आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 को 29 जनवरी 2026 को संसद में प्रस्तुत किया गया। इसमें तीन महत्त्वपूर्ण नीति क्षेत्रों पर विशेष अध्याय शामिल किए गए: गिग अर्थव्यवस्था एवं श्रम का औपचारीकरण, राज्य-स्तरीय नियमन में ढील, और जलवायु अनुकूलन रणनीति।

गिग अर्थव्यवस्था अध्याय के अनुसार भारत में गिग कर्मियों की संख्या 1.2 करोड़ है — इनमें प्लेटफ़ॉर्म-आधारित डिलीवरी, राइड-हेलिंग, फ्रीलांसिंग और घरेलू सेवाएँ शामिल हैं। इन श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा का अभाव, अनियमित आय और कानूनी रोजगार दर्जे की कमी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। सर्वेक्षण में 2019-20 में अधिनियमित चार श्रम संहिताओं, विशेषकर सामाजिक सुरक्षा संहिता 2020, के ज़रिए गिग कर्मियों को ऐसे सामाजिक सुरक्षा लाभ देने की सिफारिश की गई है जो नौकरी या प्लेटफ़ॉर्म बदलने पर भी उनके साथ बने रहें। इसका अर्थ है कि कोई कर्मी जब एक प्लेटफ़ॉर्म से दूसरे पर जाए, तो उसके संचित लाभ नष्ट न हों।

नियमन में ढील वाले अध्याय में 2021 से 2025 के बीच 630 से अधिक राज्य-स्तरीय नियामक सुधारों का विवरण दिया गया है। इनमें व्यापार लाइसेंसिंग का सरलीकरण, भूमि उपयोग अनुमोदन, पर्यावरण मंजूरियाँ और भवन निर्माण अनुमतियाँ शामिल हैं। सर्वेक्षण का तर्क है कि जिन राज्यों ने नियमन में तेजी से ढील दी, उन्हें अधिक FDI और MSME विकास मिला। यह 'नियामक गिलोटिन' — पुराने नियमों की व्यवस्थित समीक्षा और समाप्ति — की वकालत करता है।

जलवायु अध्याय में भारत की 'अनुकूलन-प्रथम' रणनीति को वैश्विक शमन-केंद्रित दृष्टिकोण से अलग बताया गया है। सर्वेक्षण में चेतावनी दी गई है कि तेज ऊर्जा संक्रमण से ग्रिड पर दबाव बढ़ेगा और सौर-पवन ऊर्जा की रुक-रुक कर होने वाली आपूर्ति को बेसलोड से समन्वित करना चुनौतीपूर्ण होगा। ग्रिड आधुनिकीकरण, भंडारण क्षमता और प्राकृतिक गैस-आधारित पीकिंग क्षमता में निवेश की सिफारिश की गई है।