प्रेस सूचना ब्यूरो ने 19 जुलाई 2026 को जारी पृष्ठभूमि लेख में वर्षा की हर बूंद बचाने की राष्ट्रीय अपील दोहराई। 28 जून 2026 को प्रसारित ‘मन की बात’ की 135वीं कड़ी में प्रधानमंत्री ने देशवासियों से जल संरक्षण अभियान को लगातार गति देने का आह्वान किया था। इसके बाद 4 जुलाई से 4 अगस्त 2026 तक देशव्यापी अभियान चलाया गया। इसका उद्देश्य वर्षा जल का भंडारण, भूजल पुनर्भरण, पारंपरिक जल स्रोतों की बहाली, वृक्षारोपण और जनभागीदारी को बढ़ावा देना था।

अभियान में स्थानीय स्तर पर सीधे किए जा सकने वाले काम बताए गए हैं। घरों, सोसायटियों और कार्यस्थलों में वर्षा जल संचयन प्रणाली लगाई जा सकती है। उपयुक्त जगहों पर पुनर्भरण गड्ढे और शाफ्ट बनाए जा सकते हैं तथा बेकार पड़े बोरवेलों की मरम्मत करके उनका उपयोग भूजल पुनर्भरण में किया जा सकता है। बावड़ियों, कुओं और दूसरे पारंपरिक स्रोतों को फिर उपयोग लायक बनाया जा सकता है। तालाबों और जलाशयों से गाद हटाने पर उनकी जलधारण क्षमता बढ़ती है, जबकि जल संरक्षण क्षेत्रों में वृक्षारोपण से हरित आवरण बढ़ता है।

1 जून 2026 को शुरू हुआ ‘जल संचय जन भागीदारी: कैच द रेन’ अभियान, जल संचय जन भागीदारी का दायरा बढ़ाता है और उसे ‘जल शक्ति अभियान: कैच द रेन’ से जोड़ता है। इसमें कम लागत वाले, स्थानीय परिस्थितियों के अनुकूल उपायों और केंद्र व राज्य की योजनाओं के तालमेल पर जोर है। पंचायती राज संस्थाएं, शहरी स्थानीय निकाय, महिला समूह, युवा, शिक्षण संस्थान, नागरिक संगठन और स्थानीय समुदाय इसकी जनभागीदारी का आधार हैं।

पहले के चरणों के नतीजे भी उल्लेखनीय रहे। जल संचय जन भागीदारी 1.0 में कम-से-कम 10 लाख के लक्ष्य के मुकाबले 27 लाख से अधिक कृत्रिम भूजल पुनर्भरण संरचनाएं बनीं। 2.0 में 31 मई 2026 तक कम-से-कम 1 करोड़ के लक्ष्य के मुकाबले 1.5 करोड़ से अधिक संरचनाओं की सूचना मिली; उनका भौतिक सत्यापन और मैदानी प्रमाणीकरण जारी था।