भारत मौसम विज्ञान विभाग ने 12 मई 2026 को नई दिल्ली में देश का पहला कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित ब्लॉक स्तरीय मानसून आगमन पूर्वानुमान मॉडल जारी किया। यह परिचालन मानसून पूर्वानुमान को जिला स्तर से उप-जिला स्तर तक ले जाने की दिशा में बड़ी प्रगति है। भारतीय उष्णदेशीय मौसम विज्ञान संस्थान पुणे और राष्ट्रीय मध्यम अवधि मौसम पूर्वानुमान केंद्र नोएडा के सहयोग से विकसित यह प्रणाली अभी 15 राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश के 3,196 ब्लॉकों को शामिल करती है। ये मुख्यतः वर्षा-आधारित क्षेत्र हैं, जहाँ बुवाई से जुड़े निर्णयों के लिए मानसून आगमन का समय अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। यह मॉडल मौजूदा संख्यात्मक मौसम पूर्वानुमान प्रणालियों के परिणामों को IMD के ऐतिहासिक डेटा संग्रह पर प्रशिक्षित मशीन लर्निंग से जोड़ता है और प्रत्येक बुधवार को चार सप्ताह पहले तक का संभाव्य पूर्वानुमान लगभग चार दिन की त्रुटि सीमा के साथ देता है। परिणाम कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा डिज़ाइन किए गए एप्लिकेशन प्रोग्रामिंग इंटरफेस से किसानों के साथ साझा किए जाएंगे और डिजिटल कृषि मिशन को संचालित करने वाले एग्री स्टैक प्लेटफ़ॉर्म पर भेजे जाएंगे। भारत का लगभग 52 प्रतिशत कृषि क्षेत्र वर्षा-आधारित है, इसलिए ब्लॉक स्तरीय अग्रिम सूचना से फसल किस्म के चयन, उर्वरक कार्यक्रम, पीएमएफबीवाई के अंतर्गत फसल बीमा नामांकन और श्रमिक योजना में सुधार की उम्मीद है। IMD ने स्पष्ट किया कि यह नया उपकरण मौसमी दीर्घ अवधि पूर्वानुमान से स्वतंत्र है, जिसमें वर्तमान में 2026 दक्षिण-पश्चिम मानसून को दीर्घावधि औसत के लगभग 92 प्रतिशत पर अनुमानित किया गया है। आगामी सत्रों में कवरेज को क्रमिक रूप से अतिरिक्त राज्यों तक बढ़ाया जाएगा।
भारत मौसम विज्ञान विभाग ने 12 मई 2026 को देश का पहला कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित ब्लॉक स्तरीय मॉडल जारी किया, जो मानसून के आगमन का पूर्वानुमान लगाता है। इसमें 15 राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश के 3,196 ब्लॉक शामिल हैं तथा यह चार सप्ताह पहले सूचना और चार दिन की त्रुटि सीमा देता है
IMD ने 12 मई 2026 को भारत का पहला कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित मॉडल जारी किया, जो ब्लॉक स्तर पर मानसून के आगमन का पूर्वानुमान देता है। यह 15 राज्यों एवं एक केंद्र शासित प्रदेश के 3,196 ब्लॉकों को चार सप्ताह पहले सूचना देता है, इसमें चार दिन की त्रुटि हो सकती है और एग्री स्टैक एपीआई से वर्षा-आधारित बुवाई निर्णयों में मदद करेगा।
मुख्य तथ्य
- IMD ने 12 मई 2026 को नई दिल्ली में भारत का पहला कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित मॉडल जारी किया, जो ब्लॉक स्तर पर मानसून के आगमन का पूर्वानुमान देता है।
- यह प्रणाली 15 राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश के 3,196 ब्लॉकों पर लागू है, जो मुख्यतः वर्षा पर निर्भर क्षेत्रों में आते हैं।
- इसका विकास भारतीय उष्णदेशीय मौसम विज्ञान संस्थान पुणे एवं राष्ट्रीय मध्यम अवधि मौसम पूर्वानुमान केंद्र नोएडा के सहयोग से किया गया।
- पूर्वानुमान प्रत्येक बुधवार को चार सप्ताह तक के लिए लगभग चार दिन की त्रुटि सीमा के साथ जारी किए जाते हैं।
- परिणाम कृषि मंत्रालय के एपीआई और डिजिटल कृषि मिशन के एग्री स्टैक प्लेटफ़ॉर्म से किसानों तक पहुँचाए जाएंगे।
- भारत का लगभग 52 प्रतिशत कृषि क्षेत्र वर्षा पर निर्भर है, तथा 2026 मानसून के दीर्घावधि औसत का 92 प्रतिशत रहने का अनुमान है।
6-अक्ष वर्गीकरण
यह टॉपिक में दिखता है
अभ्यास प्रश्न MCQ
हल करेंनीचे विकल्प चुनें। सही या गलत संकेत तुरंत दिखेगा।
भारत मौसम विज्ञान विभाग द्वारा 12 मई 2026 को शुरू किए गए कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित ब्लॉक स्तरीय मानसून आगमन पूर्वानुमान मॉडल में कितने ब्लॉक शामिल किए गए हैं?
आईएमडी ने 12 मई 2026 को कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित ब्लॉक स्तरीय मानसून आगमन मॉडल जारी किया, जिसमें 15 राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश के 3,196 ब्लॉक शामिल हैं। यह मॉडल चार सप्ताह तक का साप्ताहिक संभाव्य पूर्वानुमान लगभग चार दिन की त्रुटि सीमा के साथ देता है।
स्रोत: समाचार स्रोत
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भारत मौसम विज्ञान विभाग ने 12 मई 2026 को कौन सी नई प्रणाली शुरू की?
IMD ने देश का पहला कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित ब्लॉक स्तरीय मानसून आगमन पूर्वानुमान मॉडल जारी किया। यह मॉडल मानसून के आगमन का संभाव्य पूर्वानुमान चार सप्ताह पहले तक, लगभग चार दिन की त्रुटि सीमा के साथ देता है।
नया IMD मॉडल वर्तमान में कितने ब्लॉकों एवं राज्यों को शामिल करता है?
यह प्रणाली 15 राज्यों एवं एक केंद्र शासित प्रदेश के 3,196 ब्लॉकों को शामिल करती है। ये ब्लॉक अधिकतर वर्षा-आधारित क्षेत्रों में हैं तथा खरीफ बुवाई के लिए महत्वपूर्ण हैं।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता मानसून मॉडल विकसित करने में IMD के साथ कौन सी संस्थाओं ने भागीदारी की?
इसे भारतीय उष्णदेशीय मौसम विज्ञान संस्थान पुणे तथा राष्ट्रीय मध्यम अवधि मौसम पूर्वानुमान केंद्र नोएडा के सहयोग से और कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के परामर्श से विकसित किया गया।
ब्लॉक स्तरीय पूर्वानुमान किसानों तक कैसे पहुँचेंगे?
पूर्वानुमान के परिणाम कृषि मंत्रालय के एप्लिकेशन प्रोग्रामिंग इंटरफेस से किसानों तक पहुँचाए जाएंगे और डिजिटल कृषि मिशन के एग्री स्टैक प्लेटफ़ॉर्म से जोड़े जाएंगे।
क्या यह उपयोगी था?
सुधार या छूटा परीक्षा दृष्टिकोण संपादकीय टीम को भेजें।
प्रतिक्रिया भेजें