प्रकाशित: 22 फ़रवरी 2026समाचार स्रोतटॉपिक
नक्सलवाद अंतिम चरण में: सरकार ने वामपंथी उग्रवाद को लगभग समाप्त घोषित किया, रेड कॉरिडोर सिकुड़कर बस्तर तक सीमित
फरवरी 2026 तक भारत सरकार ने कहा कि वामपंथी उग्रवाद (LWE), जिसे सामान्यतः नक्सलवाद कहा जाता है, 'अंतिम चरण' में है। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि नक्सलवाद बस्तर से 'काफी हद तक समाप्त' हो गया है। एक समय दस राज्यों में फैला रेड कॉरिडोर अब सिकुड़कर बस्तर (छत्तीसगढ़) और झारखंड-बिहार सीमा तक सीमित हो गया है।
सक्रिय सशस्त्र नक्सली कैडर की संख्या 2024 में 2,000 से अधिक से घटकर 2026 की शुरुआत में लगभग 220 रह गई। केवल 2025 में 317 नक्सली सुरक्षा अभियानों में मारे गए, 800 से अधिक गिरफ्तार हुए और लगभग 2,000 ने स्वेच्छा से आत्मसमर्पण किया। यह 'समाधान' सिद्धांत — सुरक्षा अभियान, खुफिया सुधार, विकास की पहुंच, आत्मसमर्पण-पुनर्वास और रसद में बाधा — से हासिल किया गया।
प्रमुख उपलब्धियों में CPI-माओवादी के महासचिव नम्बाला केशव राव का खात्मा, जिला कमांडरों का आत्मसमर्पण और पहले जिन क्षेत्रों में पहुंचना कठिन था, वहां नए पुलिस थानों की स्थापना शामिल है। राजस्थान के संदर्भ में, बांसवाड़ा, डूंगरपुर और प्रतापगढ़ के आदिवासी क्षेत्रों में 'विकास-सुरक्षा' रणनीति का लागू होना उल्लेखनीय है।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
फरवरी 2026 तक भारत में नक्सलवाद की वर्तमान स्थिति क्या है?
फरवरी 2026 तक भारत सरकार ने नक्सलवाद को 'अंतिम चरण' में बताया। सक्रिय नक्सलियों की संख्या 2,000 से अधिक से घटकर लगभग 220 रह गई है और रेड कॉरिडोर सिकुड़कर बस्तर (छत्तीसगढ़) और झारखंड-बिहार सीमा के अलग-थलग इलाकों तक सीमित हो गया है।
नक्सल-विरोधी अभियानों के लिए भारत का 'समाधान' सिद्धांत क्या है?
'समाधान' सिद्धांत भारत की व्यापक नक्सल-विरोधी रणनीति है, जिसमें सुरक्षा अभियान, जनजातीय क्षेत्रों का त्वरित विकास और नक्सलियों के आत्मसमर्पण के लिए प्रोत्साहन, तीनों पर एक साथ ध्यान दिया जाता है। यह सुरक्षा, शासन और पुनर्वास को जोड़कर वामपंथी उग्रवाद समाप्त करने का बहुआयामी दृष्टिकोण है।
नक्सल आंदोलन का उद्भव कहाँ हुआ और इसका वैचारिक आधार क्या है?
नक्सल आंदोलन 1967 में पश्चिम बंगाल के नक्सलबाड़ी गाँव में माओवादी (साम्यवादी) विचारधारा से प्रेरित होकर उभरा। यह जमींदारों और राज्य के विरुद्ध सशस्त्र किसान क्रांति का समर्थन करता था और बाद में मध्य व पूर्वी भारत में फैलकर रेड कॉरिडोर के रूप में जाना गया।
नक्सल-विरोधी अभियानों का नेतृत्व कौन सा सुरक्षा बल करता है और उसकी विशेष इकाई कौन सी है?
केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) अपनी विशेष CoBRA (कमांडो बटालियन फॉर रिज़ॉल्यूट एक्शन) कमांडो इकाइयों से नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में अभियानों का नेतृत्व करता है। ये इकाइयाँ जंगलों में युद्ध और नक्सल क्षेत्रों में आतंकवाद-रोधी अभियानों के लिए विशेष रूप से प्रशिक्षित हैं।
2025 में नक्सल-विरोधी अभियानों के प्रमुख आँकड़े क्या थे?
केवल 2025 में 317 नक्सली मारे गए, 800 को गिरफ्तार किया गया और समाधान सिद्धांत के तहत 2,000 ने आत्मसमर्पण किया। इन आँकड़ों से साफ है कि वामपंथी उग्रवाद को समाप्त करने के सरकार के प्रयासों में उल्लेखनीय तेजी आई है।