प्रकाशित: 19 सितंबर 2025अर्थव्यवस्था
RBI ने सभी विनियमों की आवधिक समीक्षा के लिए विनियामक समीक्षा प्रकोष्ठ स्थापित किया
भारतीय रिज़र्व बैंक ने 1 अक्टूबर 2025 से प्रभावी विनियामक समीक्षा प्रकोष्ठ (RRC) की स्थापना की घोषणा की, ताकि सभी विनियमों की हर 5 से 7 वर्ष में नियमित समीक्षा सुनिश्चित की जा सके। हितधारकों की राय लेने के लिए बाहरी विशेषज्ञों वाला एक स्वतंत्र विनियमन सलाहकार समूह (AGR) भी गठित किया गया है।
RRC मौजूदा विनियमों की प्रासंगिकता, प्रभावशीलता और अनुपालन के बोझ की व्यवस्थित जाँच करेगा। इस पहल का उद्देश्य विनियामक जटिलता कम करना, पुराने प्रावधान हटाना और ज़रूरी एहतियाती उपाय बनाए रखते हुए वित्तीय क्षेत्र में कारोबार आसान बनाना है। छह सदस्यीय AGR की अध्यक्षता भारतीय स्टेट बैंक के राणा आशुतोष कुमार सिंह करते हैं। इसमें भारतीय स्टेट बैंक (SBI), Sundaram Finance, Saraswat Co-operative Bank, Federal Bank, Jana Small Finance Bank और ICICI Prudential Life Insurance के वित्तीय क्षेत्र के वरिष्ठ प्रतिनिधि शामिल हैं।
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जुड़ा प्रश्नमध्यम
6 सितंबर 2025 की पहली किस्त के बाद बैंकों की नकद आरक्षित अनुपात दर कितनी थी?
व्याख्या · सही उत्तर D6 सितंबर 2025 से लागू पहली 25 बेसिस पॉइंट कटौती के बाद बैंकों के लिए CRR, NDTL का 3.75% हो गया। अगली कटौतियाँ अलग-अलग तारीखों से लागू होनी थीं, इसलिए पहली किस्त के तुरंत बाद सही दर 3.75% है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
2025 में स्थापित RBI विनियामक समीक्षा प्रकोष्ठ क्या है?
**RBI ने विनियामक समीक्षा प्रकोष्ठ (RRC) की स्थापना की, जो 1 अक्टूबर 2025 से प्रभावी है और हर 5 से 7 वर्ष में सभी विनियमों की समीक्षा करेगा।** यह प्रकोष्ठ RBI के सभी विनियमों की जाँच करके पुराने या अनावश्यक प्रावधानों को हटाएगा।
RBI ने विनियामक समीक्षा प्रकोष्ठ क्यों स्थापित किया?
**हितधारकों की राय लेने के लिए बाहरी विशेषज्ञों वाला स्वतंत्र विनियमन सलाहकार समूह (AGR) गठित किया गया है।** इसका उद्देश्य बैंकों और वित्तीय संस्थानों के विनियामक ढाँचे को सरल और आधुनिक बनाना है।
RBI का विनियामक समीक्षा प्रकोष्ठ किन प्रकार के विनियमों की जाँच करेगा?
**AGR में भारतीय स्टेट बैंक सहित बैंकों, गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों और बीमा क्षेत्र के वरिष्ठ प्रतिनिधि शामिल हैं।** बैंकिंग, NBFC, भुगतान प्रणालियों और विदेशी मुद्रा से जुड़े विनियम प्रकोष्ठ के दायरे में हैं।
RBI के विनियामक समीक्षा प्रकोष्ठ से बैंकों और वित्तीय संस्थानों को क्या लाभ होगा?
**इस पहल का उद्देश्य विनियामक जटिलता कम करना, पुराने प्रावधान हटाना और वित्तीय क्षेत्र में कारोबार आसान बनाना है।** अनावश्यक विनियम हटने से अनुपालन का बोझ कम होता है और भारत के वित्तीय क्षेत्र में कारोबार करना आसान होता है।
RBI की आवधिक विनियामक समीक्षा का व्यापक उद्देश्य क्या है?
**व्यापक उद्देश्य समय-समय पर समीक्षा करके RBI के विनियमों को प्रासंगिक और प्रभावी बनाए रखना है।** ऐसी समीक्षाओं से विनियामक ढाँचा तेज़ी से बदलते वित्तीय क्षेत्र के अनुरूप बना रहता है।