प्रकाशित: 18 सितंबर 2025अर्थव्यवस्था
RBI ने सभी विनियमों की आवधिक समीक्षा के लिए विनियामक समीक्षा प्रकोष्ठ स्थापित किया
भारतीय रिज़र्व बैंक ने 1 अक्टूबर 2025 से प्रभावी विनियामक समीक्षा प्रकोष्ठ (RRC) की स्थापना की घोषणा की, ताकि सभी विनियमों की हर 5 से 7 वर्ष में नियमित समीक्षा सुनिश्चित की जा सके। हितधारकों की राय लेने के लिए बाहरी विशेषज्ञों वाला एक स्वतंत्र विनियमन सलाहकार समूह (AGR) भी गठित किया गया है।
RRC मौजूदा विनियमों की प्रासंगिकता, प्रभावशीलता और अनुपालन के बोझ की व्यवस्थित जांच करेगा। इस पहल का उद्देश्य विनियामक जटिलता कम करना, पुराने प्रावधानों को हटाना और विवेकपूर्ण सुरक्षा उपायों को बनाए रखते हुए वित्तीय क्षेत्र में अधिक व्यापार-अनुकूल वातावरण बनाना है। AGR में बैंकिंग, NBFC, फिनटेक और शिक्षा जगत के प्रतिनिधि शामिल होंगे।
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जुड़ा प्रश्नमध्यम
6 सितंबर 2025 की पहली किस्त के बाद बैंकों की नकद आरक्षित अनुपात दर कितनी थी?
व्याख्या · सही उत्तर D6 सितंबर 2025 से लागू पहली 25 बेसिस पॉइंट कटौती के बाद बैंकों के लिए CRR, NDTL का 3.75% हो गया। अगली कटौतियाँ अलग-अलग तारीखों से लागू होनी थीं, इसलिए पहली किस्त के तुरंत बाद सही दर 3.75% है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
2025 में स्थापित RBI रेगुलेटरी रिव्यू सेल क्या है?
RBI ने रेगुलेटरी रिव्यू सेल (RRC) को 1 अक्टूबर 2025 से प्रभावी रूप में स्थापित किया। यह सेल पुराने या अनावश्यक प्रावधानों को हटाने के लिए सभी RBI विनियमों की समय-समय पर समीक्षा करेगा।
RBI ने रेगुलेटरी रिव्यू सेल क्यों स्थापित किया?
बाहरी विशेषज्ञों वाला स्वतंत्र नियमन सलाहकार समूह (AGR) हितधारकों की प्रतिक्रिया के लिए बनाया गया था। लक्ष्य बैंकों और वित्तीय संस्थाओं के लिए नियामक ढाँचे को सरल और आधुनिक बनाना है।
RBI रेगुलेटरी रिव्यू सेल किन विनियमों की जाँच करेगा?
AGR में बैंकिंग, NBFC, फिनटेक और शिक्षा जगत के प्रतिनिधि शामिल हैं। बैंकिंग, NBFC, भुगतान प्रणाली और विदेशी मुद्रा नियम सभी सेल के दायरे में हैं।
RBI रेगुलेटरी रिव्यू सेल से बैंकों और वित्तीय व्यवसायों को क्या लाभ होगा?
इस पहल का उद्देश्य नियामकीय जटिलता घटाना, पुराने प्रावधान हटाना और अधिक व्यापार-अनुकूल व्यवस्था बनाना है। अनावश्यक विनियम हटाने से अनुपालन का बोझ कम होता है और भारत के वित्तीय क्षेत्र में व्यापार करना आसान होता है।
RBI की आवधिक नियामक समीक्षा का व्यापक उद्देश्य क्या है?
भारतीय रिज़र्व बैंक ने एक रेगुलेटरी रिव्यू सेल (RRC) की स्थापना की घोषणा की। आवधिक समीक्षाएँ यह सुनिश्चित करती हैं कि तेजी से बदलते वित्तीय परिदृश्य में विनियम प्रासंगिक और प्रभावी बने रहें।