खान मंत्रालय ने 10 अक्टूबर 2025 की राजपत्र अधिसूचना द्वारा 'भवन-निर्माण सामग्री के रूप में उपयोग के लिए चूना भट्टियों में प्रयुक्त चूना-पत्थर' को लघु खनिज श्रेणी से हटाकर चूना-पत्थर को पूरी तरह प्रमुख खनिज घोषित कर दिया। पहले चूना-पत्थर दोहरे वर्गीकरण में था: भवन-चूना भट्टियों के लिए लघु खनिज तथा सीमेंट, इस्पात, रसायन, चीनी व उर्वरक के लिए प्रमुख खनिज। 13 अक्टूबर 2025 को धारा 20A के अंतर्गत जारी संक्रमण आदेश से मौजूदा लघु-खनिज पट्टाधारकों को 31 मार्च 2026 तक IBM में पंजीकरण कराने तथा मौजूदा खनन योजनाएं 31 मार्च 2027 तक जारी रखने की सुविधा दी गई है। यह कदम अंतिम उपयोग से जुड़े प्रतिबंध हटाकर व्यापार करना आसान बनाता है। सर्वाधिक चूना-पत्थर उत्पादक राज्य राजस्थान को इससे विशेष लाभ होगा।