राजस्थान पर्यटन विभाग ने राजस्थान पर्यटन नीति 2025 के हिस्से के रूप में 'पर्यटन स्थल गोद लो' पहल शुरू की, जिसमें निजी भागीदारों, स्थानीय समुदायों और पर्यटन हितधारकों को विरासत और इको-पर्यटन स्थलों के पुनर्स्थापन, प्रबंधन और संचालन के लिए आमंत्रित किया गया है। इस पहल का उद्देश्य राजस्थान के पर्यटन तंत्र को आधुनिक बनाना है। राजस्थान भारत के प्रमुख पर्यटन गंतव्यों में से एक है; पर्यटन क्षेत्र में 1.37 लाख करोड़ रुपये से अधिक के प्रस्तावित निवेश वाले समझौता ज्ञापन किए गए हैं। इस PPP (सार्वजनिक-निजी भागीदारी) मॉडल से प्राचीन स्मारकों, किलों, बावड़ियों, धार्मिक स्थलों, जल निकायों और इको-रिजर्व में बेहतर बुनियादी ढाँचा, डिजिटल अनुभव और टिकाऊ संचालन सुनिश्चित करने के लिए निजी भागीदारी ली जाएगी। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में यह पहल UNEP (संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम) के सतत पर्यटन सिद्धांतों और भारत सरकार की 'देखो अपना देश' और 'अतुल्य भारत' अभियानों के अनुरूप है। विरासत संरक्षण के लिए UNESCO के सुझावों के अनुरूप PPP मॉडल का उपयोग — जैसे जयपुर (2019 में विश्व विरासत शहर घोषित) का प्रबंधन — RPSC RAS परीक्षा के लिए अत्यंत प्रासंगिक विषय है।
राजस्थान पर्यटन नीति 2025: 'पर्यटन स्थल गोद लो' पहल — निजी भागीदारी से विरासत और इको-पर्यटन का आधुनिकीकरण
राजस्थान पर्यटन विभाग ने राजस्थान पर्यटन नीति 2025 के तहत 'पर्यटन स्थल गोद लो' पहल शुरू की है। इसमें निजी कंपनियों, स्थानीय समुदायों और पर्यटन हितधारकों को विरासत और इको-पर्यटन स्थलों के संरक्षण, प्रबंधन और संचालन के लिए आमंत्रित किया गया है। इस पहल का उद्देश्य राजस्थान के पर्यटन पारिस्थितिकी तंत्र को आधुनिक बनाना है। राजस्थान भारत के प्रमुख पर्यटन गंतव्यों में से एक है; पर्यटन क्षेत्र में 1.37 लाख करोड़ रुपये से अधिक के प्रस्तावित निवेश वाले समझौता ज्ञापन किए गए हैं। इस PPP (सार्वजनिक-निजी भागीदारी) मॉडल से प्राचीन स्मारकों, किलों, बावड़ियों, धार्मिक स्थलों, जल निकायों और इको-रिजर्व में बेहतर बुनियादी ढाँचे, डिजिटल अनुभव और सतत संचालन के लिए निजी भागीदारी लाई जाएगी। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में यह पहल UNEP (संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम) के सतत पर्यटन सिद्धांतों और भारत सरकार के 'देखो अपना देश' तथा 'अतुल्य भारत' अभियानों के अनुरूप है। विरासत संरक्षण में UNESCO के सुझावों के साथ PPP मॉडल का उपयोग, जैसे जयपुर का प्रबंधन जिसे 2019 में विश्व विरासत शहर घोषित किया गया, RPSC RAS परीक्षा के लिए अत्यंत प्रासंगिक विषय है।
मुख्य तथ्य
- राजस्थान पर्यटन नीति 2025 ने विरासत और इको-पर्यटन के लिए 'पर्यटन स्थल गोद लो' PPP पहल शुरू की।
- निजी भागीदारों और समुदायों को चयनित पर्यटन स्थलों के पुनरुद्धार और प्रबंधन के लिए आमंत्रित किया गया।
- राजस्थान ने 2024-25 में लगभग 1.35 लाख करोड़ रुपये का पर्यटन राजस्व अर्जित किया।
- UNESCO विश्व विरासत स्थल, बूंदी-आभानेरी की बावड़ियाँ और रणथंभौर उन स्थलों में शामिल हैं जिन्हें इस पहल के लिए चुना गया है।
- जयपुर को 2019 में UNESCO विश्व विरासत शहर घोषित किया गया था।
- यह पहल UNEP सतत पर्यटन सिद्धांतों और 'देखो अपना देश' अभियान के अनुरूप है।
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राजस्थान पर्यटन नीति 2025 के तहत 'पर्यटन स्थल गोद लो' पहल के बारे में कौन-सा कथन सही है?
'पर्यटन स्थल गोद लो' पहल राजस्थान पर्यटन नीति 2025 से जुड़ी है। इसका उद्देश्य निजी संस्थाओं, स्थानीय समुदायों और पर्यटन हितधारकों की भागीदारी से विरासत और इको-पर्यटन स्थलों पर सुविधाओं, रखरखाव और प्रबंधन को बेहतर बनाना है। बाकी विकल्प इसके स्तर, वर्ष, क्षेत्र या भौगोलिक दायरे को गलत बताते हैं।
स्रोत: समाचार स्रोत
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
राजस्थान पर्यटन नीति 2025 के तहत 'पर्यटन स्थल गोद लो' पहल क्या है?
'पर्यटन स्थल गोद लो' राजस्थान पर्यटन नीति 2025 के तहत एक PPP (सार्वजनिक-निजी भागीदारी) योजना है। इसके अंतर्गत निजी संस्थाओं, स्थानीय समुदायों और पर्यटन हितधारकों को राज्य में विरासत और इको-पर्यटन स्थलों को पुनर्स्थापित करने, उनका प्रबंधन करने और उन्हें संचालित करने के लिए आमंत्रित किया जाता है।
राजस्थान ने 2024-25 में कितना पर्यटन राजस्व अर्जित किया?
राजस्थान ने 2024-25 में लगभग 1.35 लाख करोड़ रुपये का पर्यटन राजस्व अर्जित किया, जिससे यह भारत के प्रमुख पर्यटन गंतव्यों में से एक बन गया।
'पर्यटन स्थल गोद लो' पहल के तहत राजस्थान के प्रमुख लक्षित स्थल कौन से हैं?
प्रमुख लक्षित स्थलों में UNESCO विश्व विरासत स्थल, बूंदी और आभानेरी की बावड़ियाँ तथा रणथंभौर राष्ट्रीय उद्यान शामिल हैं। 2019 में UNESCO विश्व विरासत शहर घोषित जयपुर भी इसी पर्यटन तंत्र का हिस्सा है।
राजस्थान पर्यटन नीति 2025 किस राष्ट्रीय अभियान और अंतर्राष्ट्रीय ढाँचे के अनुरूप है?
यह पहल घरेलू पर्यटन को बढ़ावा देने वाले केंद्र सरकार के 'देखो अपना देश' अभियान और सतत पर्यटन के लिए UNEP (संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम) सिद्धांतों के अनुरूप है।
जयपुर को UNESCO विश्व विरासत शहर कब घोषित किया गया?
जयपुर को 2019 में UNESCO विश्व विरासत शहर घोषित किया गया, जो 18वीं शताब्दी में निर्मित एक नियोजित ऐतिहासिक शहर के रूप में इसके उत्कृष्ट सार्वभौमिक मूल्य को मान्यता देता है।
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