लिए सहायता देती है। सभी समर्थित गतिविधियों में न्यूनतम 35% MSME भागीदारी अनिवार्य रखी गई है। वित्तीय सहायता खरीदार-विक्रेता बैठक के लिए ₹5 करोड़ और रिवर्स खरीदार-विक्रेता बैठक के लिए ₹10 करोड़ तक सीमित है।
निर्यात प्रोत्साहन और MSME सहायता को समझते समय व्यापार मेलों, प्रदर्शनियों और खरीदार-विक्रेता बैठकों जैसे बाजार पहुंच साधनों की भूमिका भी याद रखनी चाहिए। योजना में कृषि, चमड़ा, हथकरघा और खिलौना जैसे प्राथमिकता क्षेत्र शामिल हैं। मुख्य परीक्षा में इससे निर्यात-नीति, पहली बार निर्यात करने वालों और MSME की वैश्विक बाजार तक पहुंच तथा सरकारी सहायता की लक्षित डिजाइन पर प्रश्न बन सकते हैं। प्रारंभिक परीक्षा में परिव्यय, अवधि, मिशन से संबंध, क्रियान्वयन मंत्रालय, 35% भागीदारी नियम और प्रति आयोजन सहायता सीमा सीधे पूछे जा सकने वाले तथ्य हैं।
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जुड़ा प्रश्नमध्यम
बाजार पहुँच समर्थन (एमएएस) योजना के अंतर्गत, क्रेता-विक्रेता बैठकों में एमएसएमई की न्यूनतम अनिवार्य भागीदारी कितनी है?
व्याख्या · सही उत्तर Bलेख के अनुसार एमएएस योजना में क्रेता-विक्रेता बैठकों और संबंधित कार्यक्रमों में न्यूनतम 35% एमएसएमई भागीदारी अनिवार्य है। इससे स्पष्ट होता है कि योजना का जोर एमएसएमई और पहली बार निर्यात करने वाले उद्यमों पर है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
बाजार पहुंच सहायता योजना क्या है?
बाजार पहुंच सहायता योजना निर्यात प्रोत्साहन से जुड़ी पहल है, जिसे सरकार ने वित्त वर्ष 2026-31 के लिए ₹4,531 करोड़ के परिव्यय के साथ शुरू किया है। यह MSME और पहली बार निर्यात करने वालों की वैश्विक बाजार तक पहुंच बढ़ाने पर केंद्रित है।
यह योजना निर्यात प्रोत्साहन मिशन से कैसे जुड़ी है?
यह नवंबर 2025 में मंजूर ₹25,060 करोड़ के निर्यात प्रोत्साहन मिशन का पहला घटक है। इसलिए इसे व्यापक निर्यात-नीति पैकेज के हिस्से के रूप में पढ़ना चाहिए।
योजना के तहत किन गतिविधियों को सहायता मिलती है?
योजना व्यापार मेलों, प्रदर्शनियों, खरीदार-विक्रेता बैठकों, भारत में रिवर्स खरीदार-विक्रेता बैठकों और उभरते बाजारों में व्यापार प्रतिनिधिमंडलों के लिए सहायता देती है।
MSME भागीदारी और वित्तीय सहायता की मुख्य शर्तें क्या हैं?
सहायता प्राप्त गतिविधियों में न्यूनतम 35% MSME भागीदारी अनिवार्य है। वित्तीय सहायता खरीदार-विक्रेता बैठक के लिए ₹5 करोड़ और रिवर्स खरीदार-विक्रेता बैठक के लिए ₹10 करोड़ तक सीमित है।
परीक्षा की दृष्टि से कौन से तथ्य याद रखने चाहिए?
₹4,531 करोड़ का परिव्यय, वित्त वर्ष 2026-31 की अवधि, नवंबर 2025 में मंजूर ₹25,060 करोड़ के निर्यात प्रोत्साहन मिशन से संबंध, वाणिज्य विभाग-MSME मंत्रालय-वित्त मंत्रालय की भूमिका, 35% MSME भागीदारी और आयोजन-वार सहायता सीमा प्रमुख तथ्य हैं।