फरवरी 2026 में गृह मंत्रालय (MHA) ने भारत की पहली व्यापक राष्ट्रीय आतंकवाद-रोधी नीति और रणनीति 'प्रहार' जारी की। यह नीति प्रतिक्रियात्मक सुरक्षा रुख से आगे बढ़कर सक्रिय और खुफिया-आधारित रणनीति अपनाने की दिशा में बड़ा बदलाव है। इसमें सरकार के सभी अंगों और समाज की भागीदारी पर आधारित दृष्टिकोण की रूपरेखा दी गई है।

प्रहार सात स्तंभों पर आधारित है: आतंकी हमलों की रोकथाम, खतरे के अनुरूप त्वरित प्रतिक्रिया, सरकार के सभी अंगों के समन्वय से आंतरिक क्षमताओं का एकत्रीकरण, मानवाधिकार और विधि-शासन आधारित प्रक्रियाएँ, आतंकवाद को बढ़ावा देने वाली स्थितियों और कट्टरपंथीकरण में कमी, अंतरराष्ट्रीय प्रयासों का समन्वय, तथा समाज की भागीदारी से पुनर्प्राप्ति और लचीलापन। यह ड्रोन, एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप, डार्क वेब और क्रिप्टोकरेंसी आधारित आतंकी वित्तपोषण जैसे आधुनिक खतरों से निपटती है। नीति भारतीय कानून के तहत आतंकी वित्तपोषण नेटवर्क को तोड़ने तथा सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी के आतंकी दुरुपयोग के विरुद्ध तकनीकी निवेश और निजी साझेदारियों के ज़रिए निरंतर कार्रवाई पर बल देती है।

संस्थागत रूप से, प्रहार केंद्रीय और राज्य एजेंसियों के बीच रियल-टाइम खुफिया साझाकरण के लिए खुफिया ब्यूरो के अंतर्गत बहु-एजेंसी केंद्र (MAC) और संयुक्त खुफिया कार्यबल (JTFI) पर निर्भर है। राजस्थान के लिए, जिसकी सीमा पाकिस्तान से 1,070 किमी तक लगती है, प्रहार के सीमा सुरक्षा खुफिया, कट्टरपंथीकरण में कमी और अंतर-एजेंसी समन्वय से जुड़े प्रावधान सीधे प्रासंगिक हैं।