विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने 13 जनवरी 2026 को उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता संवर्धन विनियम, 2026 अधिसूचित किए। इनका उद्देश्य 2012 के पुराने भेदभाव-विरोधी विनियमों को संशोधित कर और मजबूत बनाना था। अधिसूचित 2026 ढांचे में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग को स्पष्ट रूप से शामिल किया गया। साथ ही प्रत्येक संस्थान में समान अवसर केंद्र (ईओसी), संस्थान प्रमुखों की अध्यक्षता में वंचित वर्गों के प्रतिनिधित्व वाली समानता समितियां, साल में दो बार रिपोर्टिंग, उल्लंघन पर कार्यक्रम की मान्यता रद्द करने सहित कड़े दंड, और राष्ट्रीय स्तर की यूजीसी निगरानी समिति प्रस्तावित की गई।

हालांकि, 29 जनवरी 2026 को उच्चतम न्यायालय ने 2026 के इन विनियमों को अगले आदेश तक स्थगित रखने का आदेश दिया, और इस बीच 2012 के यूजीसी विनियम लागू रहेंगे। अतः 2026 के प्रावधानों को अधिसूचित किंतु वर्तमान में लागू नहीं माना जाना चाहिए।