प्रकाशित: 23 फ़रवरी 2026समाचार स्रोतटॉपिक
नक्सलवाद अंतिम चरण में: सरकार ने वामपंथी उग्रवाद को लगभग समाप्त घोषित किया, रेड कॉरिडोर सिकुड़कर बस्तर तक सीमित
फरवरी 2026 तक भारत सरकार ने औपचारिक रूप से कहा कि वामपंथी उग्रवाद, जिसे आम तौर पर नक्सलवाद कहा जाता है, अपने पतन के 'अंतिम चरण' में पहुँच चुका है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि छत्तीसगढ़ में माओवादी विद्रोह के ऐतिहासिक केंद्र बस्तर में नक्सलवाद 'काफ़ी हद तक समाप्त' हो चुका है। कभी 10 राज्यों में फैला रेड कॉरिडोर अब बस्तर और झारखंड-बिहार सीमा के कुछ अलग-थलग इलाकों तक सिमट गया है।
सक्रिय सशस्त्र नक्सली कैडर की संख्या 2024 में 2,000 से अधिक थी, जो 2026 की शुरुआत तक घटकर लगभग 220 रह गई। केवल 2025 में सुरक्षा अभियानों के दौरान 317 नक्सली मारे गए, 800 से अधिक गिरफ्तार किए गए और लगभग 2,000 ने अपनी इच्छा से आत्मसमर्पण किया। इसके पीछे लगातार लागू किया गया 'समाधान' सिद्धांत रहा। इस पाँच सूत्री रणनीति में सुरक्षा अभियान, गुप्तचर सूचनाओं में सुधार, विकास कार्यों की पहुँच बढ़ाना, आत्मसमर्पण और पुनर्वास तथा रसद की आपूर्ति रोकना शामिल है।
प्रमुख उपलब्धियों में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के महासचिव नम्बाला केशव राव सहित शीर्ष माओवादी नेताओं का मारा जाना, जिला कमांडर स्तर के प्रमुख नेताओं का आत्मसमर्पण और पहले दुर्गम रहे इलाकों में नए पुलिस थाने खोलना शामिल था। राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (NIA) ने गैरकानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत धन जुटाने वाले नेटवर्क पर मुकदमे चलाए, जिससे उन्हें धन मिलने के रास्ते बंद हुए। राजस्थान कभी वामपंथी उग्रवाद से सबसे अधिक प्रभावित राज्यों में नहीं रहा, फिर भी बांसवाड़ा, डूंगरपुर और प्रतापगढ़ की आदिवासी पट्टी को महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (MGNREGS), प्रधानमंत्री आवास योजना और जनजातीय कल्याण योजनाओं के ज़रिए 'विकास को सुरक्षा से जोड़ने' की रणनीति अपनाने से लाभ मिलता है।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
फरवरी 2026 तक भारत में नक्सलवाद की स्थिति क्या है?
फरवरी 2026 तक भारत सरकार ने नक्सलवाद को 'अंतिम चरण' में बताया। सक्रिय नक्सली कैडर की संख्या 2,000 से अधिक से घटकर लगभग 220 रह गई है और रेड कॉरिडोर सिकुड़कर बस्तर (छत्तीसगढ़) तथा झारखंड-बिहार सीमा के कुछ अलग-थलग इलाकों तक सीमित हो गया है।
नक्सल-विरोधी अभियानों के लिए भारत का 'समाधान' सिद्धांत क्या है?
'समाधान' सिद्धांत भारत की व्यापक नक्सल-विरोधी रणनीति है। इसमें सुरक्षा अभियान, जनजातीय क्षेत्रों में विकास की रफ़्तार बढ़ाना और नक्सलियों को आत्मसमर्पण के लिए प्रोत्साहित करना शामिल है। यह वामपंथी उग्रवाद को समाप्त करने के लिए सुरक्षा, शासन और पुनर्वास को साथ लेकर चलने वाली बहुआयामी रणनीति है।
नक्सल आंदोलन कहाँ से शुरू हुआ और उसका वैचारिक आधार क्या था?
माओवादी (साम्यवादी) विचारधारा से प्रेरित नक्सल आंदोलन 1967 में पश्चिम बंगाल के नक्सलबाड़ी गाँव से शुरू हुआ। यह जमींदारों और राज्य के विरुद्ध सशस्त्र किसान क्रांति का समर्थन करता था। बाद में यह मध्य और पूर्वी भारत में फैल गया और इसके फैलाव वाले क्षेत्र को रेड कॉरिडोर कहा जाने लगा।
नक्सल-विरोधी अभियानों का नेतृत्व कौन सा सुरक्षा बल करता है और उसकी विशेष इकाई कौन सी है?
केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) अपनी विशेष कोबरा कमांडो इकाइयों के ज़रिए नक्सल-प्रभावित इलाकों में अभियानों का नेतृत्व करता है। इन इकाइयों को जंगल में युद्ध और नक्सल-विरोधी अभियानों के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है।
2025 में नक्सल-विरोधी अभियानों के प्रमुख आँकड़े क्या थे?
केवल 2025 में 'समाधान' सिद्धांत के तहत 317 नक्सली मारे गए, 800 गिरफ्तार किए गए और 2,000 ने आत्मसमर्पण किया। ये आँकड़े बताते हैं कि भारत से वामपंथी उग्रवाद को समाप्त करने के सरकार के अभियान में उल्लेखनीय तेज़ी आई है।